21 जुलाई 2026
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सीजेपी विरोध प्रदर्शन: रईस शेख का केंद्र पर हमला — 'जनता का गुस्सा जन आंदोलन बन चुका है'

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सीजेपी विरोध प्रदर्शन: रईस शेख का केंद्र पर हमला — 'जनता का गुस्सा जन आंदोलन बन चुका है'

सारांश

समाजवादी पार्टी विधायक रईस शेख ने सीजेपी के विरोध प्रदर्शन का हवाला देते हुए केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। नीट लीक, सोनम वांगचुक प्रकरण और जंतर-मंतर पर कड़ी सुरक्षा को जनाक्रोश की वजह बताते हुए उन्होंने कहा — यह अब महज विरोध नहीं, जन आंदोलन है।

मुख्य बातें

समाजवादी पार्टी विधायक रईस शेख ने 20 जुलाई को सीजेपी विरोध प्रदर्शन के संदर्भ में केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
शेख ने जंतर-मंतर को 'सुरक्षा के नाम पर जेल में तब्दील' करने का आरोप लगाया।
नीट पेपर लीक को देशभर के लाखों छात्रों की निराशा और विरोध प्रदर्शनों की प्रमुख वजह बताया।
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को अदालत के आदेश पर उनकी इच्छा के विरुद्ध अस्पताल ले जाए जाने पर नाराज़गी जताई।
शेख ने चेतावनी दी कि सरकार ने संवाद नहीं किया तो विरोध प्रदर्शन और व्यापक होंगे।

समाजवादी पार्टी (SP) के विधायक रईस शेख ने 20 जुलाई को मुंबई में सीजेपी (Citizens for Justice and Peace) के विरोध प्रदर्शन के संदर्भ में केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि देशभर में विभिन्न मुद्दों पर उपजा जनता का असंतोष अब एक व्यापक जन आंदोलन का रूप ले चुका है और सरकार को तत्काल संवाद की पहल करनी चाहिए।

जंतर-मंतर को 'जेल' बताया

शेख ने कहा कि जंतर-मंतर को सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर एक तरह से जेल में तब्दील कर दिया गया है। उनके अनुसार यह विरोध प्रदर्शन किसी एक राजनीतिक दल — चाहे वह समाजवादी पार्टी हो, कांग्रेस हो या कोई अन्य संगठन — का नहीं, बल्कि आम जनता के गुस्से और असंतोष की सामूहिक अभिव्यक्ति है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनहित के मुद्दों पर सरकार की कथित विफलताओं ने लोगों को सड़कों पर उतरने पर मजबूर किया है।

नीट पेपर लीक और छात्रों की पीड़ा

नीट पेपर लीक मामले का उल्लेख करते हुए शेख ने कहा कि इस घटनाक्रम ने देशभर के लाखों छात्रों और उनके परिवारों को गहरी निराशा में धकेल दिया है। उनके अनुसार इस विवाद के चलते कई छात्रों ने अपनी जान तक गंवा दी। शिक्षा, युवाओं और जनसरोकार से जुड़े अनेक मुद्दों पर सरकार के प्रभावी समाधान न दे पाने को उन्होंने देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों की मुख्य वजह बताया।

सोनम वांगचुक प्रकरण पर नाराज़गी

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का ज़िक्र करते हुए शेख ने कहा कि उनका अनशन समाप्त कराने के लिए अदालत के आदेश का सहारा लिया गया और उनकी इच्छा के विरुद्ध उन्हें अस्पताल ले जाया गया। उनके अनुसार इस घटनाक्रम ने लोगों में नाराज़गी और बढ़ाई तथा आंदोलन को और अधिक बल दिया।

संसद भवन के बाहर सुरक्षा पर सवाल

संसद भवन के बाहर प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए कड़ी की गई सुरक्षा व्यवस्था पर भी शेख ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है और यह जनता के लिए है। यदि नागरिक अपनी बात रखने आते हैं तो सरकार को उनसे संवाद करना चाहिए। उनका मानना है कि बिना संवाद के विरोध और संघर्ष जारी रहेंगे।

आगे क्या होगा

शेख ने आरोप लगाया कि सरकार अपने रवैये में बदलाव के संकेत नहीं दे रही और न ही प्रदर्शनकारियों या विपक्ष के साथ सार्थक संवाद की पहल कर रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवाद ही समस्याओं के समाधान का सबसे प्रभावी माध्यम है और सरकार को इस दिशा में गंभीरता से कदम उठाने चाहिए। यदि सरकार ने संवाद का रास्ता नहीं अपनाया तो आंदोलन और व्यापक होने की आशंका बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इन्हें एकसूत्र में पिरोकर 'जन आंदोलन' का दर्जा देना राजनीतिक लाभ की भी कोशिश है। जंतर-मंतर पर सुरक्षा कड़ी करने की आलोचना वैध है, पर सरकार की ओर से संवाद की कोई ठोस पहल न होने का आरोप तब तक अधूरा रहेगा जब तक विपक्ष स्वयं बातचीत की मेज़ पर बैठने को तैयार न हो।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रईस शेख ने सीजेपी विरोध प्रदर्शन पर क्या कहा?
समाजवादी पार्टी विधायक रईस शेख ने कहा कि सीजेपी का विरोध प्रदर्शन किसी एक दल का नहीं बल्कि जनता के व्यापक असंतोष की अभिव्यक्ति है। उन्होंने इसे जन आंदोलन का रूप बताते हुए केंद्र सरकार से संवाद की माँग की।
नीट पेपर लीक को इस आंदोलन से कैसे जोड़ा गया?
शेख ने कहा कि नीट पेपर लीक मामले ने देशभर के लाखों छात्रों और उनके परिवारों को गहरी निराशा में डाल दिया और कई छात्रों ने जान तक गंवाई। इसे उन्होंने सरकार की कथित विफलताओं और देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों की प्रमुख वजहों में से एक बताया।
सोनम वांगचुक प्रकरण का आंदोलन से क्या संबंध है?
शेख के अनुसार सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल अदालत के आदेश पर उनकी इच्छा के विरुद्ध समाप्त कराई गई और उन्हें अस्पताल ले जाया गया। इस घटनाक्रम ने लोगों में नाराज़गी बढ़ाई और आंदोलन को और बल दिया।
जंतर-मंतर पर सुरक्षा को लेकर शेख ने क्या आपत्ति जताई?
शेख ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर जंतर-मंतर को जेल में तब्दील कर दिया गया है। उनका कहना है कि संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है और सरकार को नागरिकों से संवाद करना चाहिए, न कि उन्हें रोकना चाहिए।
क्या सरकार ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की कोई पहल की है?
शेख ने आरोप लगाया कि सरकार अपने रवैये में बदलाव के संकेत नहीं दे रही और न ही प्रदर्शनकारियों या विपक्ष के साथ सार्थक संवाद की पहल कर रही है। उनके अनुसार बिना संवाद के विरोध और संघर्ष आगे भी जारी रहेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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