18 जुलाई 2026
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सोनम वांगचुक पर पुलिस कार्रवाई तानाशाही, 'राम रक्षा' आंदोलन से ध्यान हटाने की साज़िश: संजय राउत

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सोनम वांगचुक पर पुलिस कार्रवाई तानाशाही, 'राम रक्षा' आंदोलन से ध्यान हटाने की साज़िश: संजय राउत

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत का बड़ा आरोप — सोनम वांगचुक पर पुलिस कार्रवाई महज संयोग नहीं, बल्कि नागपुर के 'राम रक्षा' आंदोलन से ध्यान भटकाने की सुनियोजित चाल है। 21 दिन के अनशन के बाद वांगचुक को जबरन अस्पताल भेजा गया, जबकि NEET पेपर लीक पर सरकार की चुप्पी कायम रही।

मुख्य बातें

संजय राउत ने 18 जुलाई को सोनम वांगचुक पर पुलिस कार्रवाई को 'पूरी तरह तानाशाही' करार दिया।
राउत का आरोप — यह कार्रवाई नागपुर में उद्धव ठाकरे के 'राम रक्षा' आंदोलन से मीडिया का ध्यान हटाने के लिए की गई।
सोनम वांगचुक 21 दिनों से अनशन पर थे; उनकी मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी।
सुप्रिया सुले ने जंतर-मंतर पहुंचकर वांगचुक से मुलाकात की और सरकार को 'असंवेदनशील' बताया।
उद्धव ठाकरे शाम 4 बजे रामनगर स्थित राम मंदिर पहुंचकर 'राम रक्षा' आंदोलन का नेतृत्व करेंगे।
आंदोलन कथित तौर पर अयोध्या राम मंदिर से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों के खिलाफ आयोजित किया गया है।

शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने शनिवार, 18 जुलाई को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए सोनम वांगचुक के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई को 'पूरी तरह तानाशाही' करार दिया। राउत ने दावा किया कि यह कार्रवाई जानबूझकर नागपुर में शिवसेना (यूबीटी) के 'राम रक्षा' आंदोलन से जनता और मीडिया का ध्यान भटकाने के लिए की गई।

मुख्य आरोप: सरकार ने मुद्दों को नज़रअंदाज़ किया

संजय राउत ने कहा कि केंद्र सरकार उन बुनियादी मांगों को हल करने में पूरी तरह विफल रही, जिन्हें लेकर सोनम वांगचुक 21 दिनों से अनशन पर बैठे थे। उन्होंने कहा, 'सोनम वांगचुक की मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी, लेकिन सरकार ने उनकी मांगों पर कोई कदम नहीं उठाया। इसके बजाय, देश के लाखों छात्रों के भविष्य के लिए अपनी जान तक दांव पर लगाने को तैयार वांगचुक को जबरन पुलिस ने उठाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया। इससे साफ पता चलता है कि देश को किस तरह की तानाशाही की ओर ले जाया जा रहा है।'

सरकार की चुप्पी और अचानक कार्रवाई पर सवाल

राउत ने सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि सत्ता पक्ष को वास्तव में वांगचुक की चिंता होती, तो अनशन शुरू होते ही उनकी मांगों पर संवाद होता। उन्होंने कहा कि सरकार ने कई हफ्तों तक पूरी तरह मौन साधे रखा और अब अचानक पुलिस कार्रवाई की गई — जो उनके अनुसार सुनियोजित राजनीतिक चाल है।

'राम रक्षा' आंदोलन से जोड़ा मामला

यूबीटी नेता ने इस पुलिस कार्रवाई को सीधे महाराष्ट्र की राजनीति से जोड़ा। उनका आरोप है कि दिल्ली पुलिस ने यह कदम इसलिए उठाया ताकि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में नागपुर में आयोजित 'राम रक्षा' आंदोलन से मीडिया और जनता का ध्यान हट जाए। उन्होंने बताया कि यह आंदोलन अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और लूट के खिलाफ आयोजित किया गया है। राउत ने कहा, 'सोनम वांगचुक के खिलाफ की गई यह कार्रवाई इसलिए की गई ताकि नागपुर में शुरू होने वाले बड़े 'एल्गार' आंदोलन से मीडिया और जनता का ध्यान भटकाया जा सके। उन्हें जबरन हिरासत में लेकर अस्पताल भेजा गया ताकि सुर्खियां बदल जाएं।'

उद्धव ठाकरे नागपुर रवाना, शाम 4 बजे नेतृत्व करेंगे

संजय राउत ने स्पष्ट किया कि सरकार की इस रणनीति से उनकी पार्टी पीछे हटने वाली नहीं है। उन्होंने बताया कि उद्धव ठाकरे कार्यक्रम के लिए रवाना हो चुके हैं, वह दोपहर नागपुर पहुंचेंगे और शाम 4 बजे रामनगर स्थित राम मंदिर पहुंचकर आंदोलन का नेतृत्व करेंगे।

सुप्रिया सुले भी उतरीं मैदान में

इससे पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को 'बेहद असंवेदनशील' बताते हुए जंतर-मंतर पहुंचकर सोनम वांगचुक और अभिजीत दिपके से मुलाकात की और अपना समर्थन जताया। सुले ने स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के मद्देनज़र वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील की, लेकिन उन्होंने बताया कि वांगचुक मांगें पूरी होने तक डटे रहने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

सुले ने NEET-UG परीक्षा में कथित पेपर लीक और गड़बड़ियों को देशभर के लाखों छात्रों के साथ गंभीर अन्याय बताया। उन्होंने कहा, 'सोनम वांगचुक देश के लिए अमूल्य हैं। सत्ता पक्ष से किसी को उनके पास जाकर बातचीत शुरू करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।' यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब विपक्षी दल NEET मुद्दे पर केंद्र सरकार को लगातार घेर रहे हैं और महाराष्ट्र में राजनीतिक तनाव चरम पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजय राउत ने सोनम वांगचुक पर पुलिस कार्रवाई को लेकर क्या कहा?
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने इस कार्रवाई को 'पूरी तरह तानाशाही' बताया और आरोप लगाया कि यह नागपुर में उद्धव ठाकरे के 'राम रक्षा' आंदोलन से मीडिया और जनता का ध्यान हटाने के लिए जानबूझकर की गई। उन्होंने कहा कि सरकार ने वांगचुक की मांगों पर कोई संवाद नहीं किया।
सोनम वांगचुक क्यों अनशन पर बैठे थे और उनकी मांगें क्या थीं?
सोनम वांगचुक NEET-UG परीक्षा में कथित पेपर लीक और गड़बड़ियों के विरोध में 21 दिनों से अनशन पर बैठे थे। उनकी प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा थी।
'राम रक्षा' आंदोलन क्या है और यह नागपुर में क्यों हो रहा है?
शिवसेना (यूबीटी) का 'राम रक्षा' आंदोलन अयोध्या के राम मंदिर निर्माण से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोपों के खिलाफ आयोजित किया गया है। उद्धव ठाकरे 18 जुलाई को नागपुर के रामनगर स्थित राम मंदिर पहुंचकर इसका नेतृत्व करने वाले हैं।
सुप्रिया सुले ने इस मामले में क्या भूमिका निभाई?
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले शुक्रवार को जंतर-मंतर पहुंचीं और सोनम वांगचुक तथा अभिजीत दिपके से मिलकर अपना समर्थन जताया। उन्होंने सरकार को 'बेहद असंवेदनशील' बताया और वांगचुक से स्वास्थ्य कारणों से अनशन समाप्त करने की अपील की।
क्या केंद्र सरकार ने सोनम वांगचुक की मांगों पर कोई प्रतिक्रिया दी?
विपक्षी नेताओं के अनुसार, केंद्र सरकार ने वांगचुक के 21 दिन के अनशन के दौरान कोई बातचीत नहीं की और कई हफ्तों तक मौन रही। इसके बाद पुलिस कार्रवाई कर उन्हें जबरन अस्पताल भर्ती कराया गया। सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान अभी तक सामने नहीं आया है।
राष्ट्र प्रेस
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