प्रियंका कक्कड़ ने AAP छोड़ी, कांग्रेस में शामिल; BJP बोली — पंजाब में डूब रहा 'आप' का जहाज
सारांश
मुख्य बातें
आम आदमी पार्टी (AAP) की वरिष्ठ प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने शनिवार, 3 अक्टूबर को पार्टी से इस्तीफा देकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) की सदस्यता ग्रहण कर ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में उन्हें औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल कराया गया। यह घटनाक्रम पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले AAP के लिए एक उल्लेखनीय राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है।
प्रियंका कक्कड़ ने AAP पर क्या आरोप लगाए
कांग्रेस में शामिल होने के बाद प्रियंका कक्कड़ ने आम आदमी पार्टी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि AAP अपने मूल सिद्धांतों से पूरी तरह भटक चुकी है और पार्टी नेतृत्व ने जो वादे किए थे, उन्हें कभी पूरा नहीं किया। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब पार्टी पहले से ही कई आंतरिक विवादों से जूझ रही है।
BJP का तीखा तंज — 'डूब रहा है AAP का जहाज'
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस घटनाक्रम को AAP की कमज़ोरी का प्रमाण बताया। BJP नेता अजय सहरावत ने कहा कि पंजाब चुनाव में AAP का जहाज डूब रहा है, इसलिए उनके सारे खिलाड़ी धीरे-धीरे पार्टी छोड़कर निकल रहे हैं।
BJP नेता प्रवीण शंकर कपूर ने एक और पहलू उठाया। उन्होंने सवाल किया कि AAP में लोकप्रिय महिला नेताओं के लिए जगह क्यों नहीं बचती। उन्होंने याद दिलाया कि प्रियंका कक्कड़ से पहले शाजिया इल्मी, स्वाति मालीवाल, ऋचा पांडेय और किरण बेदी — जो अन्ना आंदोलन के दौरान जुड़ी थीं — सभी पार्टी से बाहर हो चुकी हैं। कपूर ने कहा कि यह सवाल सिर्फ दिल्ली का नहीं, बल्कि पूरे देश का है।
AAP में महिला नेताओं के जाने का सिलसिला
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब AAP की किसी प्रमुख महिला नेता ने पार्टी छोड़ी हो। शाजिया इल्मी पार्टी के शुरुआती दिनों में ही अलग हो गई थीं। स्वाति मालीवाल का मामला हाल ही में चर्चा में रहा। ऋचा पांडेय भी पार्टी से नाता तोड़ चुकी हैं। आलोचकों का कहना है कि यह एक दीर्घकालिक आंतरिक संरचनात्मक समस्या की ओर इशारा करता है।
कांग्रेस में बदलाव — यूपी अध्यक्ष पर राजेंद्र पाल गौतम की प्रतिक्रिया
इसी बीच, आराधना मिश्रा 'मोना' को उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने पर कांग्रेस नेता राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि हर पार्टी में एक तय व्यवस्था होती है। उन्होंने कहा, 'जो भी पदाधिकारी बनता है, उसका एक निश्चित कार्यकाल होता है। कार्यकाल समाप्त होने के बाद दूसरे लोगों को भी अवसर मिलता है। वरिष्ठ नेताओं के अनुभव का पार्टी पूरा उपयोग करेगी और उन्हें सम्मान के साथ मौके दिए जाएंगे।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी सामाजिक समीकरणों के अनुसार विभिन्न स्थानों पर नेताओं को ज़िम्मेदारी देती है।
आगे क्या होगा
पंजाब चुनाव से पहले यह दलबदल AAP की रणनीतिक स्थिति को कमज़ोर कर सकता है, विशेषकर जब पार्टी पहले से ही कई मोर्चों पर दबाव में है। कांग्रेस के लिए यह एक प्रतीकात्मक लाभ है, क्योंकि प्रियंका कक्कड़ AAP की जानी-मानी मीडिया चेहरा रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले हफ्तों में और दलबदल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।