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भारत में ऑनशोर विंड एनर्जी क्षमता 2,933.9 GW तक: TERI रिपोर्ट, 2070 तक मांग 11 गुना बढ़ने का अनुमान

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भारत में ऑनशोर विंड एनर्जी क्षमता 2,933.9 GW तक: TERI रिपोर्ट, 2070 तक मांग 11 गुना बढ़ने का अनुमान

सारांश

TERI की नई रिपोर्ट ने भारत की पवन ऊर्जा क्षमता का जो चित्र खींचा है, वह चौंकाने वाला है — 200 मीटर की ऊंचाई पर 2,933.9 GW की संभावना। साथ ही 2070 तक बिजली मांग में 11 गुना उछाल का अनुमान और नेट जीरो लक्ष्य के लिए 891 GW पवन क्षमता की दरकार — भारत की ऊर्जा नीति के लिए यह एक निर्णायक दस्तावेज़ है।

मुख्य बातें

TERI की रिपोर्ट के अनुसार भारत की ऑनशोर विंड एनर्जी क्षमता 150 मीटर पर 1,209.7 GW और 200 मीटर पर 2,933.9 GW है।
ऑफशोर विंड क्षमता न्यूनतम 7.0 मीटर/सेकंड हवा गति पर 220 GW (150 मीटर) और 277 GW (200 मीटर) आंकी गई है।
भारत की स्थापित विंड एनर्जी क्षमता 30 सितंबर 2026 तक 59.20 GW पहुंची; वित्त वर्ष 2025 26 में 6.05 GW की रिकॉर्ड वृद्धि।
राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु की 150 मीटर क्षमता में संयुक्त हिस्सेदारी लगभग 79 प्रतिशत ।
रिपोर्ट में 2070 तक बिजली मांग 11 गुना बढ़ने और नेट जीरो लक्ष्य के लिए 891 GW पवन क्षमता का अनुमान।
विकास के छह प्रमुख रास्ते चिह्नित — नए ऑनशोर प्लांट से लेकर तैरते ऑफशोर पवन संयंत्र तक।

द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (TERI) ने 2 नवंबर 2026 को जारी एक रिपोर्ट में खुलासा किया कि भारत की ऑनशोर विंड एनर्जी क्षमता पहले के सभी अनुमानों को पीछे छोड़ती है — 150 मीटर की हब ऊंचाई पर यह 1,209.7 गीगावाट और 200 मीटर की ऊंचाई पर 2,933.9 गीगावाट के करीब आंकी गई है। रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2070 तक देश की ग्रिड से जुड़ी बिजली की मांग मौजूदा स्तर से लगभग 11 गुना बढ़ सकती है।

रिपोर्ट के प्रमुख आंकड़े

TERI की इस रिपोर्ट के अनुसार, न्यूनतम 7.0 मीटर प्रति सेकंड की हवा की गति पर ऑफशोर विंड एनर्जी की क्षमता 150 मीटर की ऊंचाई पर लगभग 220 गीगावाट और 200 मीटर की ऊंचाई पर 277 गीगावाट आंकी गई है। यह आंकड़े भारत की नवीकरणीय ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं को नई ऊंचाई देते हैं।

रिपोर्ट में नेट जीरो लक्ष्य के तहत वर्ष 2070 तक 891 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता स्थापित करने का अनुमान लगाया गया है। यह प्रौद्योगिकी की लागत और बिजली प्रणाली से जुड़ी मान्यताओं के आधार पर संभावित विस्तार के व्यापक पैमाने को दर्शाता है।

राज्यवार हिस्सेदारी और प्राथमिकता क्षेत्र

150 मीटर की ऊंचाई पर अनुमानित विंड एनर्जी क्षमता में राजस्थान, गुजरात और कर्नाटक की संयुक्त हिस्सेदारी लगभग 61 प्रतिशत है। इन तीन राज्यों में महाराष्ट्र और तमिलनाडु को शामिल करने पर पाँचों राज्यों की संयुक्त हिस्सेदारी बढ़कर करीब 79 प्रतिशत हो जाती है।

रिपोर्ट में उन प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की भी पहचान की गई है जहाँ संसाधन क्षमता के अतिरिक्त सत्यापन की आवश्यकता है। गौरतलब है कि यह पहचान देश में नवीकरणीय ऊर्जा के वास्तविक भौगोलिक वितरण को समझने के लिए ज़रूरी है।

मौजूदा विंड एनर्जी क्षमता और रिकॉर्ड वृद्धि

भारत की स्थापित विंड एनर्जी क्षमता 30 सितंबर 2026 तक 59.20 गीगावाट तक पहुँच चुकी है। वित्त वर्ष 2025 26 में लगभग 6.05 गीगावाट की रिकॉर्ड वार्षिक क्षमता वृद्धि दर्ज की गई, जो इस क्षेत्र में अब तक की सबसे तेज़ रफ्तार रही।

रिपोर्ट में कहा गया, "जैसे जैसे भारत में बिजली की मांग बढ़ रही है और नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार हो रहा है, विंड एनर्जी संसाधनों की बेहतर समझ से बिजली उत्पादन की योजना बनाने, नवीकरणीय ऊर्जा की खरीद और बिजली पारेषण में निवेश से जुड़े फैसलों में मदद मिल सकती है।"

विकास के छह प्रमुख रास्ते

रिपोर्ट में उद्योग में विंड एनर्जी के उपयोग के लिए छह प्रमुख रास्तों की पहचान की गई है। इनमें नए ऑनशोर विंड एनर्जी प्लांट का विकास, मौजूदा पवन ऊर्जा संयंत्रों का आधुनिकीकरण एवं क्षमता विस्तार, अधिक ऊंचाई पर टर्बाइन स्थापना, पवन सौर बैटरी भंडारण एकीकरण, औद्योगिक स्तर पर बिजली खरीद, समुद्र में स्थिर आधार और तैरते हुए ऑफशोर पवन ऊर्जा प्लांट शामिल हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने 2070 नेट जीरो प्रतिबद्धता की दिशा में ठोस रोडमैप तैयार कर रहा है। पारेषण नेटवर्क, ऊर्जा प्रणाली में लचीलेपन और विनिर्माण क्षमता में बड़े निवेश की ज़रूरत पर रिपोर्ट ने विशेष जोर दिया है, जो आने वाले दशकों की नीति निर्माण प्रक्रिया को आकार दे सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'क्षमता' और 'स्थापित क्षमता' के बीच की खाई भारत की असली चुनौती है — 2,933.9 GW की सैद्धांतिक संभावना के सामने 59.20 GW की मौजूदा स्थापित क्षमता एक विशाल अंतर को उजागर करती है। छह में से कई 'रास्ते' — खासकर ऑफशोर और फ्लोटिंग पवन संयंत्र — भारत में अभी व्यावसायिक स्तर पर अप्रमाणित हैं, और पारेषण बुनियादी ढाँचे में निवेश की जो ज़रूरत रिपोर्ट रेखांकित करती है, उसके लिए नीतिगत इच्छाशक्ति और वित्तीय प्रतिबद्धता दोनों चाहिए। 2070 तक 11 गुना मांग वृद्धि का अनुमान ऊर्जा सुरक्षा की तात्कालिकता को रेखांकित करता है — पर बिना ठोस भूमि अधिग्रहण नीति और ग्रिड आधुनिकीकरण रोडमैप के, यह रिपोर्ट नीति निर्धारकों के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्यांक तो तय करती है, अमल की राह नहीं।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

TERI रिपोर्ट के अनुसार भारत की ऑनशोर विंड एनर्जी क्षमता कितनी है?
TERI की रिपोर्ट के अनुसार भारत की ऑनशोर विंड एनर्जी क्षमता 150 मीटर की हब ऊंचाई पर 1,209.7 गीगावाट और 200 मीटर की ऊंचाई पर 2,933.9 गीगावाट के करीब है। यह आंकड़ा पहले के अनुमानों से काफी अधिक है।
भारत में 2070 तक बिजली की मांग कितनी बढ़ने का अनुमान है?
TERI की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2070 तक भारत की ग्रिड से जुड़ी बिजली की मांग मौजूदा स्तर से लगभग 11 गुना बढ़ सकती है। नेट जीरो लक्ष्य को पूरा करने के लिए 2070 तक 891 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता की आवश्यकता बताई गई है।
भारत की मौजूदा स्थापित विंड एनर्जी क्षमता कितनी है?
30 सितंबर 2026 तक भारत की स्थापित विंड एनर्जी क्षमता 59.20 गीगावाट पहुँच गई है। वित्त वर्ष 2025 26 में लगभग 6.05 गीगावाट की रिकॉर्ड क्षमता वृद्धि के बाद यह उपलब्धि हासिल हुई।
किन राज्यों में सबसे अधिक पवन ऊर्जा क्षमता है?
150 मीटर की ऊंचाई पर अनुमानित विंड एनर्जी क्षमता में राजस्थान, गुजरात और कर्नाटक की हिस्सेदारी लगभग 61 प्रतिशत है। महाराष्ट्र और तमिलनाडु को शामिल करने पर इन पाँच राज्यों की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 79 प्रतिशत हो जाती है।
विंड एनर्जी विकास के लिए TERI ने कौन से प्रमुख रास्ते सुझाए हैं?
रिपोर्ट में छह प्रमुख रास्ते सुझाए गए हैं — नए ऑनशोर विंड प्लांट विकास, मौजूदा संयंत्रों का आधुनिकीकरण, अधिक ऊंचाई पर टर्बाइन स्थापना, पवन सौर बैटरी भंडारण एकीकरण, औद्योगिक बिजली खरीद, तथा स्थिर आधार व तैरते हुए ऑफशोर पवन ऊर्जा संयंत्र। इन सभी के लिए पारेषण और विनिर्माण में बड़े निवेश की ज़रूरत बताई गई है।
राष्ट्र प्रेस
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