19 अगस्त 2026
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संजय राउत का दावा: शिवसेना चुनाव चिह्न ₹5,000 करोड़ में बेचा, अमित शाह और चुनाव आयोग पर लगाया आरोप

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संजय राउत का दावा: शिवसेना चुनाव चिह्न ₹5,000 करोड़ में बेचा, अमित शाह और चुनाव आयोग पर लगाया आरोप

सारांश

संजय राउत ने बुधवार को विस्फोटक दावा किया — शिवसेना का चुनाव चिह्न ₹5,000 करोड़ की कथित डील में एकनाथ शिंदे को सौंपा गया। अमित शाह और चुनाव आयोग पर सीधे आरोप, जबकि सर्वोच्च न्यायालय में कानूनी लड़ाई अभी जारी है।

मुख्य बातें

संजय राउत ने 19 अगस्त को दावा किया कि शिवसेना का चुनाव चिह्न कथित तौर पर ₹5,000 करोड़ की डील में बेचा गया।
राउत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और चुनाव आयोग के बीच कथित सांठगांठ का आरोप लगाया।
उनके अनुसार यह डील 'राजनीतिक दुर्भावना' से प्रेरित थी और संविधान के साथ खिलवाड़ है।
शिवसेना के नाम और चुनाव चिह्न पर सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई जारी है।
शिवसेना (यूबीटी) का कहना है कि दलबदल विरोधी कानून एकनाथ शिंदे गुट पर भी लागू होता है।

शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने बुधवार, 19 अगस्त को मुंबई में पत्रकारों से बातचीत में कथित तौर पर दावा किया कि उनकी पार्टी और उसके चुनाव चिह्न को सुनियोजित षड्यंत्र के तहत बेचा गया। राउत के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और चुनाव आयोग के बीच एक बड़ी डील हुई, जिसके तहत शिवसेना का नाम और चुनाव चिह्न एकनाथ शिंदे गुट को सौंपा गया।

राउत का आरोप: ₹5,000 करोड़ की डील

राउत ने कथित तौर पर दावा किया कि यह सौदा लगभग ₹5,000 करोड़ में हुआ और यह 'राजनीतिक दुर्भावना' से प्रेरित था। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने 'कानून और नियमों को तोड़ने का दुस्साहस किया है' और 'पूरी व्यवस्था का मजाक बनाकर रख दिया।' उनके अनुसार यह संविधान के साथ खिलवाड़ है और देश की जनता इसे भलीभांति देख रही है।

सुप्रीम कोर्ट में जारी है कानूनी लड़ाई

गौरतलब है कि शिवसेना के नाम और 'धनुष-बाण' चुनाव चिह्न को लेकर उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे गुट के बीच विवाद अभी भी जारी है। सर्वोच्च न्यायालय में इस मामले की सुनवाई चल रही है। शिवसेना (यूबीटी) का पक्ष है कि दलबदल विरोधी कानून शिंदे गुट पर भी लागू होता है और उन्हें अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए।

भाजपा संगठनात्मक फेरबदल पर राउत की प्रतिक्रिया

इससे एक दिन पहले मंगलवार को राउत ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के संगठनात्मक पदों में हुए बदलाव पर भी टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था, 'कौन वापसी कर रहा है और किसे हटाया जा रहा है, यह पार्टी का आंतरिक संगठनात्मक मामला है। दूसरी पार्टी के लोगों के लिए इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं है।' उन्होंने यह भी कहा कि स्मृति ईरानी और राम माधव जैसे पुराने नेताओं की वापसी हुई है, जबकि विनोद तावड़े संगठन के सबसे अनुभवी लोगों में से एक हैं।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब शिवसेना विभाजन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में पुनर्गठन का दौर जारी है। सर्वोच्च न्यायालय का फैसला दोनों गुटों के राजनीतिक भविष्य को निर्णायक रूप से प्रभावित करेगा। राउत के ये आरोप, जिनका अभी तक कोई स्वतंत्र सत्यापन नहीं हुआ है, महाराष्ट्र की राजनीतिक बहस को और तीखा करने की संभावना रखते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनका कोई स्वतंत्र सत्यापन अभी तक सामने नहीं आया है — यह महत्वपूर्ण संदर्भ है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है। शिवसेना विभाजन का मामला पहले से ही सर्वोच्च न्यायालय में है, और ऐसे में इस तरह के राजनीतिक बयान कानूनी प्रक्रिया के समानांतर जनमत को प्रभावित करने की कोशिश के रूप में भी देखे जा सकते हैं। असली सवाल यह है कि क्या ये आरोप अदालत में साक्ष्य के रूप में पेश किए जाएंगे, या केवल राजनीतिक बयानबाज़ी तक सीमित रहेंगे। महाराष्ट्र की राजनीति में इस विभाजन का असर अभी लंबे समय तक महसूस किया जाएगा।
RashtraPress
19 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजय राउत ने शिवसेना चुनाव चिह्न को लेकर क्या दावा किया?
संजय राउत ने कथित तौर पर दावा किया कि शिवसेना (यूबीटी) का चुनाव चिह्न लगभग ₹5,000 करोड़ की डील में एकनाथ शिंदे गुट को सौंपा गया। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और चुनाव आयोग के बीच कथित सांठगांठ का आरोप लगाया।
शिवसेना के चुनाव चिह्न विवाद में अभी कानूनी स्थिति क्या है?
शिवसेना के नाम और 'धनुष-बाण' चुनाव चिह्न को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई जारी है। शिवसेना (यूबीटी) का तर्क है कि दलबदल विरोधी कानून एकनाथ शिंदे गुट पर भी लागू होता है और उन्हें अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए।
राउत ने भाजपा के संगठनात्मक बदलाव पर क्या कहा?
एक दिन पहले मंगलवार को राउत ने कहा था कि भाजपा का संगठनात्मक फेरबदल उनकी पार्टी का आंतरिक मामला है और दूसरी पार्टी के लोगों के लिए इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं। उन्होंने स्मृति ईरानी और राम माधव की वापसी का उल्लेख किया।
क्या राउत के आरोपों की कोई स्वतंत्र पुष्टि हुई है?
अभी तक राउत के इन दावों की कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ये आरोप उनके व्यक्तिगत बयान हैं जो उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में लगाए। चुनाव आयोग या केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
शिवसेना विभाजन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति पर क्या असर पड़ा?
शिवसेना के विभाजन के बाद महाराष्ट्र में दो गुट — उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और एकनाथ शिंदे की शिवसेना — अलग-अलग राजनीतिक धाराओं में काम कर रहे हैं। पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और विधायकों की वैधता को लेकर कानूनी और राजनीतिक संघर्ष जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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