गगन नारंग: 2012 लंदन ओलंपिक कांस्य पदक विजेता, राष्ट्रमंडल और विश्व कप में 10 स्वर्ण
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 5 मई (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय निशानेबाजी के इतिहास में गगन नारंग का नाम स्वर्ण अक्षरों से दर्ज है। 10-मीटर एयर राइफल में विशेषज्ञता रखने वाले नारंग ने 2012 लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर भारत के लिए एक ऐतिहासिक क्षण रचा, और राष्ट्रमंडल खेलों तथा विश्व कप स्पर्धाओं में कुल 10 स्वर्ण पदक अपने नाम किए।
प्रारंभिक जीवन और निशानेबाजी की शुरुआत
6 मई 1983 को चेन्नई, तमिलनाडु में एक पंजाबी हिंदू परिवार में जन्मे नारंग का परिवार हरियाणा के पानीपत जिले के शिमला गुजरां गांव से संबंधित है। उनके पिता भीमसेन नारंग की नौकरी के कारण परिवार हैदराबाद में बस गया, जहाँ नारंग का पालन-पोषण हुआ। उस्मानिया विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन (BCA) की शिक्षा प्राप्त करने वाले नारंग ने 1997 में निशानेबाजी की ओर रुख किया, जब उनके पिता ने उन्हें एयर पिस्टल भेंट किया।
राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पदक
नारंग के खेल करियर की शुरुआत 26 अक्टूबर 2003 को हुई, जब उन्होंने हैदराबाद में आयोजित एफ्रो एशियाई खेलों में पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद 2006 विश्व कप में उन्होंने एयर राइफल में स्वर्ण पदक जीता। 2006 के राष्ट्रमंडल खेलों में नारंग ने 4 स्वर्ण पदक अपने नाम किए, जो उनकी बहुमुखी प्रतिभा का प्रमाण था।
विश्व रिकॉर्ड और 2008 का वर्ष
2008 में चीन में विश्व कप में स्वर्ण पदक जीतने के बाद, नारंग 2008 ISSF विश्व कप फाइनल के लिए क्वालीफाई हुए। अंतिम राउंड में उन्होंने 103.5 का स्कोर किया और कुल स्कोर 703.5 बनाकर यूनिवर्स रिकॉर्ड स्थापित किया। 4 नवंबर 2008 को, नारंग ने स्पेन के ग्रेनाडा में ऑस्ट्रिया के थॉमस फार्निक का 2006 विश्व कप फाइनल रिकॉर्ड तोड़ा। नई दिल्ली में 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों में उन्होंने पुनः 4 स्वर्ण पदक जीते, जबकि 2010 एशियाई खेलों में उन्हें रजत पदक मिला।
ओलंपिक की ऐतिहासिक उपलब्धि
लंदन में 2012 में आयोजित ओलंपिक गगन नारंग के लिए सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। नारंग ने 10-मीटर एयर राइफल इवेंट में 701.1 के कुल स्कोर के साथ कांस्य पदक जीता, जो भारतीय निशानेबाजी में एक ऐतिहासिक पल था। यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत कौशल को दर्शाती है, बल्कि भारतीय खेल की वैश्विक प्रतिष्ठा को भी बढ़ाती है। ग्लासगो में 2014 कॉमनवेल्थ गेम्स में नारंग ने 50-मीटर राइफल प्रोन में रजत और 50-मीटर राइफल 3 पोजिशन में कांस्य पदक जीता।
राष्ट्रीय सम्मान और पुरस्कार
निशानेबाजी के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए भारत सरकार ने नारंग को अलंकृत किया। 2010 में उन्हें भारतीय खेल जगत के सर्वोच्च पुरस्कार राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार (अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार) के लिए चुना गया, जिसे 29 अगस्त 2011 को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा प्रदान किया गया। 2011 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। 2012 के भारतीय ग्रांड प्रिक्स में नारंग को चेकर्ड ध्वज लहराने के लिए आमंत्रित किया गया, जो खेल जगत में उनकी प्रतिष्ठा का प्रमाण है।
विरासत और प्रभाव
गगन नारंग का योगदान भारतीय निशानेबाजी को विश्व मंच पर प्रतिष्ठित करने में महत्वपूर्ण रहा है। उनकी सफलता ने अगली पीढ़ी के निशानेबाजों को प्रेरित किया है और भारत में खेल के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।