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पूर्वी दिल्ली के 28 स्कूलों में 'सेफ वॉक टू स्कूल जोन' पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च, हर्ष मल्होत्रा ने की शुरुआत

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पूर्वी दिल्ली के 28 स्कूलों में 'सेफ वॉक टू स्कूल जोन' पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च, हर्ष मल्होत्रा ने की शुरुआत

सारांश

पूर्वी दिल्ली के 28 स्कूलों के बाहर ज़ेब्रा क्रॉसिंग, स्पीड ब्रेकर और साइनबोर्ड — BJP अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा की 'सेफ वॉक टू स्कूल जोन' पहल CSR के तहत शुरू हुई। GRAP प्रतिबंध हटते ही काम शुरू होगा, और सफल रहा तो 270 स्कूलों तक विस्तार होगा।

मुख्य बातें

दिल्ली BJP अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने वसुंधरा एन्क्लेव के समरविले स्कूल में 'सेफ वॉक टू स्कूल जोन' पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च किया।
पायलट चरण में पूर्वी दिल्ली के 28 स्कूलों को कवर किया जाएगा; सफलता पर 270 स्कूलों तक विस्तार का लक्ष्य।
उपायों में ज़ेब्रा क्रॉसिंग, स्पीड ब्रेकर, रेलिंग, बस स्टॉप और साइनबोर्ड शामिल हैं।
परियोजना CSR पहल के तहत है; GRAP प्रतिबंध हटते ही निर्माण कार्य शुरू होगा।
दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने जुलाई 2026 में स्कूल सुरक्षा के व्यापक दृष्टिकोण का आह्वान किया था।
भारत में 14.67 लाख स्कूलों में 24 करोड़ से अधिक छात्र हैं, जिससे बाल सुरक्षा राष्ट्रीय प्राथमिकता है।

दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने 3 नवंबर 2026 को वसुंधरा एन्क्लेव स्थित समरविले स्कूल में 'सेफ वॉक टू स्कूल जोन' सड़क सुरक्षा पायलट परियोजना का औपचारिक शुभारंभ किया। इस पहल का लक्ष्य पूर्वी दिल्ली के 28 स्कूलों के आसपास स्कूली बच्चों की आवाजाही को सुरक्षित बनाना है। कार्यक्रम में BJP विधायक अरविंदर सिंह लवली भी उपस्थित रहे।

परियोजना में क्या-क्या शामिल है

मल्होत्रा ने बताया कि यह परियोजना कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) पहल के तहत शुरू की जा रही है। इसके अंतर्गत 28 स्कूलों के बाहर कई भौतिक सुरक्षा उपाय लागू किए जाएँगे, जिनमें प्रमुख ज़ेब्रा क्रॉसिंग का निर्माण, दुर्घटनाओं को रोकने के लिए स्पीड ब्रेकर, बच्चों की सुरक्षा के लिए रेलिंग, स्कूल बसों के ठहराव हेतु निर्धारित स्थान और 'स्कूल आगे है', गति-सीमा तथा आने वाली ज़ेब्रा क्रॉसिंग को इंगित करने वाले साइनबोर्ड शामिल हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्रैप (GRAP) प्रतिबंध हटते ही इन कार्यों का क्रियान्वयन शुरू हो जाएगा। यह पायलट सफल होने पर पूर्वी दिल्ली के 270 स्कूलों तक विस्तारित किया जाएगा।

मल्होत्रा की प्रतिक्रिया

मल्होत्रा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, 'सड़क सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा है। यह सिर्फ सड़क परिवहन मंत्रालय का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे समाज का मुद्दा है।' उन्होंने भरोसा जताया कि पायलट परियोजना सफल होगी और इसे चरणबद्ध तरीके से पूरी पूर्वी दिल्ली में लागू किया जाएगा।

गौरतलब है कि यह पहल ऐसे समय में आई है जब राष्ट्रीय स्तर पर स्कूल सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज़ हुई है। भारत में लगभग 14.67 लाख स्कूलों में 24 करोड़ से अधिक छात्र नामांकित हैं, जिससे बच्चों की सुरक्षा एक प्रमुख राष्ट्रीय ज़िम्मेदारी बन जाती है।

उपराज्यपाल का व्यापक सुरक्षा आह्वान

दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने इससे पहले जुलाई में पीएचडी हाउस में आयोजित राष्ट्रीय सुरक्षित स्कूल नेतृत्व शिखर सम्मेलन 2026 को संबोधित करते हुए स्कूल सुरक्षा के लिए एक व्यापक और भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया था।

संधू ने जुलाई को 'बाल सुरक्षा माह' घोषित करने में भी अग्रणी भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा था कि शिक्षा का उद्देश्य एक ऐसा वातावरण निर्मित करना है जहाँ युवा मस्तिष्क सीख सकें और विकसित हो सकें — जो सुरक्षा की मूलभूत भावना के बिना संभव नहीं है।

स्कूल सुरक्षा का बदलता दायरा

संधू के अनुसार, स्कूली सुरक्षा की अवधारणा वर्षों में काफी विस्तृत हो गई है। भौतिक बुनियादी ढाँचे, अग्नि सुरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया के साथ-साथ अब साइबर सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, परिवहन सुरक्षा और अप्रत्याशित परिस्थितियों से निपटने की क्षमता भी इसमें शामिल मानी जाती है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, इसमें शिक्षण संस्थानों की भूमिका निर्णायक होगी।

यह पहल आने वाले महीनों में पूर्वी दिल्ली के स्कूलों के आसपास यातायात प्रबंधन की दिशा तय करेगी — और इसकी सफलता पर ही तय होगा कि यह मॉडल दिल्ली के बाकी हिस्सों तक पहुँचता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी असली परीक्षा क्रियान्वयन में होगी — खासकर तब, जब GRAP प्रतिबंधों और दिल्ली की जटिल यातायात व्यवस्था के बीच निर्माण कार्य की समयसीमा अनिश्चित है। 28 स्कूलों से 270 तक का सफर महज घोषणा नहीं, बल्कि संसाधन, समन्वय और राजनीतिक इच्छाशक्ति की माँग करता है। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि स्कूल सुरक्षा पर दिल्ली में चर्चाएँ पहले भी हुई हैं, पर भौतिक बुनियादी ढाँचे में बदलाव धीमा रहा है। नतीजा तब दिखेगा जब ज़ेब्रा क्रॉसिंग और साइनबोर्ड वाकई ज़मीन पर उतरें और दुर्घटनाओं के आँकड़े कम हों।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'सेफ वॉक टू स्कूल जोन' परियोजना क्या है?
यह पूर्वी दिल्ली के 28 स्कूलों के बाहर बच्चों की सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने की एक CSR-आधारित पायलट परियोजना है, जिसे दिल्ली BJP अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने वसुंधरा एन्क्लेव के समरविले स्कूल से लॉन्च किया। इसमें ज़ेब्रा क्रॉसिंग, स्पीड ब्रेकर, रेलिंग, बस स्टॉप और साइनबोर्ड जैसे उपाय शामिल हैं।
इस परियोजना का काम कब शुरू होगा?
हर्ष मल्होत्रा के अनुसार, GRAP (ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान) प्रतिबंध हटते ही 28 स्कूलों के बाहर निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। फिलहाल प्रतिबंध के कारण काम रुका हुआ है।
इस पहल में कितने स्कूल शामिल होंगे?
पायलट चरण में पूर्वी दिल्ली के 28 स्कूल शामिल हैं। परियोजना सफल रहने पर इसे पूर्वी दिल्ली के सभी 270 स्कूलों तक विस्तारित करने का लक्ष्य है।
दिल्ली में स्कूल सुरक्षा क्यों ज़रूरी मुद्दा है?
भारत में लगभग 14.67 लाख स्कूलों में 24 करोड़ से अधिक छात्र पढ़ते हैं, और स्कूलों के आसपास यातायात संबंधी दुर्घटनाएँ बड़ी चिंता का विषय बनी हुई हैं। दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने भी जुलाई 2026 में स्कूल सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता बताते हुए व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की अपील की थी।
इस परियोजना में कौन-कौन से सुरक्षा उपाय किए जाएँगे?
परियोजना के तहत प्रमुख ज़ेब्रा क्रॉसिंग का निर्माण, स्पीड ब्रेकर, बच्चों के लिए रेलिंग, स्कूल बसों के ठहराव के लिए निर्धारित स्थान और 'स्कूल आगे है' तथा गति-सीमा दर्शाने वाले साइनबोर्ड लगाए जाएँगे।
राष्ट्र प्रेस
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