पंजाब: AAP के तीन निलंबित विधायक भाजपा में शामिल, कुंवर विजय प्रताप ने भी छोड़ी विधानसभा सदस्यता
सारांश
मुख्य बातें
आम आदमी पार्टी (AAP) के पंजाब से तीन निलंबित विधायकों ने 2 नवंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित भारतीय जनता पार्टी (BJP) मुख्यालय में पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। कुंवर विजय प्रताप सिंह, हरमीत सिंह पठानमाजरा और चेतन सिंह जौड़ामाजरा — तीनों 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में AAP के टिकट पर जीते थे — अब भाजपा के साथ हैं। यह कदम पंजाब में भगवंत मान सरकार के लिए राजनीतिक दबाव की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कौन हैं ये तीन विधायक
हरमीत सिंह पठानमाजरा पंजाब की सनौर विधानसभा सीट से 2022 में AAP के टिकट पर चुने गए थे। रिपोर्टों के अनुसार, उनकी अपनी सरकार ने उनके खिलाफ कार्रवाई की थी, जिसके बाद वे पार्टी नेतृत्व के प्रति मुखर होते गए और अंततः इस्तीफा दे दिया।
चेतन सिंह जौड़ामाजरा पटियाला जिले की समाना विधानसभा सीट से भारी बहुमत से जीते थे और बाद में भगवंत मान सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे। बताया जा रहा है कि AAP की उम्मीदवारों की पहली सूची में उनका नाम न आने के बाद उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दिया और सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी साझा की।
पूर्व IPS अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह ने न केवल AAP, बल्कि पंजाब विधानसभा की सदस्यता से भी त्यागपत्र दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां को भेजा है।
भाजपा की प्रतिक्रिया
पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने तीनों नेताओं के स्वागत में कहा, "भाजपा का काफिला दिनों दिन बढ़ रहा है। बड़ी खुशी हो रही है कि कुंवर विजय प्रताप सिंह, हरमीत सिंह पठानमाजरा और चेतन सिंह जौरामाजरा भाजपा में शामिल हो गए हैं। दिल की गहराई से उनका धन्यवाद। आम आदमी पार्टी डूबती नाव है।"
यह ऐसे समय में आया है जब भाजपा पंजाब में अपने संगठनात्मक आधार को मजबूत करने में जुटी है और अगले विधानसभा चुनाव से पहले नेताओं को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश कर रही है।
AAP का पक्ष और सदस्यता रद्द करने की माँग
आम आदमी पार्टी ने हरमीत सिंह पठानमाजरा और चेतन सिंह जौड़ामाजरा को पहले ही पार्टी से निष्कासित कर दिया था। पार्टी अब विधानसभा अध्यक्ष से इन दोनों विधायकों की सदस्यता रद्द करने की माँग करेगी।
पंजाब AAP प्रदेश अध्यक्ष अमन अरोड़ा ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा था, "आम आदमी पार्टी ने हमेशा पंजाब को प्राथमिकता दी है। अगर हमारे किसी नेता ने कभी भ्रष्टाचार किया या पंजाब के हितों के खिलाफ काम करने की कोशिश की तो हमने बिना किसी हिचकिचाहट के उनके खिलाफ कार्रवाई की और ऐसे लोगों को पार्टी से बाहर निकाल दिया।"
राजनीतिक संदर्भ और आगे की स्थिति
गौरतलब है कि 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में AAP ने ऐतिहासिक बहुमत हासिल किया था और 117 में से 92 सीटें जीती थीं। इस मजबूत बहुमत के बावजूद पार्टी के भीतर से असंतोष का उभरना और कई विधायकों का इस्तीफा देना, पार्टी के आंतरिक प्रबंधन पर सवाल खड़े करता है।
कुंवर विजय प्रताप सिंह की विधानसभा सदस्यता से इस्तीफे के बाद संभावित उपचुनाव की स्थिति बन सकती है। वहीं पठानमाजरा और जौड़ामाजरा के मामले में अयोग्यता की प्रक्रिया अध्यक्ष के फैसले पर निर्भर करेगी। आने वाले हफ्तों में यह स्पष्ट होगा कि इन घटनाक्रमों का पंजाब की राजनीति पर दीर्घकालिक असर क्या होगा।