संजय राउत का मोदी सरकार के 12 साल पर हमला, चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने 11 जून 2026 को मुंबई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 साल के कार्यकाल पर तीखा प्रहार करते हुए चुनावी प्रक्रिया, चुनाव आयोग (ECI) और सर्वोच्च न्यायालय की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए। राउत ने यह भी कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू की तुलना मोदी से करना ऐतिहासिक रूप से अनुचित है।
नेहरू बनाम मोदी: तुलना पर राउत का विरोध
राउत ने कहा कि पंडित नेहरू एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे और उन्होंने देश के लिए अपार त्याग किया — उनके योगदान की तुलना किसी से नहीं की जा सकती। उन्होंने याद दिलाया कि नेहरू 15 अगस्त 1947 से 16 वर्षों तक प्रधानमंत्री रहे और उनके मंत्रिमंडल में डॉ. भीमराव आंबेडकर (पहले कानून मंत्री) और सरदार वल्लभभाई पटेल (पहले गृह मंत्री) जैसे दिग्गज शामिल थे।
राउत के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) यदि नेहरू को 'निर्वाचित प्रधानमंत्री' मानने से इनकार करती है, तो इसका सीधा अर्थ है कि वह आंबेडकर और पटेल की संवैधानिक भूमिकाओं को भी नकार रही है — यह एक तीखा राजनीतिक तर्क था जो विपक्षी खेमे में चर्चा का विषय बना।
चुनावी प्रक्रिया पर विवादास्पद दावे
राउत ने आरोप लगाया — जिसे BJP ने अब तक खारिज किया है — कि 2019 के बाद हुए चुनावों को 'हाईजैक' किया गया। उन्होंने कहा, 'चुनाव आयोग को हाईजैक कर और सुप्रीम कोर्ट पर दबाव डालकर वह दो बार और प्रधानमंत्री बन गए। हम उन्हें 2019 के बाद निर्वाचित प्रधानमंत्री नहीं मानते।' ये आरोप राउत के अपने बयान हैं; इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
राउत ने यह भी कहा कि नामांकन प्रक्रिया में भेदभाव हुआ — उनके अनुसार, जहाँ एक ओर प्रधानमंत्री ने 'कई बातें छिपाईं', वहीं कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया।
न्यायिक प्रक्रिया पर चिंता
राउत ने सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामलों का हवाला देते हुए कहा कि उनकी पार्टी का मामला चार वर्षों से सुनवाई की प्रतीक्षा में है। उन्होंने सवाल किया कि इस स्थिति में मीनाक्षी नटराजन, शरद पवार और ममता बनर्जी को न्याय कैसे मिलेगा।
नीट पेपर लीक और अन्य मुद्दे
राउत ने नीट पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में हुए प्रदर्शनों का भी उल्लेख किया और आरोप लगाया कि इन्हें मीडिया में उचित जगह नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि अभिजीत दिपके के बारे में कुछ जानकारी मिली है और वे इस मामले में और तथ्य जुटा रहे हैं।
आगे क्या
राउत के इन बयानों पर BJP की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी आनी बाकी है। यह बयानबाज़ी ऐसे समय में आई है जब विपक्षी दल मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने के मौके पर अपनी आलोचना को धार देने में जुटे हैं। आने वाले दिनों में इस राजनीतिक तकरार के और तीखे होने की संभावना है।