एयर चीफ मार्शल अशुतोष दीक्षित ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से की पहली मुलाकात, वायुसेना की नई कमान पर चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय वायुसेना के 29वें प्रमुख एयर चीफ मार्शल अशुतोष दीक्षित ने 2 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। वायुसेना प्रमुख का पदभार संभालने के बाद यह उनकी रक्षा मंत्री के साथ पहली औपचारिक मुलाकात थी। इस भेंट में नई नेतृत्व टीम ने भारतीय वायुसेना की परिचालन तैयारियों और भविष्य की रणनीतिक दिशा पर विचार-विमर्श किया।
रक्षा मंत्री की प्रतिक्रिया
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मुलाकात के बाद एयर चीफ मार्शल दीक्षित को एक 'विशिष्ट वायु योद्धा' बताया और कहा कि वे अपने उत्कृष्ट नेतृत्व कौशल के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने नवनियुक्त वायुसेना प्रमुख को नए कार्यकाल के लिए शुभकामनाएँ देते हुए उम्मीद जताई कि उनका कार्यकाल भारतीय वायुसेना के लिए सफल और ऐतिहासिक साबित होगा।
दीक्षित की नियुक्ति की पृष्ठभूमि
एयर चीफ मार्शल अशुतोष दीक्षित ने 1 नवंबर 2026 को पदभार संभाला, जब उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इससे पहले वे भारतीय वायुसेना में उप प्रमुख के पद पर कार्यरत थे। उनके पूर्ववर्ती एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने कमान संभाली। पदभार ग्रहण करते समय दीक्षित ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री का विश्वास जताने के लिए आभार व्यक्त किया था।
ऑपरेशन सिंदूर की विरासत
एयर चीफ मार्शल दीक्षित ने अपने पूर्ववर्ती की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के नेतृत्व में वायुसेना ने यह साबित कर दिया कि 'सटीक और निर्णायक हवाई शक्ति क्या कर सकती है।' उन्होंने कहा कि उन्हें एक 'पूरी तरह तैयार वायुसेना' की कमान मिली है, जो भविष्य की चुनौतियों के लिए सुसज्जित है।
₹53,866 करोड़ के नौसेना करार
इसी क्रम में रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को 8 युद्धपोतों के निर्माण और खरीद के लिए कुल ₹53,866.50 करोड़ के करार किए। इस पर राजनाथ सिंह ने कहा कि यह 'भारत के स्वदेशी जहाज निर्माण इकोसिस्टम के लिए बहुत अच्छी खबर है।' भारतीय नौसेना के लिए 'नेक्स्ट जनरेशन कोरवेट्स' परियोजना सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा उपक्रमों, निजी शिपयार्डों और एमएसएमई के बीच सहयोग को मज़बूत करेगी।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी रक्षा क्षमताओं को तेज़ी से स्वदेशी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। गौरतलब है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय वायुसेना और नौसेना दोनों की परिचालन तैयारियों पर राष्ट्रीय ध्यान बढ़ा है। नए वायुसेना प्रमुख के समक्ष इस विरासत को आगे बढ़ाने की चुनौती है।