सोनम वांगचुक पर पुलिस कार्रवाई तानाशाही, 'राम रक्षा' आंदोलन से ध्यान हटाने की साज़िश: संजय राउत
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने शनिवार, 18 जुलाई को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए सोनम वांगचुक के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई को 'पूरी तरह तानाशाही' करार दिया। राउत ने दावा किया कि यह कार्रवाई जानबूझकर नागपुर में शिवसेना (यूबीटी) के 'राम रक्षा' आंदोलन से जनता और मीडिया का ध्यान भटकाने के लिए की गई।
मुख्य आरोप: सरकार ने मुद्दों को नज़रअंदाज़ किया
संजय राउत ने कहा कि केंद्र सरकार उन बुनियादी मांगों को हल करने में पूरी तरह विफल रही, जिन्हें लेकर सोनम वांगचुक 21 दिनों से अनशन पर बैठे थे। उन्होंने कहा, 'सोनम वांगचुक की मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी, लेकिन सरकार ने उनकी मांगों पर कोई कदम नहीं उठाया। इसके बजाय, देश के लाखों छात्रों के भविष्य के लिए अपनी जान तक दांव पर लगाने को तैयार वांगचुक को जबरन पुलिस ने उठाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया। इससे साफ पता चलता है कि देश को किस तरह की तानाशाही की ओर ले जाया जा रहा है।'
सरकार की चुप्पी और अचानक कार्रवाई पर सवाल
राउत ने सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि सत्ता पक्ष को वास्तव में वांगचुक की चिंता होती, तो अनशन शुरू होते ही उनकी मांगों पर संवाद होता। उन्होंने कहा कि सरकार ने कई हफ्तों तक पूरी तरह मौन साधे रखा और अब अचानक पुलिस कार्रवाई की गई — जो उनके अनुसार सुनियोजित राजनीतिक चाल है।
'राम रक्षा' आंदोलन से जोड़ा मामला
यूबीटी नेता ने इस पुलिस कार्रवाई को सीधे महाराष्ट्र की राजनीति से जोड़ा। उनका आरोप है कि दिल्ली पुलिस ने यह कदम इसलिए उठाया ताकि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में नागपुर में आयोजित 'राम रक्षा' आंदोलन से मीडिया और जनता का ध्यान हट जाए। उन्होंने बताया कि यह आंदोलन अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और लूट के खिलाफ आयोजित किया गया है। राउत ने कहा, 'सोनम वांगचुक के खिलाफ की गई यह कार्रवाई इसलिए की गई ताकि नागपुर में शुरू होने वाले बड़े 'एल्गार' आंदोलन से मीडिया और जनता का ध्यान भटकाया जा सके। उन्हें जबरन हिरासत में लेकर अस्पताल भेजा गया ताकि सुर्खियां बदल जाएं।'
उद्धव ठाकरे नागपुर रवाना, शाम 4 बजे नेतृत्व करेंगे
संजय राउत ने स्पष्ट किया कि सरकार की इस रणनीति से उनकी पार्टी पीछे हटने वाली नहीं है। उन्होंने बताया कि उद्धव ठाकरे कार्यक्रम के लिए रवाना हो चुके हैं, वह दोपहर नागपुर पहुंचेंगे और शाम 4 बजे रामनगर स्थित राम मंदिर पहुंचकर आंदोलन का नेतृत्व करेंगे।
सुप्रिया सुले भी उतरीं मैदान में
इससे पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को 'बेहद असंवेदनशील' बताते हुए जंतर-मंतर पहुंचकर सोनम वांगचुक और अभिजीत दिपके से मुलाकात की और अपना समर्थन जताया। सुले ने स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के मद्देनज़र वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील की, लेकिन उन्होंने बताया कि वांगचुक मांगें पूरी होने तक डटे रहने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
सुले ने NEET-UG परीक्षा में कथित पेपर लीक और गड़बड़ियों को देशभर के लाखों छात्रों के साथ गंभीर अन्याय बताया। उन्होंने कहा, 'सोनम वांगचुक देश के लिए अमूल्य हैं। सत्ता पक्ष से किसी को उनके पास जाकर बातचीत शुरू करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।' यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब विपक्षी दल NEET मुद्दे पर केंद्र सरकार को लगातार घेर रहे हैं और महाराष्ट्र में राजनीतिक तनाव चरम पर है।