भारत ने निशानेबाजी में हासिल किया पहला स्थान, इंग्लैंड रहा दूसरे स्थान पर
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नई दिल्ली, 26 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। निशानेबाजी को आजकल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रतिष्ठित खेल के रूप में मान्यता प्राप्त है। भारतीय निशानेबाजों ने भी वैश्विक मंचों पर अद्भुत सफलताएँ हासिल की हैं और देश का नाम ऊँचा किया है। जहाँ 2008 में बीजिंग ओलंपिक में अभिनव बिंद्रा ने स्वर्ण पदक जीता, वहीं 2024 में पेरिस ओलंपिक में मनु भाकर ने कांस्य पदक प्राप्त किया।
कॉमनवेल्थ गेम्स और अन्य निशानेबाजी प्रतियोगिताओं में भारतीय टीम का प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा है। 2010 में आयोजित आठवीं राष्ट्रमंडल निशानेबाजी प्रतियोगिता में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान प्राप्त किया।
भारतीय टीम ने कुल 74 पदक जीते, जिसमें 35 स्वर्ण, 25 रजत और 14 कांस्य शामिल हैं।
इंग्लैंड दूसरे स्थान पर रहा, जहाँ उसने 4 स्वर्ण समेत कुल 31 पदक जीते। वेल्स ने चार स्वर्ण समेत 13 पदक हासिल कर तीसरा स्थान प्राप्त किया, जबकि ऑस्ट्रेलिया ने 3 स्वर्ण समेत 19 पदक के साथ चौथा स्थान हासिल किया।
भारत की ओर से पदक जीतने वालों में गुरप्रीत सिंह, समरेश जंग, विजय कुमार, श्वेता चौधरी, अनुराज सिंह, पुष्पांजलि राणा, और गगन नारंग जैसे प्रमुख नाम शामिल थे।
गगन नारंग ने 596 अंक बनाते हुए राष्ट्रमंडल निशानेबाजी का नया रिकॉर्ड स्थापित किया था, लेकिन टाईब्रेकर में वह ऑस्ट्रेलियाई निशानेबाज से थोड़े अंतर से हार गए थे।
वर्तमान में, भारतीय निशानेबाजी पहले से और अधिक मजबूत हो चुकी है। मनु भाकर और स्वप्निल कुसाले जैसे युवा खिलाड़ियों ने ओलंपिक जैसे वैश्विक मंच पर भारत की मजबूती को दर्शाया है।
भारत ने ओलंपिक में अब तक निशानेबाजी में सात पदक जीते हैं। इसकी शुरुआत राज्यवर्धन सिंह राठौर ने एथेंस 2004 में रजत पदक जीतकर की थी, जबकि मनु भाकर ने पेरिस 2024 में दो पदक अपने नाम किए।
कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारत ने अब तक निशानेबाजी में सबसे अधिक 135 पदक जीते हैं। यह खेल भारत के लिए कॉमनवेल्थ में सबसे सफल साबित हुआ है।