क्या मानवजीत सिंह संधू : ओलंपियन पिता के बेटे, जिन्होंने शॉटगन में रचा था इतिहास?

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क्या मानवजीत सिंह संधू : ओलंपियन पिता के बेटे, जिन्होंने शॉटगन में रचा था इतिहास?

सारांश

मानवजीत सिंह संधू, एक उत्कृष्ट ट्रैप शूटर, जिनके पिता एक ओलंपियन हैं, ने कई प्रतियोगिताओं में भारत का नाम रोशन किया है। उन्होंने 2006 में वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण जीतकर इतिहास रचा। जानिए उनके अद्वितीय सफर के बारे में।

मुख्य बातें

मानवजीत सिंह संधू का जन्म 3 नवंबर 1976 को हुआ था।
उन्होंने 1998 में एशियन गेम्स में रजत पदक जीता।
2006 में उन्होंने वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता।
वे भारतीय शूटिंग के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।
उनके पिता एक ओलंपियन हैं।

नई दिल्ली, 2 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। भारत के प्रमुख ट्रैप शूटर मानवजीत सिंह संधू ने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व करते हुए तिरंगा लहराया है। कॉमनवेल्थ गेम्स, वर्ल्ड चैंपियनशिप और एशियन गेम्स में पदक विजेता संधू आईएसएसएफ वर्ल्ड शूटिंग चैंपियनशिप 2006 में स्वर्ण पदक जीतकर विश्व चैंपियन बनने वाले पहले भारतीय शॉटगन निशानेबाज बने।

3 नवंबर 1976 को अमृतसर में जन्मे मानवजीत सिंह संधू अपनी सटीक निशानेबाजी और शांत स्वभाव के लिए प्रसिद्ध हैं। वह भारतीय शूटिंग टीम के अनुभवी और प्रेरणास्रोत खिलाड़ी माने जाते हैं।

लंबी कद-काठी के दाहिने हाथ के निशानेबाज मानवजीत सिंह संधू को यह खेल अपने पिता से विरासत में मिला। उनके पिता गुरबीर सिंह संधू एक ओलंपियन और अर्जुन पुरस्कार विजेता रहे हैं। वह उनके व्यक्तिगत कोच भी रहे।

1998 के एशियन गेम्स में रजत पदक जीतने वाले मानवजीत ने उसी साल कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक भी अपने नाम किया। इस अद्भुत प्रदर्शन ने उन्हें भारत का स्टार बना दिया। उन्होंने पहली बार 2004 में एथेंस ओलंपिक में भाग लिया, लेकिन इस बार 19वें स्थान पर रहे।

इसके बाद, मानवजीत ने 2006 में जागरेब में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप की ट्रैप शूटिंग में स्वर्ण पदक जीता। इसी के साथ वह ट्रैप शूटिंग की विश्व रैंकिंग में पहले स्थान पर आ गए थे। वह विश्व स्तर पर स्वर्ण जीतने वाले दूसरे भारतीय बने।

जागरेब में उन्होंने स्वर्ण के साथ एक रजत भी अपने नाम किया। उनसे पहले अभिनव बिंद्रा वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण जीत चुके थे।

2008 के बीजिंग ओलंपिक में एक बार फिर मानवजीत ने जगह बनाई, लेकिन इस बार भी वह पदक से चूक गए। इसके बाद, 2012 और 2016 में भी उन्होंने ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व किया। हालांकि, उन्हें कभी ओलंपिक मेडल नहीं मिल सके, लेकिन पूर्व विश्व चैंपियन शूटर ने नवंबर 2016 में 60वीं राष्ट्रीय निशानेबाजी चैंपियनशिप (एनएससीसी) शॉटगन में पुरुषों की ट्रैप स्पर्धा में चैंपियन बनकर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की।

मानवजीत एशियन गेम्स में चार रजत पदक जीतने वाले शूटर हैं। उन्होंने 1998, 2002 और 2006 के एशियन गेम्स में ऐसा किया। एशियन क्ले शूटिंग चैंपियनशिप में उन्होंने 6 स्वर्ण पदक जीते। उन्होंने 2010 में मैक्सिको में हुए विश्व कप में भी स्वर्ण जीता।

एशियन क्ले शूटिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक विजेता मानवजीत सिंह ने एशियन शॉटगन चैंपियनशिप में भी देश के लिए स्वर्ण जीता। उनके नाम 124 से 125 लक्ष्यों का एशियन रिकॉर्ड है।

शूटिंग में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए मानवजीत को अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उन्होंने देश का नाम भी गर्व से ऊंचा किया है। उनके प्रयासों और उपलब्धियों से यह स्पष्ट होता है कि प्रतिभा और मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता। देश के लिए उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मानवजीत सिंह संधू ने सबसे पहले कब ओलंपिक में भाग लिया?
उन्होंने 2004 के एथेंस ओलंपिक में सबसे पहले भाग लिया।
मानवजीत को कितने एशियन गेम्स में रजत पदक मिला?
मानवजीत ने एशियन गेम्स में चार रजत पदक जीते हैं।
मानवजीत ने कब वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता?
उन्होंने 2006 में जागरेब में वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता।
मानवजीत का जन्मदिन कब है?
उनका जन्म 3 नवंबर 1976 को हुआ था।
राष्ट्र प्रेस
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