17 मई 2010: भारत ने कॉमनवेल्थ बॉक्सिंग में जीते सभी 6 स्वर्ण, इंग्लैंड को पछाड़ बना था चैंपियन

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17 मई 2010: भारत ने कॉमनवेल्थ बॉक्सिंग में जीते सभी 6 स्वर्ण, इंग्लैंड को पछाड़ बना था चैंपियन

सारांश

17 मई 2010 को भारतीय मुक्केबाजों ने कॉमनवेल्थ बॉक्सिंग चैंपियनशिप में वह कर दिखाया जो पहले कभी नहीं हुआ था — सभी छह स्वर्ण पदक अपने नाम किए और इंग्लैंड को पछाड़ चैंपियन बने। यह वह पल था जिसने आधुनिक भारतीय मुक्केबाजी की नींव रखी।

मुख्य बातें

17 मई 2010 को भारत ने कॉमनवेल्थ बॉक्सिंग चैंपियनशिप के सभी 6 स्वर्ण पदक जीते।
भारत 36 अंकों के साथ पहले स्थान पर रहा; इंग्लैंड 34 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर।
स्वर्ण विजेता: विजेंद्र सिंह (75 किग्रा) , अमनदीप सिंह (49 किग्रा) , सुरंजॉय सिंह (52 किग्रा) , जय भगवान (60 किग्रा) , दिनेश कुमार (81 किग्रा) , परमजीत समोटा (91+ किग्रा) ।
विजेंद्र सिंह को सर्वश्रेष्ठ बॉक्सर का पुरस्कार मिला।
इस उपलब्धि के बाद मैरी कॉम (लंदन 2012) और लवलीना बोरगोहेन (टोक्यो 2020) ने ओलंपिक कांस्य पदक जीते।

17 मई 2010 भारतीय मुक्केबाजी के इतिहास का वह स्वर्णिम दिन है जब भारतीय दल ने कॉमनवेल्थ बॉक्सिंग चैंपियनशिप के सभी छह स्वर्ण पदक अपने नाम किए और 36 अंकों के साथ तालिका में पहला स्थान हासिल किया। 34 अंकों के साथ इंग्लैंड दूसरे स्थान पर रहा। भारत की इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने दुनियाभर के मुक्केबाजी प्रेमियों को चौंका दिया था।

मुख्य घटनाक्रम

भारत की तरफ से विजेंद्र सिंह (75 किग्रा), दिनेश कुमार (81 किग्रा), परमजीत समोटा (91+ किग्रा), अमनदीप सिंह (49 किग्रा), सुरंजॉय सिंह (52 किग्रा) और जय भगवान (60 किग्रा) ने अपने-अपने भार वर्ग के फाइनल में जीत दर्ज कर स्वर्ण पदक पर कब्जा किया। यह किसी एक टीम द्वारा एकल संस्करण में सभी स्वर्ण पदक जीतने का असाधारण प्रदर्शन था।

विजेंद्र सिंह को सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाज का सम्मान

बीजिंग ओलंपिक 2008 में कांस्य पदक विजेता विजेंद्र सिंह को इस चैंपियनशिप में सर्वश्रेष्ठ बॉक्सर का पुरस्कार दिया गया। उनका यह प्रदर्शन उस दौर में भारतीय मुक्केबाजी की बढ़ती ताकत का प्रतीक बन गया। गौरतलब है कि विजेंद्र ने ओलंपिक पदक के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार अपना दबदबा बनाए रखा।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और महत्व

यह उपलब्धि ऐसे समय में आई जब भारतीय मुक्केबाजी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बना रही थी। 2010 का यह प्रदर्शन उस नींव का हिस्सा बना जिस पर आने वाले वर्षों में भारतीय मुक्केबाजों ने ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप में पदक जीते। मैरी कॉम ने लंदन ओलंपिक 2012 में 51 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक जीता, जबकि लवलीना बोरगोहेन ने टोक्यो ओलंपिक 2020 में महिलाओं की 69 किग्रा श्रेणी में कांस्य पदक अपने नाम किया।

आज की भारतीय मुक्केबाजी

2010 के उस ऐतिहासिक अध्याय के बाद से भारतीय मुक्केबाजी ने पुरुष और महिला दोनों वर्गों में उल्लेखनीय प्रगति की है। निखत जरीन, जैस्मीन लंबोरिया, साक्षी चौधरी और मीनाक्षी हुड्डा जैसी महिला मुक्केबाज लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का परचम लहरा रही हैं। एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय दल का प्रदर्शन इस खेल के उज्ज्वल भविष्य की ओर इशारा करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इंग्लैंड जैसी मजबूत मुक्केबाजी परंपरा वाले देश को पछाड़ना इसे और महत्वपूर्ण बनाता है। हालांकि ओलंपिक में भारतीय मुक्केबाजी की निरंतरता अब भी एक चुनौती रही है, 2010 का वह दिन उस पीढ़ी की प्रेरणा बना जिसने बाद में विश्व चैंपियनशिप और एशियाई खेलों में भारत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

17 मई 2010 को कॉमनवेल्थ बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भारत ने क्या हासिल किया था?
भारत ने 17 मई 2010 को कॉमनवेल्थ बॉक्सिंग चैंपियनशिप के सभी छह स्वर्ण पदक जीते और 36 अंकों के साथ पहला स्थान हासिल किया। इंग्लैंड 34 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहा।
2010 की कॉमनवेल्थ बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भारत के लिए किन मुक्केबाजों ने स्वर्ण पदक जीते?
विजेंद्र सिंह (75 किग्रा), अमनदीप सिंह (49 किग्रा), सुरंजॉय सिंह (52 किग्रा), जय भगवान (60 किग्रा), दिनेश कुमार (81 किग्रा) और परमजीत समोटा (91+ किग्रा) ने स्वर्ण पदक जीते। विजेंद्र सिंह को सर्वश्रेष्ठ बॉक्सर का पुरस्कार भी मिला।
विजेंद्र सिंह को 2010 में सर्वश्रेष्ठ बॉक्सर का पुरस्कार क्यों मिला?
विजेंद्र सिंह ने कॉमनवेल्थ बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2010 में 75 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने के साथ-साथ पूरे टूर्नामेंट में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। बीजिंग ओलंपिक 2008 के कांस्य पदक विजेता के रूप में वह पहले से ही भारतीय मुक्केबाजी के सबसे बड़े नाम थे।
2010 के बाद भारतीय मुक्केबाजी ने ओलंपिक में क्या उपलब्धियाँ हासिल कीं?
मैरी कॉम ने लंदन ओलंपिक 2012 में 51 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक जीता। लवलीना बोरगोहेन ने टोक्यो ओलंपिक 2020 में महिलाओं की 69 किग्रा श्रेणी में कांस्य पदक अपने नाम किया।
वर्तमान में भारतीय महिला मुक्केबाजी में कौन-से प्रमुख नाम हैं?
निखत जरीन, जैस्मीन लंबोरिया, साक्षी चौधरी और मीनाक्षी हुड्डा वर्तमान में भारतीय महिला मुक्केबाजी की अगुआ हैं। ये सभी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार पदक जीत रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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