जंतर-मंतर आंदोलन: सीजेपी ने स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखा, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे समेत 4 मांगें रखीं
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में जंतर-मंतर पर जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (सीजेपी) ने 24 जुलाई को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को औपचारिक पत्र लिखकर अपनी प्रमुख मांगें सामने रखीं। संगठन ने सरकार से शीघ्र समाधान की अपेक्षा करते हुए स्पष्ट चेतावनी दी कि मांगें न माने जाने पर यह आंदोलन देशभर में और व्यापक रूप लेगा।
मुख्य मांगें क्या हैं
सीजेपी ने पत्र में चार प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली और सबसे महत्वपूर्ण मांग यह है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से तत्काल इस्तीफा दें। दूसरी मांग है कि नीट परीक्षा से प्रभावित छात्रों को उचित मुआवजा प्रदान किया जाए। तीसरी मांग के तहत आंदोलन में शामिल प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध कोई भी कानूनी कार्रवाई न की जाए।
चौथी और अत्यंत संवेदनशील मांग यह है कि भारत सरकार, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के प्रमुख और दिल्ली पुलिस आयुक्त उन छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें, जिनके साथ प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर बल प्रयोग किया गया। सीजेपी का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने छात्रों के साथ बेरहमी बरती और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
सर्वसम्मति से तय हुई मांगें
सीजेपी के अनुसार, ये मांगें हवा में नहीं उठाई गई हैं। संगठन ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में देशभर के समर्थकों, सदस्यों और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद इन मांगों पर सर्वसम्मति बनी है। संगठन ने स्पष्ट किया कि इन मुद्दों पर किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा।
यह ऐसे समय में आया है जब नीट विवाद पूरे देश में छात्रों और अभिभावकों के बीच गहरी चिंता का विषय बना हुआ है। गौरतलब है कि परीक्षा प्रणाली में अनियमितताओं के आरोप पहले से ही सरकार के लिए राजनीतिक दबाव का कारण बने हुए हैं।
परीक्षा सुधारों पर पाँच सूत्रीय प्रस्ताव
इन तात्कालिक मांगों के अलावा सीजेपी ने परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों के लिए तैयार किए गए अपने पाँच सूत्रीय मांग पत्र पर भी सरकार से प्रतिक्रिया मांगी है। संगठन का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए संरचनात्मक सुधार अनिवार्य हैं।
सीजेपी ने यह भी कहा कि वह सरकार की उस पहल का स्वागत करता है जिसके तहत दोनों पक्षों के लिए स्वीकार्य समाधान तलाशने की कोशिश हो रही है — लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि बिना ठोस परिणाम के बातचीत का कोई अर्थ नहीं।
सरकार की प्रतिक्रिया
यह पत्र सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका की ओर से भेजा गया है। अब तक केंद्र सरकार की ओर से इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आगे क्या होगा
सीजेपी ने साफ कर दिया है कि यदि समय रहते सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन और तेज होगा और देश के विभिन्न हिस्सों में इसका विस्तार किया जाएगा। सभी की निगाहें अब केंद्र सरकार पर टिकी हैं कि वह इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है और जंतर-मंतर पर चल रहे इस आंदोलन के समाधान की दिशा में आगे कौन-से कदम उठाए जाते हैं।