भाजपा में 'आप' सांसदों के शामिल होने पर कांग्रेस का हमला — 'पार्टी मूल रास्ते से भटक चुकी थी'

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भाजपा में 'आप' सांसदों के शामिल होने पर कांग्रेस का हमला — 'पार्टी मूल रास्ते से भटक चुकी थी'

सारांश

आम आदमी पार्टी के सांसदों के भाजपा में शामिल होने पर कांग्रेस ने तीखा पलटवार किया। धर्मवीर गांधी, राजा वडिंग और परगट सिंह ने 'आप' को 'मूल रास्ते से भटकी पार्टी' बताया और इसे महज राजनीतिक सुविधावाद करार दिया।

Key Takeaways

  • आम आदमी पार्टी के सांसद भाजपा में शामिल हो गए, जिससे पंजाब की राजनीति में बड़ी हलचल मच गई है।
  • पटियाला से कांग्रेस सांसद धर्मवीर गांधी ने कहा कि 'आप' पहले ही अपने मूल रास्ते से भटक चुकी थी।
  • पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने भाजपा को व्यंग्य में बधाई देते हुए कहा कि इससे भाजपा को कोई विशेष लाभ नहीं होगा।
  • जालंधर से कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने इसे 'छोटी दुकान से बड़े मॉल में जाना' बताया और इसे राजनीतिक सुविधावाद करार दिया।
  • 'आप' ने कभी दिल्ली विधानसभा में 70 में से 67 सीटें जीती थीं, लेकिन 2025 की हार के बाद पार्टी लगातार दबाव में है।
  • 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले यह राजनीतिक पुनर्गठन सभी दलों की रणनीति को प्रभावित कर सकता है।

जालंधर, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। आम आदमी पार्टी (आप) के सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की घटना ने पंजाब की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। कांग्रेस नेताओं ने इस मुद्दे पर न केवल 'आप' बल्कि भाजपा पर भी तीखे तंज कसे हैं और इसे महज 'राजनीतिक सुविधावाद' करार दिया है।

धर्मवीर गांधी का बयान — 'आप' पहले ही रास्ते से भटक चुकी थी

पटियाला से कांग्रेस सांसद धर्मवीर गांधी ने इस घटनाक्रम पर कहा कि जब उन्होंने पहले पार्टी के बारे में अपनी राय सार्वजनिक की थी, उस समय 'आप' का डंका पूरी दुनिया में बज रहा था। उन्होंने याद दिलाया कि पार्टी ने दिल्ली विधानसभा में 70 में से 67 सीटें जीतकर इतिहास रचा था।

गांधी ने स्पष्ट किया, "अगर आज कुछ नेताओं को पार्टी पसंद नहीं आ रही, तो यह उनकी अपनी सोच है। 'आप' पहले ही अपने मूल रास्ते से भटक चुकी थी, इसीलिए उन्होंने उसे छोड़ने का निर्णय लिया था।" यह बयान सीधे तौर पर 'आप' के संस्थापक आदर्शों से पार्टी के विचलन की ओर इशारा करता है।

राजा वडिंग का तंज — भाजपा 'दूसरी पार्टियों का कचरापेटी' बन रही है

चंडीगढ़ में पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने भाजपा पर व्यंग्यात्मक प्रहार करते हुए कहा कि ऐसे नेताओं को अपनाने के लिए भाजपा को 'बधाई' दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा पहले से ही विभिन्न दलों से आए नेताओं को एकत्रित करती रही है।

वडिंग ने जोड़ा, "इससे भाजपा को कोई विशेष राजनीतिक लाभ नहीं मिलेगा, लेकिन इससे 'आम आदमी पार्टी' को अपनी वास्तविक जमीनी स्थिति का आकलन करने का मौका जरूर मिलेगा।" यह बयान पंजाब में 'आप' की गिरती साख पर कांग्रेस की सुनियोजित रणनीति का हिस्सा लगता है।

परगट सिंह का विश्लेषण — 'छोटी दुकान से बड़े मॉल में जाना'

जालंधर से कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम को एक अलग नजरिए से देखा। उन्होंने भाजपा नेता मनोरंजन कालिया के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि दल-बदल कोई नई राजनीतिक परिघटना नहीं है — यह मॉडल पहले से चला आ रहा है।

परगट सिंह ने चुटीले अंदाज में कहा कि जो लोग पहले एक 'छोटी दुकान' में थे, वे अब एक 'बड़े मॉल' में चले गए हैं — यह केवल राजनीतिक सुविधा का मामला है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि बलबीर सिंह सीचेवाल और हरभजन सिंह जैसे कुछ अपवादों को छोड़कर अधिकांश नेताओं ने पंजाब के असली मुद्दों पर कभी गंभीरता से आवाज नहीं उठाई।

गहरा राजनीतिक संदर्भ — 'आप' की साख पर उठते सवाल

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब आम आदमी पार्टी 2025 की दिल्ली विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद पहले से ही राजनीतिक दबाव में है। अरविंद केजरीवाल की पार्टी, जो कभी भ्रष्टाचार विरोध और 'आम आदमी' की राजनीति के नाम पर उभरी थी, अब अपने ही सांसदों को दूसरी पार्टियों में जाते देख रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह प्रवृत्ति बताती है कि दल-बदल की संस्कृति भारतीय राजनीति में किस कदर जड़ें जमा चुकी है। पंजाब में जहां 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वहां इस तरह के राजनीतिक पुनर्गठन के गहरे निहितार्थ हो सकते हैं।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि 'आप' इस झटके से कैसे उबरती है और भाजपा इन नए चेहरों को पंजाब में अपनी चुनावी रणनीति में कैसे समाहित करती है।

Point of View

बल्कि यह उस राजनीतिक प्रयोग के विघटन का संकेत है जो कभी 'ईमानदारी की राजनीति' के नाम पर खड़ा हुआ था। विडंबना यह है कि जो पार्टी भ्रष्ट और अवसरवादी राजनीति के खिलाफ बनी थी, आज उसी के नेता सत्ता के बड़े केंद्र की ओर पलायन कर रहे हैं। कांग्रेस का तंज सटीक जरूर है, लेकिन यह भूलना नहीं चाहिए कि दल-बदल की यह संस्कृति सभी दलों में समान रूप से व्याप्त है। असली सवाल यह है कि 2027 के पंजाब चुनाव से पहले इस राजनीतिक पुनर्गठन का फायदा किसे मिलेगा — और पंजाब की जनता इसे कैसे देखेगी।
NationPress
24/04/2026

Frequently Asked Questions

'आप' के कौन से सांसद भाजपा में शामिल हुए?
आम आदमी पार्टी के कुछ सांसद भाजपा में शामिल हो गए हैं, जिससे पंजाब की राजनीति में हलचल मच गई है। इस घटनाक्रम ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरणों पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
कांग्रेस ने 'आप' सांसदों के भाजपा में जाने पर क्या कहा?
कांग्रेस सांसद धर्मवीर गांधी ने कहा कि 'आप' पहले ही अपने मूल रास्ते से भटक चुकी थी। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष राजा वडिंग ने भाजपा को व्यंग्य में बधाई दी और कहा कि इससे भाजपा को कोई खास फायदा नहीं होगा।
परगट सिंह ने इस दल-बदल को क्या कहा?
जालंधर से कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने इसे 'छोटी दुकान से बड़े मॉल में जाना' बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक सुविधावाद है और दल-बदल की यह संस्कृति पहले से चली आ रही है।
क्या भाजपा में शामिल होने से 'आप' को नुकसान होगा?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह घटना 'आप' की साख को और कमजोर कर सकती है, खासकर जब पार्टी दिल्ली चुनाव में पहले ही बड़ी हार झेल चुकी है। पंजाब में 2027 के चुनाव से पहले यह नुकसान और गहरा हो सकता है।
पंजाब की राजनीति पर इस घटनाक्रम का क्या असर पड़ेगा?
2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ यह दल-बदल राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। भाजपा इन नेताओं को अपनी चुनावी रणनीति में शामिल करने की कोशिश करेगी, जबकि 'आप' को अपनी जमीन बचाने की चुनौती होगी।
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