क्या जीतू राय ने नेपाल में जन्म लेकर भारत को गोल्ड दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई?

सारांश
Key Takeaways
- जीतू राय की यात्रा प्रेरणादायक है।
- उन्होंने कठिनाइयों के बावजूद सफलता हासिल की।
- भारतीय सेना में सेवा का महत्व।
- शूटिंग में भारत का मान बढ़ाना।
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक पुरस्कार प्राप्त करना।
नई दिल्ली, 25 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। जीतू राय भारत के जाने-माने निशानेबाज हैं, जिन्होंने एयर पिस्टल शूटिंग में देश का नाम ऊंचा किया है। नेपाल में जन्मे जीतू ने भारतीय सेना में सेवा की। उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को न केवल गोल्ड दिलाया, बल्कि ओलंपिक में भी देश का मान बढ़ाया।
26 अगस्त 1987 को नेपाल के संखुसावा में जन्मे जीतू के पिता भारतीय सेना के गोरखा राइफल्स रेजिमेंट में थे। जब उनके पिता को भारतीय सेना में नौकरी मिली, तो उन्होंने परिवार को नेपाल में छोड़कर भारत की राह पकड़ी। उन्होंने 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध भी लड़ा।
बचपन में जीतू की शूटिंग से कोई खास पहचान नहीं थी। वह अपने गांव में भैंस और बकरियों के साथ समय बिताते थे और मक्के एवं आलू की फसलें उगाते थे।
महज 19 वर्ष
नायब सूबेदार जीतू ने 2013 से अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेना शुरू किया और कई पदक जीते।
2014 के कॉमनवेल्थ गेम्स में जीतू ने गोल्ड जीतकर रातों-रात सुर्खियां बटोरीं। इसी वर्ष उन्होंने नौ दिन में तीन वर्ल्ड कप मेडल जीते, जिसमें 10 मीटर एयर पिस्टल में गोल्ड और 50 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में सिल्वर शामिल था।
उन्होंने विश्व चैंपियनशिप में भी ब्रॉन्ज जीता और एशियन गेम्स में गोल्ड पर निशाना साधा।
जीतू का लक्ष्य 2016 के रियो ओलंपिक में पदक जीतना था, लेकिन वह आठवें पायदान पर रहे। फिर भी, उन्होंने हार नहीं मानी।
2017 की राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप में उन्होंने दो ब्रॉन्ज और वर्ल्ड कप में गोल्ड मेडल जीता। 2018 में कॉमनवेल्थ गेम्स में एक बार फिर गोल्ड पर निशाना साधा।
शूटिंग में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए 2015 में उन्हें अर्जुन अवॉर्ड और 2016 में मेजर ध्यान चंद खेल रत्न अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। 2020 में उन्हें पद्म श्री से नवाजा गया। जीतू की स्थिरता, अनुशासन और सटीक निशानेबाजी उन्हें आदर्श बनाती है।