सोनम वांगचुक आंदोलन पर टीकाराम जूली का तंज: '20 दिन संवाद नहीं, अब तानाशाही से दमन'
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने 18 जुलाई 2026 को सोनम वांगचुक के आंदोलन पर केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि सरकार ने करीब 20 दिनों तक प्रदर्शनकारियों से कोई संवाद स्थापित नहीं किया और अब तानाशाहीपूर्ण रवैये से इस आंदोलन को दबाने की कोशिश की जा रही है। उनके अनुसार, जन आंदोलनों को इस प्रकार कुचलना लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है।
मुख्य आरोप: संवाद की जगह दमन
जूली ने कहा कि 20 दिनों के दौरान न कोई मंत्री, न भारतीय जनता पार्टी (BJP) का कोई पदाधिकारी और न ही कोई सरकारी अधिकारी वांगचुक से मिलने पहुँचा। जब देश-विदेश में उनकी तबीयत को लेकर चिंता बढ़ी और जनदबाव बना, तब सरकार ने उन्हें प्रदर्शन स्थल से हटाकर अलोकतांत्रिक कदम उठाया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि धरने में शामिल लोगों के साथ मारपीट की गई, जिसे उन्होंने 'निंदनीय' करार दिया।
दिल्ली पुलिस कमिश्नर की नियुक्ति पर सवाल
जूली ने दिल्ली पुलिस आयुक्त के पद पर आईपीएस अधिकारी अनुराग कुमार की नियुक्ति को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि ऐसी नियुक्तियाँ पूर्व-निर्धारित एजेंडे के तहत होती हैं, जहाँ स्वायत्त संस्थाओं में ऐसे अधिकारियों को बैठाया जाता है जो सत्ता के निर्देशों का पालन करें। उनके अनुसार, सरकार संवैधानिक भावना की जगह राजनीतिक निष्ठा को प्राथमिकता दे रही है।
यूसीसी पर BJP को घेरा
समान नागरिक संहिता (UCC) के मुद्दे पर भी जूली ने BJP पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार को यह कानून वास्तव में आवश्यक लगता है, तो इसे पूरे देश में एकसमान रूप से लागू किया जाना चाहिए। आलोचकों का कहना है कि BJP केवल अपने शासित राज्यों में UCC लागू कर चुनावी लाभ लेना चाहती है। जूली के अनुसार, संविधान सभी नागरिकों को उनके धर्म, रीति-रिवाज और परंपराओं के अनुसार जीवन जीने का अधिकार देता है और इस व्यवस्था को चुनौती देना संविधान की मूल भावना के विरुद्ध है।
गौशाला अनियमितताओं पर स्वतंत्र जाँच की माँग
जूली ने गौशालाओं में कथित अनियमितताओं पर भी गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पहले भी सरकारी अनुदान हासिल करने के लिए फर्जी गायें दिखाने के मामले सामने आ चुके हैं और उनकी जाँच भी हुई थी। यदि ऐसे मामले फिर से उभर रहे हैं, तो सरकार को गंभीरता से कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जाँच के लिए एक स्वतंत्र समिति गठित करने की माँग की। यह ऐसे समय में आया है जब एक ओर गायों की मौत की खबरें आ रही हैं और दूसरी ओर अनुदान में धोखाधड़ी के आरोप लग रहे हैं।
आगे क्या
जूली के इन बयानों से राजस्थान की राजनीति में विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच टकराव और तेज होने के संकेत हैं। सोनम वांगचुक के आंदोलन को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती बहस के बीच यह देखना होगा कि केंद्र सरकार इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है।