10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

संजय राउत का भाजपा पर बड़ा आरोप: सांसदों को तोड़ने के लिए हुई राजनीतिक खरीद-फरोख्त

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
संजय राउत का भाजपा पर बड़ा आरोप: सांसदों को तोड़ने के लिए हुई राजनीतिक खरीद-फरोख्त

सारांश

संजय राउत ने 'सामना' के 'रोखठोक' स्तंभ में BJP और एकनाथ शिंदे पर बड़े स्तर पर राजनीतिक खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया। उन्होंने दल-बदल की तुलना मीर जाफर और ब्रूटस जैसे ऐतिहासिक विश्वासघातियों से की और कहा कि जनता इस कथित विश्वासघात को भूलेगी नहीं।

मुख्य बातें

संजय राउत ने 21 जून को 'सामना' के स्तंभ 'रोखठोक' में BJP और एकनाथ शिंदे पर राजनीतिक खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया।
राउत के अनुसार, सांसदों का पार्टी छोड़ना वैचारिक मतभेद नहीं, बल्कि सत्ता के दबाव और राजनीतिक लाभ का परिणाम है।
उन्होंने दल-बदलुओं की तुलना ऐतिहासिक विश्वासघातियों मीर जाफर, ब्रूटस, ज्युडास और क्विसलिंग से की।
शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस और बालासाहेब ठाकरे के जन्मशताब्दी वर्ष का हवाला देते हुए पार्टी की विचारधारा की दुहाई दी।
राउत ने 'आयाराम-गयाराम' की राजनीति को लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताया।

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने 21 जून को भारतीय जनता पार्टी (BJP) और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर सीधा हमला बोला, यह आरोप लगाते हुए कि पार्टी के कुछ सांसदों को तोड़ने के लिए बड़े स्तर पर राजनीतिक खरीद-फरोख्त और सौदेबाजी की गई। राउत ने यह आरोप अपने साप्ताहिक स्तंभ 'रोखठोक' में लगाए, जो शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' में प्रकाशित होता है।

खरीद-फरोख्त का आरोप

राउत ने अपने लेख में दावा किया कि पार्टी छोड़ने की चर्चा में रहे सांसदों का यह कदम किसी वैचारिक मतभेद का परिणाम नहीं है। उनके अनुसार, इसके पीछे राजनीतिक लाभ और सत्ता का दबाव है। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों और क्षेत्रीय हितों का हवाला देकर दल-बदल को उचित ठहराने की कोशिश की जा रही है, जबकि वास्तविक उद्देश्य सत्ता में हिस्सेदारी हासिल करना है।

जनादेश के साथ विश्वासघात

राउत ने तर्क दिया कि जो जनप्रतिनिधि शिवसेना के टिकट, कार्यकर्ताओं की मेहनत और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में मिले जनसमर्थन के आधार पर निर्वाचित हुए, उनका पार्टी छोड़ना मतदाताओं के जनादेश के साथ कथित विश्वासघात है। उन्होंने इस प्रवृत्ति की तुलना इतिहास के चर्चित विश्वासघातियों — मीर जाफर, ब्रूटस, ज्युडास और क्विसलिंग — से की।

लोकतंत्र पर गंभीर चिंता

राउत ने कहा कि वर्तमान राजनीतिक माहौल में दल-बदल की घटनाओं को 'बगावत' या 'क्रांति' के रूप में पेश किया जा रहा है, जबकि यह लोकतांत्रिक मूल्यों और राजनीतिक नैतिकता के विरुद्ध है। उन्होंने चेतावनी दी कि सत्ता हासिल करने या बनाए रखने के लिए जनप्रतिनिधियों को तोड़ने की प्रवृत्ति ने देश में 'आयाराम-गयाराम' की राजनीति को बढ़ावा दिया है, जिससे जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही कमज़ोर हुई है।

शिवसेना की विरासत का संदर्भ

राउत ने शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस और पार्टी संस्थापक बालासाहेब ठाकरे के जन्मशताब्दी वर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि शिवसेना केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि विचार और संघर्ष की परंपरा है। उन्होंने विश्वास जताया कि जनता इस कथित राजनीतिक विश्वासघात को भूलेगी नहीं और उचित समय पर अपना जवाब देगी।

आगे क्या

यह टकराव ऐसे समय में सामने आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के दोनों गुटों के बीच संगठनात्मक वर्चस्व की लड़ाई जारी है। राउत के इन आरोपों पर BJP और शिंदे गुट की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह एक ऐसी भावनात्मक राजनीति है जो संगठनात्मक पुनर्निर्माण की जगह ले रही है। दल-बदल विरोधी कानून की सीमाओं को देखते हुए, राउत के आरोप चाहे कितने भी तीखे हों, उनका व्यावहारिक राजनीतिक असर सीमित है। शिवसेना (UBT) को आरोपों से आगे बढ़कर ज़मीनी संगठन और चुनावी रणनीति पर ध्यान देना होगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजय राउत ने BJP पर क्या आरोप लगाए हैं?
संजय राउत ने आरोप लगाया है कि BJP और एकनाथ शिंदे ने शिवसेना (UBT) के सांसदों को पार्टी से तोड़ने के लिए बड़े स्तर पर राजनीतिक खरीद-फरोख्त और सौदेबाजी की। उनके अनुसार विकास कार्यों का हवाला देकर दल-बदल को उचित ठहराने की कोशिश की जा रही है, जबकि असली मकसद सत्ता में हिस्सेदारी है।
राउत ने यह आरोप कहाँ लगाए?
राउत ने ये आरोप शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' में प्रकाशित अपने साप्ताहिक स्तंभ 'रोखठोक' में लगाए। यह स्तंभ 21 जून को प्रकाशित हुआ।
राउत ने दल-बदलुओं की तुलना किससे की?
राउत ने दल-बदलुओं की तुलना इतिहास के चर्चित विश्वासघातियों — मीर जाफर, ब्रूटस, ज्युडास और क्विसलिंग — से की। उनका कहना था कि इन घटनाओं को 'बगावत' या 'क्रांति' कहना लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है।
शिवसेना के स्थापना दिवस का इस विवाद से क्या संबंध है?
राउत ने शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस और बालासाहेब ठाकरे के जन्मशताब्दी वर्ष का उल्लेख करते हुए पार्टी छोड़ने वाले नेताओं की आलोचना की। उन्होंने कहा कि शिवसेना केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि विचार और संघर्ष की परंपरा है।
BJP या एकनाथ शिंदे की ओर से क्या प्रतिक्रिया आई?
राउत के इन आरोपों पर BJP और एकनाथ शिंदे गुट की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह विवाद महाराष्ट्र में शिवसेना के दोनों गुटों के बीच चल रहे संगठनात्मक टकराव की पृष्ठभूमि में सामने आया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 1 महीना पहले