बजरंग पुनिया: कुश्ती के क्षेत्र में चार पदक जीतने वाले अनोखे पहलवान और ओलंपिक पदक विजेता
सारांश
Key Takeaways
- बजरंग पुनिया ने विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में चार पदक जीते हैं।
- वे टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक विजेता हैं।
- उन्हें अर्जुन पुरस्कार, पद्मश्री, और राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार मिले हैं।
- उनका करियर युवा पहलवानों के लिए प्रेरणा है।
- उन्होंने 2024 से 2028 तक निलंबन का सामना किया।
नई दिल्ली, 25 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। कुश्ती भारत की एक प्राचीन कला है। हाल के वर्षों में, भारतीय पहलवानों ने अपनी मेहनत के बल पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलताएं प्राप्त कर भारतीय कुश्ती को एक नई पहचान दी है। जिन पहलवानों ने इस खेल को ऊंचाइयों तक पहुँचाया है, उनमें बजरंग पुनिया का नाम सबसे आगे है।
बजरंग पुनिया का जन्म 26 फरवरी 1994 को खुदान, झज्जर, हरियाणा में हुआ। हरियाणा को भारतीय कुश्ती का केंद्र माना जाता है, जिसका प्रभाव पुनिया पर भी पड़ा। उन्होंने 7 वर्ष की आयु से कुश्ती की ट्रेनिंग शुरू की। उनके पिता ने उन्हें पूरा समर्थन दिया। स्थानीय प्रशिक्षण के बाद, वे 2008 में दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में अभ्यास के लिए आए। 2013 से, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करना शुरू किया और शानदार सफलता हासिल की। पुनिया ने फ्रीस्टाइल कुश्ती में मुख्यतः 65 किग्रा वर्ग में मुकाबला किया है।
पुनिया विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में चार पदक जीतने वाले एकमात्र भारतीय पहलवान हैं। उनका करियर अत्यंत सफल रहा है। वे ओलंपिक में भी भारत को पदक दिला चुके हैं। टोक्यो ओलंपिक में, उन्होंने फ्रीस्टाइल कुश्ती में कांस्य पदक जीता। विश्व चैंपियनशिप में रजत और कांस्य, एशियन गेम्स में स्वर्ण और रजत, एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण, रजत, और कांस्य, और कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 और 2022 में स्वर्ण और 2014 में रजत पदक उनके नाम हैं। इसके अलावा, उन्होंने 2016 और 2017 में कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक जीते हैं।
बजरंग पुनिया को कुश्ती में उनके अद्वितीय प्रदर्शन के लिए भारत सरकार ने 2015 में अर्जुन पुरस्कार, 2019 में पद्मश्री पुरस्कार, और 2019 में राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार प्रदान किए।
32 वर्षीय बजरंग पुनिया ने आधिकारिक रूप से कुश्ती से संन्यास नहीं लिया है। नेशनल एंटी-डोपिंग एजेंसी (नाडा) ने उन्हें डोप परीक्षण के लिए सैंपल देने से इनकार करने पर चार वर्षों के लिए निलंबित किया है। यह प्रतिबंध 23 अप्रैल 2024 से लागू होकर 22 अप्रैल 2028 तक प्रभावी रहेगा।