पंजाब में AAP के 3 विधायकों के BJP में जाने पर कांग्रेस का हमला, 'राजनीति मजाक बन गई'
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) के तीन विधायकों — कुंवर विजय प्रताप सिंह, हरमीत सिंह पठानमाजरा और चेतन सिंह जौरामाजरा — द्वारा पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने के बाद 2 नवंबर 2026 को कांग्रेस ने AAP पर तीखे हमले बोले। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इसे पार्टी के गहराते आंतरिक संकट का प्रमाण बताते हुए आने वाले दिनों में और भी बड़ी टूट की चेतावनी दी।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी की तीखी प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने तीनों विधायकों के इस्तीफों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एक पुरानी कहावत है — जब जहाज डूबने लगता है, तो उस पर सवार लोग सबसे पहले खुद को बचाने के लिए कूदते हैं। तिवारी ने तंज कसते हुए कहा, 'राजनीति क्या मजाक बन गई है? जो मुख्यमंत्री खुद हमेशा नशे में रहते हैं, वे दूसरों को नशे से मुक्त कराने निकले हैं।' उन्होंने AAP पर जनता के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया।
गौरतलब है कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ यह आरोप पहली बार नहीं लगाया गया — विरोधी दलों ने पहले भी इस तरह के आरोप जड़े हैं, जिन्हें AAP खारिज करती रही है।
उदित राज ने जताई और टूट की आशंका
कांग्रेस नेता उदित राज ने भी AAP की आलोचना करते हुए कहा कि इन इस्तीफों से स्पष्ट संकेत मिलता है कि आने वाले समय में और नेता पार्टी छोड़ेंगे। उन्होंने दावा किया कि जब पहले पार्टी के सांसद बाहर निकले थे, तब 40 से 45 विधायक भी पार्टी छोड़ने के लिए तैयार थे।
उदित राज ने आरोप लगाया, 'पंजाब सरकार चलाने में भगवंत मान की कोई भूमिका नहीं है — सरकार को मनीष सिसोदिया, अरविंद केजरीवाल और उनके लोग चला रहे हैं। पंजाब की सरकार दिल्ली के लोग चला रहे हैं।' हालाँकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
AAP की जवाबी कार्रवाई: अयोग्यता याचिका की तैयारी
इस राजनीतिक उठापटक के बीच AAP ने इन विधायकों को अयोग्य घोषित कराने की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी पंजाब विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां से संपर्क कर इन विधायकों की सदस्यता रद्द कराने की माँग कर सकती है। दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता का यह रास्ता अब पार्टी के लिए प्रमुख विकल्प बन गया है।
2027 चुनाव की पृष्ठभूमि में बड़ा संकट
यह ताजा विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब AAP ने 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों के लिए अपने 40 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की थी — और यह घटना उसके ठीक एक दिन बाद की है। तीन अनुभवी विधायकों का BJP की ओर जाना पार्टी के चुनावी संगठन और उम्मीदवार चयन रणनीति पर सवाल खड़े करता है।
यह ऐसे समय में आया है जब AAP पहले से ही दिल्ली में विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद राष्ट्रीय स्तर पर अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता को फिर से स्थापित करने की कोशिश में है। आलोचकों का कहना है कि पंजाब में इस स्तर की टूट पार्टी के एकमात्र सत्ता-केंद्र को कमजोर कर सकती है।