नीट पेपर लीक: सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास बोले — 'मांगें मानो, तभी नड्डा से मिलेंगे'
सारांश
मुख्य बातें
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने 22 जुलाई को स्पष्ट किया कि उनका संगठन केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से तभी मुलाकात करेगा, जब सरकार उनकी मांगें पूरी करने पर सहमत हो। जंतर-मंतर, नई दिल्ली पर सीजेपी का विरोध प्रदर्शन बुधवार को लगातार जारी रहा, जिसमें नीट पेपर लीक मामले में जवाबदेही और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मुख्य माँग बनी हुई है।
नड्डा के दूसरे निमंत्रण पर सीजेपी का कड़ा रुख
सौरव दास ने बताया कि जेपी नड्डा ने दूसरी बार बातचीत के लिए बुलाया है, लेकिन सीजेपी ने शर्त रख दी है। उन्होंने कहा, 'हमने साफ तौर पर कह दिया है कि हम घर या ऑफिस नहीं आ रहे हैं। पहली मुलाकात में हमें चार घंटे रोके रखा गया था। हमारी तरफ से कहा गया है कि अगर हमारी मांगें पूरी करेंगे, तभी हमें बुलाइए।' यह बयान सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बढ़ते गतिरोध की ओर इशारा करता है।
मुख्य मांग: शिक्षा मंत्री का इस्तीफा
सीजेपी के प्रवक्ता ने नीट पेपर लीक को केंद्र में रखते हुए कहा कि देश के सभी प्रदर्शनकारियों का एक ही मुद्दा है — सरकार की ओर से जवाबदेही तय होनी चाहिए और शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना होगा। उन्होंने पीएम आवास के बाहर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शन का भी समर्थन किया और कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता के रूप में यह उनका कर्तव्य है।
20 जुलाई की हिंसा पर सीजेपी का पक्ष
20 जुलाई को प्रदर्शन स्थल पर हुई हिंसा के सवाल पर सौरव दास ने कहा कि सबसे अधिक लाठियाँ पुलिस की ओर से ही चलाई गईं और बच्चों के सिर पर चोटें आईं। उन्होंने कहा, 'लोकतंत्र में इतने सालों में ऐसा पहली बार हुआ।' हालाँकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके आंदोलन में हिंसा की कोई जगह नहीं है और जो लोग हिंसा कर रहे हैं, पुलिस को उन्हें हटाना चाहिए।
आलोचनाओं पर सीजेपी का जवाब
आम आदमी पार्टी (AAP) की बी-टीम बताए जाने के आरोपों पर सौरव दास ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि कुछ लोगों ने उन्हें आतंकवादी भी कहा है। उन्होंने कहा कि देश के 65 प्रतिशत युवा सच जानते हैं और बिना किसी अपील के प्रदर्शनकारियों को खाना-पानी पहुँचाया जा रहा है। मीडिया द्वारा टार्गेट किए जाने के आरोप पर उन्होंने युवाओं को समझाया कि हिंसा आंदोलन को कमज़ोर कर सकती है।
आगे क्या होगा
सीजेपी का जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन जारी है और सरकार के साथ बातचीत का रास्ता फिलहाल बंद दिख रहा है। सीजेपी के रुख को देखते हुए यह स्पष्ट है कि जब तक शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग पर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलता, आंदोलन थमने के आसार नहीं हैं।