7 अगस्त 2026
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शाइना एनसी का संजय राउत पर तीखा वार: 'आत्ममंथन करें, पार्टी टूटने के जवाब मिल जाएंगे'

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शाइना एनसी का संजय राउत पर तीखा वार: 'आत्ममंथन करें, पार्टी टूटने के जवाब मिल जाएंगे'

सारांश

शिवसेना नेता शाइना एनसी ने संजय राउत को सीधी चुनौती दी — पार्टी के बार-बार टूटने पर आत्ममंथन करने की नसीहत दी और एकनाथ शिंदे की जमीनी लोकप्रियता को विधायकों के पाला बदलने की असली वजह बताया। 2019 के कांग्रेस गठबंधन पर भी निशाना साधा।

मुख्य बातें

शाइना एनसी ने 18 जून 2026 को संजय राउत पर तीखा हमला बोला, कहा — वे 'मानसिक संतुलन खो चुके हैं'।
शाइना एनसी ने राउत से पूछा कि शिवसेना (उद्धव गुट) दो-तीन बार क्यों टूटी — आत्ममंथन करने की सलाह दी।
4-5 लाख वोट पाने वाले जनप्रतिनिधियों के पार्टी छोड़ने को 'लोकतंत्र की हत्या' कहने पर शाइना एनसी ने पलटवार किया।
एकनाथ शिंदे को जमीनी जन-नेता बताया; कहा — हर दिन नए लोग पार्टी में जुड़ रहे हैं।
2019 में कांग्रेस के साथ गठबंधन को 'सत्ता का लालच' करार दिया।
दो-तिहाई बहुमत के संवैधानिक प्रावधान का हवाला देते हुए कहा — दूसरों पर आरोप लगाना बंद करें।

शिवसेना नेता शाइना एनसी ने 18 जून 2026 को शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता संजय राउत पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि राउत 'मानसिक संतुलन खो चुके हैं' और उनकी आक्रामक भाषा महाराष्ट्र की राजनीतिक संस्कृति के अनुरूप नहीं है। यह बयान ऐसे समय आया है जब उद्धव गुट में बार-बार टूट और विधायकों-सांसदों के पाला बदलने को लेकर राजनीतिक तनाव चरम पर है।

शाइना एनसी के तीखे बोल

शाइना एनसी ने कहा, 'संजय राउत अपना मानसिक संतुलन खो बैठे हैं। शायद अब वक्त आ गया है कि वो ठाणे म्युनिसिपल हॉस्पिटल में अपने आप को भर्ती करा लें, क्योंकि जिस अंदाज से वो प्रस्तुत होते हैं, ये तोड़-फोड़ की राजनीति, ये महाराष्ट्र की संस्कृति नहीं है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि आक्रामक भाषा और तोड़फोड़ की राजनीति किसी भी समस्या का समाधान नहीं है।

एकनाथ शिंदे की लोकप्रियता पर दावा

शाइना एनसी ने तर्क दिया कि एकनाथ शिंदे की जमीनी पकड़ और कार्यशैली के कारण ही विधायक और सांसद एकजुट होकर उनके साथ आए। उनके अनुसार, कई जनप्रतिनिधि पहले की कार्यप्रणाली से असंतुष्ट थे और इसी कारण उन्होंने नया राजनीतिक मार्ग चुना। 'एकनाथ शिंदे जमीन से जुड़े जन-नेता हैं और हर दिन लोग हमारी पार्टी में शामिल हो रहे हैं,' उन्होंने कहा।

राउत पर आत्ममंथन का आह्वान

शाइना एनसी ने राउत को सीधी चुनौती देते हुए कहा, 'संजय राउत को इस बात पर आत्ममंथन करना चाहिए कि उनकी पार्टी दो-तीन बार क्यों टूटी। जब 4-5 लाख वोट पाने वाले विधायक और सांसद पार्टी छोड़ते हैं, तो आप उन्हें खारिज करते हैं और अपशब्द कहते हैं — क्या यह लोकतंत्र की हत्या नहीं है?' उन्होंने यह भी पूछा कि जब नेता कार्यकर्ताओं से नहीं मिलते, तो क्या वह खराब गवर्नेंस नहीं है।

2019 के गठबंधन पर निशाना

शाइना एनसी ने 2019 के राजनीतिक घटनाक्रम का हवाला देते हुए कहा कि जब उद्धव गुट ने 'सत्ता के लालच में' कांग्रेस के साथ जाने का फैसला किया, तब सब कुछ उचित लगा — लेकिन आज जब अपने ही सांसद नेतृत्व छोड़ना चाहते हैं, तो दूसरी पार्टियों पर आरोप लगाए जाते हैं। उन्होंने इसे दोहरे मानदंड की राजनीति करार दिया।

संवैधानिक प्रावधान का तर्क

शाइना एनसी ने अंत में कहा कि दो-तिहाई बहुमत के लिए एक बुनियादी संवैधानिक प्रावधान है और अगर कोई नेता पार्टी से बाहर निकलना चाहता है, तो यह उसका संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने राउत से अपील की कि दूसरों पर आरोप और लांछन लगाना बंद करें। गौरतलब है कि महाराष्ट्र में शिवसेना की टूट का यह सिलसिला राज्य की राजनीति को लगातार नया मोड़ दे रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

शिंदे गुट की 'जमीनी लोकप्रियता' के दावे को परखने की ज़रूरत है — क्योंकि हालिया चुनावी नतीजे और जनाधार दोनों पक्षों के लिए मिले-जुले रहे हैं। असली सवाल यह है कि क्या महाराष्ट्र की जनता इस आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति से थक चुकी है, और क्या कोई भी पक्ष ठोस शासन का एजेंडा सामने रख पाएगा।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शाइना एनसी ने संजय राउत पर क्या आरोप लगाए?
शाइना एनसी ने कहा कि संजय राउत 'मानसिक संतुलन खो चुके हैं' और उनकी आक्रामक भाषा महाराष्ट्र की संस्कृति के अनुरूप नहीं है। उन्होंने राउत को आत्ममंथन की सलाह दी और पूछा कि उनकी पार्टी दो-तीन बार क्यों टूटी।
शिवसेना (उद्धव गुट) में टूट का कारण क्या बताया गया?
शाइना एनसी के अनुसार, एकनाथ शिंदे की जमीनी कार्यशैली और लोकप्रियता के कारण विधायक और सांसद उनके साथ आए। कई जनप्रतिनिधि उद्धव गुट की पुरानी कार्यप्रणाली से असंतुष्ट थे, इसलिए उन्होंने नया रास्ता चुना।
शाइना एनसी ने 2019 के गठबंधन पर क्या कहा?
शाइना एनसी ने कहा कि 2019 में उद्धव गुट ने 'सत्ता के लालच में' कांग्रेस के साथ जाने का फैसला किया, जो तब उचित लगा। लेकिन आज जब अपने ही सांसद नेतृत्व छोड़ रहे हैं, तो दूसरी पार्टियों पर आरोप लगाना दोहरे मानदंड की राजनीति है।
दो-तिहाई बहुमत के संवैधानिक प्रावधान पर शाइना एनसी का क्या तर्क था?
शाइना एनसी ने कहा कि किसी नेता का पार्टी से बाहर जाना एक बुनियादी संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने राउत से अपील की कि इस प्रावधान का उपयोग करने वालों पर आरोप-लांछन लगाना बंद करें।
इस विवाद का महाराष्ट्र की राजनीति पर क्या असर है?
शिवसेना की बार-बार हुई टूट और दोनों गुटों के बीच तीखी बयानबाज़ी महाराष्ट्र की राजनीति को लगातार अस्थिर बना रही है। यह विवाद दोनों पक्षों के बीच 'वैधता की लड़ाई' को और तेज़ करता है, जो आगामी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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