2 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मानवजीत सिंह संधू: 4 ओलंपिक, ISSF विश्व चैंपियन और भारतीय ट्रैप शूटिंग के अग्रदूत

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मानवजीत सिंह संधू: 4 ओलंपिक, ISSF विश्व चैंपियन और भारतीय ट्रैप शूटिंग के अग्रदूत

सारांश

चार ओलंपिक, एक विश्व चैंपियनशिप गोल्ड और पिता से मिली विरासत — मानवजीत सिंह संधू की कहानी केवल पदकों की नहीं, बल्कि भारतीय शॉटगन शूटिंग को अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर स्थापित करने की है। 2006 में ज़ाग्रेब में जो इतिहास रचा, वह भारतीय खेल इतिहास का एक दुर्लभ अध्याय है।

मुख्य बातें

मानवजीत सिंह संधू का जन्म 3 नवंबर 1976 को अमृतसर, पंजाब में हुआ; पिता गुरबी सिंह संधू ओलंपियन और अर्जुन पुरस्कार विजेता शूटर थे।
2006 ISSF विश्व शूटिंग चैंपियनशिप (ज़ाग्रेब) में स्वर्ण जीतकर वह यह उपलब्धि पाने वाले पहले भारतीय शॉटगन शूटर बने।
2004 (एथेंस), 2008 (बीजिंग), 2012 (लंदन) और 2016 (रियो) — चार ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
एशियन गेम्स में 4 रजत और एशियन क्ले शूटिंग चैंपियनशिप में 6 स्वर्ण पदक जीते।
1998 में अर्जुन पुरस्कार और 2006 में राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित।
2006 में ट्रैप शूटिंग की विश्व रैंकिंग में नंबर-1 स्थान हासिल किया।

भारतीय ट्रैप शूटिंग के दिग्गज मानवजीत सिंह संधू ने अपने दो दशक लंबे करियर में चार ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व किया और 2006 की ISSF विश्व शूटिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले भारतीय शॉटगन शूटर बने। अमृतसर, पंजाब में जन्मे संधू की यात्रा पारिवारिक विरासत, अदम्य संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की शूटिंग उपस्थिति को गढ़ने की कहानी है।

विरासत में मिला निशानेबाज़ी का हुनर

मानवजीत सिंह संधू का जन्म 3 नवंबर 1976 को अमृतसर, पंजाब में हुआ। उनके पिता गुरबी सिंह संधू स्वयं एक अनुभवी शूटर और ओलंपियन थे तथा उन्हें अर्जुन पुरस्कार से भी नवाज़ा जा चुका था। पिता ने ही बेटे के शुरुआती कोच की भूमिका निभाई और ट्रैप शूटिंग की बारीकियाँ सिखाईं। यह ऐसे समय में आया जब भारतीय शूटिंग अभी अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर अपनी जगह बना रही थी।

1998: दोहरी जीत से अंतरराष्ट्रीय पहचान

मानवजीत सबसे पहले राष्ट्रीय सुर्खियों में 1998 में आए, जब उन्होंने एशियन गेम्स में रजत पदक जीता। उसी वर्ष उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। एक ही साल में दो बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पदक जीतना उनके लिए करियर का निर्णायक मोड़ साबित हुआ और उन्हें उसी वर्ष अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

2006: ISSF विश्व चैंपियनशिप में ऐतिहासिक स्वर्ण

2004 के एथेंस ओलंपिक में पहली बार ओलंपिक में कदम रखने वाले मानवजीत 19वें स्थान पर रहे। लेकिन यह निराशा उनके संकल्प को और पुख्ता कर गई। 2006 में ज़ाग्रेब में आयोजित ISSF विश्व शूटिंग चैंपियनशिप की ट्रैप स्पर्धा में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता और इस उपलब्धि के साथ वह विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने वाले अभिनव बिंद्रा के बाद केवल दूसरे भारतीय बने। उसी वर्ष वह ट्रैप शूटिंग की विश्व रैंकिंग में नंबर-1 स्थान पर भी पहुँचे। उनकी इस उपलब्धि को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 2006 में राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार प्रदान किया।

ओलंपिक में चार बार का सफर

2008 के बीजिंग ओलंपिक, 2012 के लंदन ओलंपिक और 2016 के रियो ओलंपिक में भी मानवजीत ने भारत का प्रतिनिधित्व किया, हालाँकि ओलंपिक मंच पर पदक उनके हाथ नहीं आया। गौरतलब है कि ओलंपिक में ट्रैप शूटिंग की प्रतिस्पर्धा अत्यंत कड़ी होती है और चार ओलंपिक में निरंतर चयन होना स्वयं में एक दुर्लभ उपलब्धि मानी जाती है।

अन्य अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियाँ

ओलंपिक के बाहर मानवजीत का रिकॉर्ड और भी प्रभावशाली रहा। उन्होंने एशियन गेम्स में कुल चार रजत पदक अपने नाम किए। एशियन क्ले शूटिंग चैंपियनशिप में उन्होंने छह स्वर्ण पदक जीते। मेक्सिको में आयोजित विश्व कप में भी उन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर अपनी वैश्विक श्रेष्ठता साबित की। उनका समग्र करियर भारतीय शॉटगन शूटिंग की नींव रखने में अहम भूमिका निभाता है और भावी पीढ़ी के निशानेबाज़ों के लिए एक प्रेरणाश्रोत बना हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस ज़मीन तैयार करने में है जिस पर भारतीय शॉटगन शूटिंग की अगली पीढ़ी खड़ी हुई। यह विडंबना ही है कि जिस खिलाड़ी ने 2006 में अभिनव बिंद्रा के बाद विश्व चैंपियनशिप गोल्ड जीता, वह ओलंपिक पदक से वंचित रहा — यह दर्शाता है कि ओलंपिक में शूटिंग की एकल-दिवसीय प्रतिस्पर्धा और वर्ष भर की विश्व रैंकिंग में कितना फ़र्क होता है। भारतीय खेल प्रशासन को यह भी सोचना चाहिए कि पारिवारिक विरासत और संसाधनों की कमी के बीच खेल प्रतिभा को संस्थागत समर्थन कितना ज़रूरी है।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मानवजीत सिंह संधू कौन हैं?
मानवजीत सिंह संधू भारत के दिग्गज ट्रैप शूटर हैं, जिनका जन्म 3 नवंबर 1976 को अमृतसर, पंजाब में हुआ। वह चार ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और 2006 ISSF विश्व शूटिंग चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय शॉटगन शूटर हैं।
मानवजीत सिंह संधू ने कितने ओलंपिक में हिस्सा लिया?
मानवजीत सिंह संधू ने कुल चार ओलंपिक — 2004 (एथेंस), 2008 (बीजिंग), 2012 (लंदन) और 2016 (रियो) — में भारत का प्रतिनिधित्व किया। हालाँकि, वह ओलंपिक में पदक नहीं जीत पाए।
मानवजीत सिंह संधू को कौन-कौन से पुरस्कार मिले हैं?
मानवजीत सिंह संधू को 1998 में अर्जुन पुरस्कार और 2006 में राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया। ये दोनों पुरस्कार भारत सरकार के सर्वोच्च खेल सम्मानों में गिने जाते हैं।
मानवजीत सिंह संधू का शूटिंग से जुड़ाव कैसे हुआ?
मानवजीत को शूटिंग का खेल विरासत में मिला। उनके पिता गुरबी सिंह संधू स्वयं एक ओलंपियन और अर्जुन पुरस्कार विजेता शूटर थे, जिन्होंने बेटे के शुरुआती कोच की भूमिका निभाई और उन्हें ट्रैप शूटिंग की बारीकियाँ सिखाईं।
मानवजीत सिंह संधू की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है?
उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि 2006 में ज़ाग्रेब में ISSF विश्व शूटिंग चैंपियनशिप की ट्रैप स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतना है। इसके साथ ही वह उसी वर्ष ट्रैप शूटिंग की विश्व रैंकिंग में नंबर-1 स्थान पर भी पहुँचे।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले