8 अक्टूबर 2026
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भारत की पवन ऊर्जा क्षमता 59.20 गीगावाट पार, 2030 तक 100 GW लक्ष्य: प्रल्हाद जोशी

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भारत की पवन ऊर्जा क्षमता 59.20 गीगावाट पार, 2030 तक 100 GW लक्ष्य: प्रल्हाद जोशी

सारांश

भारत की पवन ऊर्जा क्षमता 59.20 GW पार कर चुकी है और वित्त वर्ष 2026 में 6.05 GW की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज हुई। चेन्नई में 'विंडएनर्जी इंडिया 2026' के मंच से मंत्री प्रल्हाद जोशी ने 2030 तक 100 GW का लक्ष्य हासिल करने का भरोसा जताया — यह हरित ऊर्जा में भारत के वैश्विक नेतृत्व की दिशा में बड़ा कदम है।

मुख्य बातें

30 सितंबर 2026 तक भारत की स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता 59.20 गीगावाट तक पहुँची।
वित्त वर्ष 2026 में 6.05 गीगावाट की अब तक की सबसे अधिक वार्षिक क्षमता वृद्धि दर्ज।
केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने 2030 तक 100 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य पर विश्वास जताया।
'विंडएनर्जी इंडिया 2026' में 20 से अधिक देशों के 400 प्रदर्शक और 500 प्रतिनिधि शामिल।
आईडब्ल्यूटीएमए बीडब्ल्यूई MOU , आईडब्ल्यूटीएमए पीटीबी LOI और आईडब्ल्यूटीएमए ओईसीडी सहयोग सहित कई अंतरराष्ट्रीय समझौते हुए।
डेनमार्क , जर्मनी और स्पेन के देश विशेष पवेलियन इस आयोजन की वैश्विक भागीदारी के प्रतीक बने।

केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने 8 अक्टूबर 2026 को चेन्नई में घोषणा की कि 30 सितंबर 2026 तक भारत की स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता 59.20 गीगावाट तक पहुँच चुकी है और देश 2030 तक 100 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता हासिल करने के राष्ट्रीय लक्ष्य की ओर मजबूती से अग्रसर है। मंत्री ने यह बात 'विंडएनर्जी इंडिया 2026' के 8वें संस्करण के उद्घाटन अवसर पर कही, जो वैश्विक पवन ऊर्जा क्षेत्र के प्रमुख हितधारकों को एकजुट करने वाला अग्रणी मंच है।

रिकॉर्ड वार्षिक क्षमता वृद्धि

जोशी ने बताया कि वित्त वर्ष 2026 में भारत के पवन ऊर्जा क्षेत्र ने 6.05 गीगावाट की अब तक की सबसे अधिक वार्षिक क्षमता वृद्धि दर्ज की है। उन्होंने विश्वास जताया कि वित्त वर्ष 2027 में यह आँकड़ा और ऊँचाई छुएगा। उनके अनुसार, "यह निरंतर वृद्धि 2030 तक 100 गीगावाट की स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता हासिल करने के हमारे राष्ट्रीय लक्ष्य की नींव को और मजबूत करेगी।"

यह ऐसे समय में आया है जब दुनियाभर में नवीकरणीय ऊर्जा की माँग तेज़ी से बढ़ रही है और भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को जीवाश्म ईंधन निर्भरता से दूर करने की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है।

नीतिगत ढाँचा और परियोजना पाइपलाइन

मंत्री ने कहा कि मजबूत परियोजना पाइपलाइन और अनुकूल नीतिगत ढाँचे के साथ भारत इस गति को बनाए रखने की बेहतर स्थिति में है। गौरतलब है कि यह भारत की तीसरी बड़ी नवीकरणीय ऊर्जा समीक्षा बैठक है जहाँ वृद्धि के रिकॉर्ड आँकड़े सामने आए हैं। सरकार का लक्ष्य पवन ऊर्जा उत्पादन के साथ साथ इसके निर्यात में भी वैश्विक नेतृत्व हासिल करना है।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग और समझौते

इस कार्यक्रम में कई महत्त्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय और घरेलू समझौतों की घोषणा की गई। इनमें आईडब्ल्यूटीएमए बीडब्ल्यूई ग्लोबल समझौता ज्ञापन (MOU), आईडब्ल्यूटीएमए पीटीबी आशय पत्र (LOI) और आईडब्ल्यूटीएमए ओईसीडी सहयोग शामिल हैं। उद्घाटन समारोह के दौरान 'तमिलनाडु में ऊर्जा परिवर्तन' और 'भारतीय पवन ऊर्जा क्षेत्र के लिए संविदात्मक व्यवस्था पर नए सिरे से विचार' शीर्षक वाली दो अहम रिपोर्टें भी जारी की गईं।

डेनमार्क, जर्मनी और स्पेन के लिए समर्पित देश विशेष पवेलियन इस आयोजन की वैश्विक पहुँच को दर्शाते हैं। इस सम्मेलन में 20 से अधिक देशों के करीब 400 प्रदर्शक और 500 प्रतिनिधि शामिल हुए।

उपस्थित प्रमुख हस्तियाँ

कार्यक्रम में केंद्र सरकार और कई राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, पवन ऊर्जा संघों के प्रतिनिधि तथा उद्योग जगत के प्रमुख लोग उपस्थित रहे। यह आयोजन भारत के पवन ऊर्जा क्षेत्र में तकनीकी प्रगति और निवेश को नई दिशा देने की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।

आगे की राह

विशेषज्ञों के अनुसार, 59.20 गीगावाट की मौजूदा क्षमता और 6.05 गीगावाट की वार्षिक वृद्धि दर को देखते हुए 2030 तक 100 गीगावाट का लक्ष्य चुनौतीपूर्ण लेकिन प्राप्त करने योग्य प्रतीत होता है। अगले वित्त वर्ष की क्षमता वृद्धि इस पथ का अगला निर्णायक पड़ाव होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 2030 तक शेष 40.80 गीगावाट जोड़ने के लिए हर वर्ष औसतन 10 गीगावाट से अधिक की बढ़त ज़रूरी होगी — जो मौजूदा रिकॉर्ड से लगभग दोगुनी रफ़्तार है। भूमि अधिग्रहण की जटिलताएँ, ग्रिड एकीकरण की सीमाएँ और राज्यों की असमान नीतिगत क्षमता इस महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य के सामने असली परीक्षाएँ हैं, जिनका जवाब आँकड़ों में नहीं, ज़मीनी क्रियान्वयन में मिलेगा। अंतरराष्ट्रीय MOU और LOI सकारात्मक संकेत हैं, परंतु निवेश के वास्तविक रूपांतरण की दर ही यह तय करेगी कि भारत वैश्विक पवन ऊर्जा नेतृत्व की दौड़ में डेनमार्क और जर्मनी जैसे दिग्गजों से आगे निकल पाता है या नहीं।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत की मौजूदा पवन ऊर्जा स्थापित क्षमता कितनी है?
30 सितंबर 2026 तक भारत की स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता 59.20 गीगावाट तक पहुँच गई है। केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने यह जानकारी 8 अक्टूबर 2026 को चेन्नई में 'विंडएनर्जी इंडिया 2026' के उद्घाटन अवसर पर दी।
भारत का पवन ऊर्जा के लिए 2030 तक क्या लक्ष्य है?
भारत का राष्ट्रीय लक्ष्य 2030 तक 100 गीगावाट स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता हासिल करना है। मंत्री प्रल्हाद जोशी के अनुसार मजबूत परियोजना पाइपलाइन और अनुकूल नीतिगत ढाँचे के साथ यह लक्ष्य प्राप्त करने योग्य है।
वित्त वर्ष 2026 में भारत ने पवन ऊर्जा में कितनी वृद्धि दर्ज की?
वित्त वर्ष 2026 में भारत ने 6.05 गीगावाट की अब तक की सबसे अधिक वार्षिक पवन ऊर्जा क्षमता वृद्धि दर्ज की। सरकार ने उम्मीद जताई है कि वित्त वर्ष 2027 में यह आँकड़ा और भी ऊँचा होगा।
'विंडएनर्जी इंडिया 2026' सम्मेलन में क्या खास रहा?
चेन्नई में आयोजित इस सम्मेलन के 8वें संस्करण में 20 से अधिक देशों के करीब 400 प्रदर्शक और 500 प्रतिनिधि शामिल हुए। आईडब्ल्यूटीएमए बीडब्ल्यूई MOU, आईडब्ल्यूटीएमए पीटीबी LOI और आईडब्ल्यूटीएमए ओईसीडी सहयोग सहित कई महत्त्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समझौते किए गए, और दो प्रमुख रिपोर्टें भी जारी की गईं।
भारत पवन ऊर्जा में वैश्विक नेतृत्व कैसे हासिल करना चाहता है?
भारत पवन ऊर्जा उत्पादन और निर्यात दोनों क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है। डेनमार्क, जर्मनी और स्पेन जैसे देशों के साथ अंतरराष्ट्रीय साझेदारियाँ, अनुकूल नीतिगत ढाँचा और रिकॉर्ड वार्षिक क्षमता वृद्धि इस रणनीति के प्रमुख स्तंभ हैं।
राष्ट्र प्रेस
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