समरेश जंग: भारतीय निशानेबाज़ी के 'गोल्डफिंगर' जिन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2006 में 5 स्वर्ण जीते
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 4 मई। भारत के प्रसिद्ध निशानेबाज़ समरेश जंग को शूटिंग जगत में 'गोल्डफिंगर' की उपाधि से जाना जाता है, जिन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2006 में 5 स्वर्ण, 1 रजत और 1 कांस्य पदक अपने नाम किए थे। 2002 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित इस दिग्गज शूटर ने भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर कई स्मरणीय विजय दिलाने के अलावा कोचिंग के माध्यम से भी निशानेबाज़ी को समृद्ध किया।
परिवार की सैन्य और स्वतंत्रता संग्राम की विरासत
5 मई 1970 को हिमाचल प्रदेश के सिरमौर में जन्मे समरेश जंग की पारिवारिक पृष्ठभूमि स्वतंत्रता संग्राम और सैन्य सेवा से गहराई से जुड़ी हुई है। उनके दादा शेर जंग एक स्वतंत्रता सेनानी और प्रशिक्षित निशानेबाज़ थे, जबकि उनके पिता भारतीय सेना में कर्नल के पद तक पहुंचे। इसी परिवारिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए समरेश ने भी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) में शामिल होकर देश की सेवा का मार्ग चुना।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शानदार प्रदर्शन
समरेश जंग की शूटिंग यात्रा 1997 के SAAFF गेम्स में उल्लेखनीय रही, जहाँ उन्होंने 2 स्वर्ण और 1 रजत पदक जीते। 2002 में मैनचेस्टर में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने 2 स्वर्ण और 3 रजत पदक अपने नाम किए, जिसी वर्ष उन्हें भारत के सर्वोच्च खेल सम्मान अर्जुन पुरस्कार से नवाज़ा गया।
चार वर्ष बाद 2006 में मेलबर्न में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में समरेश ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया, जहाँ उन्होंने 5 स्वर्ण, 1 रजत और 1 कांस्य पदक जीते। इस असाधारण प्रदर्शन के लिए उन्हें 'सर्वश्रेष्ठ एथलीट' का सम्मान भी दिया गया — यह सम्मान पाने वाले वे पहले भारतीय खिलाड़ी थे।
2004-2005 की उत्कृष्ट उपलब्धियाँ
2004 के SAAFF गेम्स में समरेश ने 25 मीटर स्टैंडर्ड पिस्टल स्पर्धा में रजत पदक जीता। इसके बाद 2005 की राष्ट्रमंडल शूटिंग चैंपियनशिप में उन्होंने 2 स्वर्ण, 2 रजत और 1 कांस्य पदक प्राप्त किए, जो उनकी निरंतर उत्कृष्टता का प्रमाण थे।
ओलंपिक अनुभव और घरेलू सम्मान
समरेश ने 2008 के बीजिंग ओलंपिक गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व किया, जहाँ वे 10 मीटर एयर पिस्टल और 50 मीटर पिस्टल दोनों स्पर्धाओं में भाग लिए, हालाँकि वे फाइनल तक पहुंचने में सफल नहीं रहे। 2010 में नई दिल्ली में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स के उद्घाटन समारोह में उन्हें 'क्वीन्स बैटन' लेकर स्टेडियम में दौड़ने का सम्मान मिला — जो भारतीय खेल इतिहास में एक गौरवान्वित पल था। इसी आयोजन में उन्होंने 25 मीटर स्टैंडर्ड पिस्टल में कांस्य पदक भी जीता।
विरासत और भविष्य
अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी शानदार उपलब्धियों के बाद समरेश जंग ने कोचिंग के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिससे भारतीय निशानेबाज़ी को नई पीढ़ी को तैयार करने में मदद मिली। उनकी विरासत न केवल उनके पदकों में बल्कि उन खिलाड़ियों में भी जीवंत है जिन्होंने उनसे सीखा है।