31 जुलाई 2026
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भारत करेगा ग्लोबल विंड डे 2026 की मेजबानी, 2030 तक 100 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य

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भारत करेगा ग्लोबल विंड डे 2026 की मेजबानी, 2030 तक 100 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य

सारांश

गोवा में ग्लोबल विंड डे 2026 की मेजबानी महज एक आयोजन नहीं — यह भारत की उस महत्वाकांक्षा का सार्वजनिक ऐलान है जो 2030 तक 100 गीगावाट पवन क्षमता और 70-80% स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग के दम पर वैश्विक बाज़ार में अपनी जगह बनाना चाहती है।

मुख्य बातें

भारत गोवा में ग्लोबल विंड डे 2026 कॉन्फ्रेंस की मेजबानी करेगा, जिसका लक्ष्य 2030 तक 100 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता हासिल करना है।
भारत की स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता मार्च 2026 तक 56.09 गीगावाट पहुँची — 2014 से 2.66 गुना वृद्धि।
2025-26 में 6.05 गीगावाट की रिकॉर्ड वार्षिक क्षमता जोड़ी गई, जो 2024-25 के 4.15 गीगावाट के पिछले रिकॉर्ड से अधिक है।
विंड टर्बाइन निर्माण क्षमता 2014 के 10 गीगावाट से बढ़कर मार्च 2026 तक 24 गीगावाट हुई; प्रमुख पुर्जों में 70-80% स्वदेशीकरण।
कॉन्फ्रेंस में 'ग्लोबल मार्केट के लिए भारत के विंड टर्बाइन एक्सपोर्ट' पर विशेष इंडस्ट्री रिपोर्ट जारी होगी।
पवन ऊर्जा का लगभग 45% उत्पादन पीक डिमांड के दौरान होता है, जो ग्रिड स्थिरता में अहम भूमिका निभाता है।

भारत सोमवार, 16 जून 2026 को गोवा में ग्लोबल विंड डे 2026 कॉन्फ्रेंस की मेजबानी करेगा, जिसका उद्देश्य देश की 2030 तक 100 गीगावाट और 2036 तक 156 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता हासिल करने की महत्वाकांक्षी योजना को मजबूत आधार देना है। आधिकारिक बयान के अनुसार, यह सम्मेलन भारत की पवन ऊर्जा यात्रा के अगले निर्णायक चरण की रूपरेखा तय करेगा।

भारत की पवन ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि

स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता के मामले में भारत इस समय विश्व में चौथे स्थान पर है। मार्च 2014 में यह क्षमता 21.04 गीगावाट थी, जो मार्च 2026 तक बढ़कर 56.09 गीगावाट हो गई — यानी 2.66 गुना की बढ़ोतरी। इसके अतिरिक्त, 28 गीगावाट की अतिरिक्त क्षमता का क्रियान्वयन फिलहाल जारी है।

वर्ष 2025-26 में भारत ने सालाना आधार पर 6.05 गीगावाट की अब तक की सर्वाधिक पवन ऊर्जा क्षमता जोड़ी, जिसने 2024-25 के 4.15 गीगावाट के पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। यह लगातार दूसरे वर्ष रिकॉर्ड वृद्धि है, जो नीतिगत प्रोत्साहन और बाज़ार की परिपक्वता दोनों को दर्शाती है।

कॉन्फ्रेंस की मुख्य प्राथमिकताएँ

सरकार के अनुसार, यह सम्मेलन पवन ऊर्जा क्षेत्र की कई अहम चुनौतियों और अवसरों पर केंद्रित रहेगा — जिनमें संसाधन की पर्याप्तता, ग्रिड की तैयारी, क्षमता विस्तार, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग की प्रतिस्पर्धात्मकता, निर्यात के अवसर तथा पूर्वानुमान एवं रिन्यूएबल एनर्जी फर्मिंग में प्रगति शामिल हैं।

इस अवसर पर 'ग्लोबल मार्केट के लिए भारत के विंड टर्बाइन एक्सपोर्ट को बढ़ावा देना' शीर्षक से एक विशेष इंडस्ट्री रिपोर्ट भी जारी की जाएगी, जो निर्यात रणनीति की दिशा तय करने में सहायक होगी।

प्रमुख संस्थाओं की भागीदारी

इस कॉन्फ्रेंस में सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (CEA), सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI), इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (IREDA), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ विंड एनर्जी (NIWE) और ग्रिड इंडिया के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसके साथ ही प्रमुख राज्य सरकारों और उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि भी एक मंच पर आएंगे।

घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और आत्मनिर्भरता

भारत की विंड टर्बाइन निर्माण क्षमता 2014 के 10 गीगावाट से बढ़कर मार्च 2026 तक लगभग 24 गीगावाट हो गई है। इस क्षेत्र ने ब्लेड, टावर, गियरबॉक्स और अन्य आवश्यक उपकरणों में 70-80 प्रतिशत स्वदेशीकरण हासिल कर लिया है, जिससे एक सशक्त घरेलू सप्लाई चेन तैयार हुई है।

गौरतलब है कि पवन ऊर्जा से होने वाला लगभग 45 प्रतिशत उत्पादन पीक डिमांड के समय होता है, जो सौर ऊर्जा के साथ मिलकर ग्रिड की विश्वसनीयता को और मजबूत करता है। यह तथ्य भारत के ऊर्जा मिश्रण में पवन ऊर्जा की रणनीतिक अहमियत को रेखांकित करता है।

आगे की राह

प्रमुख राज्यों में बढ़ती स्थापित क्षमता और मजबूत पवन संसाधन की उपलब्धता के साथ भारत का पवन ऊर्जा क्षेत्र तेज़ रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। तकनीकी उन्नति और विविध उपयोग के साथ इस क्षेत्र की भूमिका आने वाले वर्षों में और विस्तृत होने की संभावना है — और गोवा में होने वाली यह कॉन्फ्रेंस उस दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 2030 तक 100 गीगावाट का लक्ष्य हासिल करने के लिए अभी भी लगभग 44 गीगावाट की दूरी तय करनी है — और वह भी महज चार वर्षों में। असली परीक्षा ग्रिड एकीकरण और ट्रांसमिशन बुनियादी ढाँचे की है, जो ऐतिहासिक रूप से क्षमता वृद्धि की रफ्तार से पीछे रहा है। 70-80% स्वदेशीकरण एक उल्लेखनीय उपलब्धि है, लेकिन निर्यात महत्वाकांक्षा तभी साकार होगी जब भारतीय टर्बाइन वैश्विक बाज़ार में गुणवत्ता और लागत दोनों पर प्रतिस्पर्धी साबित हों — जिसकी परीक्षा अभी बाकी है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्लोबल विंड डे 2026 कॉन्फ्रेंस कहाँ और कब होगी?
यह कॉन्फ्रेंस सोमवार, 16 जून 2026 को गोवा में आयोजित होगी। इसमें CEA, SECI, IREDA, NIWE, ग्रिड इंडिया और प्रमुख राज्य सरकारों के वरिष्ठ प्रतिनिधि भाग लेंगे।
भारत का 2030 तक पवन ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य क्या है?
भारत का लक्ष्य 2030 तक 100 गीगावाट और 2036 तक 156 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता हासिल करना है। मार्च 2026 तक स्थापित क्षमता 56.09 गीगावाट है और 28 गीगावाट का क्रियान्वयन जारी है।
भारत पवन ऊर्जा क्षमता में विश्व में किस स्थान पर है?
स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता के मामले में भारत विश्व में चौथे स्थान पर है। मार्च 2026 तक देश की कुल स्थापित पवन क्षमता 56.09 गीगावाट है, जो 2014 के 21.04 गीगावाट से 2.66 गुना अधिक है।
भारत में विंड टर्बाइन मैन्युफैक्चरिंग की स्थिति क्या है?
भारत की विंड टर्बाइन निर्माण क्षमता 2014 के 10 गीगावाट से बढ़कर मार्च 2026 तक लगभग 24 गीगावाट हो गई है। ब्लेड, टावर और गियरबॉक्स सहित प्रमुख पुर्जों में 70-80 प्रतिशत स्वदेशीकरण हासिल किया जा चुका है।
इस कॉन्फ्रेंस में कौन-सी रिपोर्ट जारी होगी और इसका महत्व क्या है?
'ग्लोबल मार्केट के लिए भारत के विंड टर्बाइन एक्सपोर्ट को बढ़ावा देना' शीर्षक से एक विशेष इंडस्ट्री रिपोर्ट जारी की जाएगी। यह रिपोर्ट भारत की निर्यात रणनीति की दिशा तय करने और वैश्विक पवन ऊर्जा बाज़ार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने में सहायक होगी।
राष्ट्र प्रेस
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