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सोनम वांगचुक के 16 दिन के अनशन पर संजय राउत का तीखा सवाल: क्या सरकार उन्हें मरने देना चाहती है?

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सोनम वांगचुक के 16 दिन के अनशन पर संजय राउत का तीखा सवाल: क्या सरकार उन्हें मरने देना चाहती है?

सारांश

पद्मश्री सोनम वांगचुक के 16 दिन के अनशन पर सरकार की खामोशी को शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने चुनौती दी है। उन्होंने NEET लीक और धर्मेंद्र प्रधान पर सवाल उठाते हुए अन्ना हजारे से वांगचुक का समर्थन करने की अपील भी की।

मुख्य बातें

संजय राउत ने 13 जुलाई को मुंबई में केंद्र सरकार पर निशाना साधा, पूछा — 'क्या सरकार सोनम वांगचुक को मारना चाहती है?' सोनम वांगचुक पिछले 16 दिनों से अनशन पर हैं; सरकार की ओर से अब तक कोई संवाद नहीं।
राउत ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर NEET परीक्षा लीक और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
अन्ना हजारे के अनशन से तुलना करते हुए राउत ने कहा कि तत्कालीन सरकार ने संवाद की पहल की थी, मौजूदा सरकार ने नहीं।
राउत ने अन्ना हजारे से वांगचुक से मिलने और उनका समर्थन करने की अपील की।

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने सोमवार, 13 जुलाई को मुंबई में पत्रकारों से बातचीत में केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पर्यावरणविद और पद्मश्री से सम्मानित सोनम वांगचुक पिछले 16 दिनों से अनशन पर हैं, फिर भी सरकार की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई है। राउत ने सीधे सवाल किया — 'क्या सरकार सोनम वांगचुक को मारना चाहती है?'

वांगचुक के अनशन की पृष्ठभूमि

राउत के अनुसार, सोनम वांगचुक एक असाधारण व्यक्तित्व हैं — पर्यावरणविद, शिक्षाविद और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित। उन्होंने स्पष्ट किया कि वांगचुक का यह अनशन किसी व्यक्तिगत माँग के लिए नहीं, बल्कि देश के नागरिकों से जुड़े व्यापक मुद्दों को लेकर है।

धर्मेंद्र प्रधान और NEET विवाद का जिक्र

राउत ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर भी निशाना साधा। उनका आरोप है कि प्रधान के कार्यकाल में NEET जैसी अहम परीक्षा लीक हुई, जिसके चलते कई छात्रों ने अपनी जान तक गँवा दी। राउत के मुताबिक, इन्हीं हालात से आहत होकर वांगचुक अनशन की राह पर उतरे हैं।

सरकार की चुप्पी पर सवाल

राउत ने कहा कि 16 दिन बीत जाने के बाद भी सरकार की ओर से कोई प्रतिनिधि वांगचुक से मिलने नहीं पहुँचा। उन्होंने इसकी तुलना अन्ना हजारे के अनशन से की, जब तत्कालीन सरकार ने संवाद की पहल की थी और अपना पक्ष जानने की कोशिश की थी। राउत ने कहा कि मौजूदा सरकार का यह रवैया अस्वीकार्य है।

अन्ना हजारे से अपील

शिवसेना (यूबीटी) नेता ने अन्ना हजारे से भी अपील की कि वे सोनम वांगचुक से मुलाकात करें और उनके अनशन का समर्थन करें। उनका तर्क है कि जनहित के मुद्दों पर सामाजिक नेताओं की एकजुटता ज़रूरी है।

आगे क्या

राउत की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब सोनम वांगचुक का अनशन राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन चुका है। अब यह देखना होगा कि केंद्र सरकार इस बढ़ते राजनीतिक दबाव पर कोई प्रतिक्रिया देती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो एक अलग विवाद है। इस मिश्रण से मूल मुद्दे की धार कमज़ोर पड़ने का जोखिम है। असली सवाल यह है कि 16 दिन बाद भी सरकारी चुप्पी क्यों बनी हुई है — और क्या यह रणनीतिक है या प्रशासनिक लापरवाही।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोनम वांगचुक किस मुद्दे पर अनशन पर हैं?
सोनम वांगचुक पद्मश्री से सम्मानित पर्यावरणविद और शिक्षाविद हैं जो 16 दिनों से अनशन पर हैं। संजय राउत के अनुसार, उनका यह कदम जनहित के व्यापक मुद्दों को लेकर है और वे सभी नागरिकों के लिए यह लड़ाई लड़ रहे हैं।
संजय राउत ने धर्मेंद्र प्रधान पर क्या आरोप लगाए?
राउत ने आरोप लगाया कि केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में NEET परीक्षा लीक हुई और भ्रष्टाचार हुआ, जिसके चलते कई छात्रों ने अपनी जान गँवाई। हालाँकि, ये आरोप राउत के बयान पर आधारित हैं और सरकार की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
राउत ने अन्ना हजारे का जिक्र क्यों किया?
राउत ने अन्ना हजारे के अनशन का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय सरकार ने संवाद की पहल की थी, जबकि वांगचुक के मामले में 16 दिन बाद भी ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने हजारे से वांगचुक से मिलने और उनका समर्थन करने की अपील भी की।
केंद्र सरकार ने वांगचुक के अनशन पर क्या प्रतिक्रिया दी?
राउत के बयान के अनुसार, 16 दिन बीत जाने के बाद भी सरकार की ओर से कोई प्रतिनिधि सोनम वांगचुक से मिलने नहीं पहुँचा और कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया। सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।
शिवसेना (यूबीटी) का इस मामले में क्या रुख है?
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने वांगचुक के अनशन को पूरा समर्थन दिया है। संजय राउत ने सरकार की चुप्पी को अस्वीकार्य बताते हुए माँग की है कि सरकार वांगचुक से तत्काल संवाद स्थापित करे।
राष्ट्र प्रेस
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