सोनम वांगचुक अस्पताल में भर्ती: विपक्ष बोला 'लोकतंत्र की हत्या', भाजपा ने कहा अराजकता फैलाने की साज़िश
सारांश
मुख्य बातें
जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस द्वारा जंतर-मंतर से अस्पताल भेजे जाने के बाद देशभर में राजनीतिक बहस तेज़ हो गई। नीट पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग को लेकर 20 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे वांगचुक की तबीयत बिगड़ने पर यह कदम उठाया गया। दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देशों और चिकित्सा विशेषज्ञों की सलाह के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।
विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने इस कार्रवाई को लोकतंत्र पर हमला बताया। उन्होंने कहा, 'यह बहुत दुखद है। इस देश में कोई भी शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर सकता है। इतने दिनों से उपवास कर रहे व्यक्ति से बात करने के बजाय सरकार ने उन्हें वहाँ से हटाने का रास्ता चुना।'
कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने कहा कि सरकार को पहले वांगचुक की माँगों पर संवाद शुरू करना चाहिए था। उन्होंने कहा, 'माँगें अनुचित नहीं थीं। पूरा देश शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में सुधार चाहता है, क्योंकि इसमें लोगों का भरोसा कम हो गया है।'
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के नेता अमित ठाकरे ने इसे भारतीय राजनीति के इतिहास के सबसे काले दिनों में से एक करार दिया। उन्होंने कहा, 'मैंने अपनी आँखों के सामने लोकतंत्र को इस तरह मरते हुए कभी नहीं देखा। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की तो बात ही छोड़िए, केंद्र सरकार की ओर से कोई भी उनसे बातचीत करने नहीं आया।'
राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस विधायक टीका राम जुली ने आरोप लगाया कि कोई भी मंत्री, भाजपा पदाधिकारी या सरकारी अधिकारी वांगचुक से बात करने नहीं गया। उन्होंने कहा कि दबाव महसूस करते हुए सरकार ने उन्हें विरोध स्थल से हटाकर 'अलोकतांत्रिक और तानाशाहीपूर्ण व्यवहार' किया और धरने में शामिल लोगों के साथ मारपीट भी की गई।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता सौगत रॉय ने इस कदम को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि वे शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग का समर्थन करते हैं, हालाँकि उच्च न्यायालय के आदेश पर की गई कार्रवाई पर टिप्पणी करना कठिन है। राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को 'शर्मनाक, कायरतापूर्ण और गैरकानूनी' बताया।
भाजपा और एनडीए का पलटवार
भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि कुछ लोगों का काम अस्थिरता और अराजकता फैलाना और लोगों के बीच बंटवारा पैदा करना है ताकि राष्ट्रीय भावना न पनपे। उन्होंने कहा, 'अदालत जो भी आदेश देती है, उसका पालन करना हर सरकार का कर्तव्य है।'
जनता दल (यूनाइटेड) के नेता नीरज कुमार ने कहा कि शारीरिक कष्ट सहकर विरोध करना सही नहीं है, भले ही माँग कानूनी रूप से उचित हो। साथ ही उन्होंने यह भी माना कि ऐसी परिस्थितियों में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनाए।
वांगचुक का अनशन और पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि सोनम वांगचुक नीट पेपर लीक विवाद को लेकर 20 दिनों से आमरण अनशन पर थे। उनकी मुख्य माँग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा थी। यह ऐसे समय में आया है जब नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में छात्र आंदोलन चल रहे हैं और मामला सर्वोच्च न्यायालय में भी विचाराधीन है।
आगे क्या होगा
अस्पताल में भर्ती होने के बाद वांगचुक के अनशन की स्थिति और सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर सबकी निगाहें टिकी हैं। विपक्षी दलों ने संकेत दिया है कि वे इस मुद्दे को संसद में उठाएँगे। नीट सुधार और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग को लेकर राजनीतिक दबाव आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है।