22 जुलाई 2026
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भारत की विंड एनर्जी क्षमता 57,443 मेगावाट पर पहुंची, FY2025-26 में 106 अरब यूनिट बिजली उत्पादन

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भारत की विंड एनर्जी क्षमता 57,443 मेगावाट पर पहुंची, FY2025-26 में 106 अरब यूनिट बिजली उत्पादन

सारांश

भारत की पवन ऊर्जा क्षमता 57,443 मेगावाट तक पहुंच गई है और FY2025-26 में 106 अरब यूनिट बिजली उत्पन्न हुई। GWEC रिपोर्ट 2026 में भारत वैश्विक स्तर पर चौथे स्थान पर है — ग्रीन कॉरिडोर, VGF और 100% FDI जैसी नीतियां 2030 के लक्ष्य की नींव बन रही हैं।

मुख्य बातें

भारत की विंड एनर्जी इंस्टॉल्ड क्षमता बढ़कर 57,443 मेगावाट हो गई है।
वित्त वर्ष 2025-26 में विंड एनर्जी परियोजनाओं से 106 अरब यूनिट बिजली उत्पादन हुआ।
GWEC रिपोर्ट 2026 के अनुसार भारत 31 दिसंबर 2025 तक विश्व में विंड एनर्जी इंस्टॉलेशन में चौथे स्थान पर रहा।
30 जून 2025 तक चालू परियोजनाओं को ISTS शुल्क में छूट; बाद की परियोजनाओं के लिए चरणबद्ध व्यवस्था।
इस क्षेत्र में 100% FDI ऑटोमैटिक रूट से अनुमत; ऑफशोर विंड के लिए VGF योजना लागू।
राष्ट्रीय विंड पावर रिपावरिंग एंड लाइफ एक्सटेंशन पॉलिसी 2023 के तहत पुरानी परियोजनाओं का आधुनिकीकरण जारी।

केंद्र सरकार ने 22 जुलाई 2026 को लोकसभा में जानकारी दी कि भारत में विंड एनर्जी (पवन ऊर्जा) की कुल इंस्टॉल्ड क्षमता बढ़कर 57,443 मेगावाट हो गई है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान इन परियोजनाओं से 106 अरब यूनिट बिजली का उत्पादन हुआ, जो पिछले तीन वित्त वर्षों में लगातार वृद्धि की प्रवृत्ति को दर्शाता है।

वैश्विक रैंकिंग और उत्पादन वृद्धि

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने लोकसभा में लिखित उत्तर में बताया कि ग्लोबल विंड एनर्जी काउंसिल (GWEC) की रिपोर्ट 2026 के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 तक विंड एनर्जी इंस्टॉलेशन के मामले में भारत विश्व में चौथे स्थान पर रहा। यह स्थान भारत की नवीकरणीय ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं की वैश्विक स्वीकृति का प्रमाण है।

ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन कॉरिडोर

सरकार ने विंड एनर्जी के सुचारु प्रसारण के लिए ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर स्कीम के अंतर्गत नई ट्रांसमिशन लाइनें और सब-स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं। वर्ष 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ते लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए व्यापक ट्रांसमिशन योजना तैयार की गई है। इस क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को ऑटोमैटिक रूट के तहत अनुमति दी गई है।

शुल्क छूट और नीतिगत प्रोत्साहन

30 जून 2025 तक चालू हुई सौर और विंड एनर्जी परियोजनाओं के लिए अंतरराज्यीय बिजली बिक्री पर इंटर स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम (ISTS) शुल्क में छूट दी गई है। इसके बाद शुरू होने वाली परियोजनाओं के लिए चरणबद्ध शुल्क व्यवस्था लागू की गई है। साथ ही, ग्रिड से जुड़ी सौर, विंड, विंड-सोलर हाइब्रिड और फर्म एंड डिस्पैचेबल रिन्यूएबल एनर्जी (FDRE) परियोजनाओं के लिए संशोधित मानक बोली दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।

RPO, RCO लक्ष्य और उपभोक्ता अधिकार

नवीकरणीय ऊर्जा की खपत बढ़ाने के लिए सरकार ने वर्ष 2029-30 तक रिन्यूएबल परचेज ऑब्लिगेशन (RPO) और रिन्यूएबल कंजम्प्शन ऑब्लिगेशन (RCO) के लक्ष्य निर्धारित किए हैं। ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के तहत निर्धारित उपभोक्ताओं के लिए इनका पालन अनिवार्य होगा और उल्लंघन पर जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। बिजली (उपभोक्ताओं के अधिकार) नियम, 2020 के अंतर्गत 500 किलोवाट या स्वीकृत विद्युत भार तक नेट मीटरिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।

ऑफशोर विंड और रिपावरिंग नीति

ऑफशोर विंड एनर्जी परियोजनाओं को प्रोत्साहन देने के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) योजना शुरू की गई है। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय विंड पावर प्रोजेक्ट्स रिपावरिंग एंड लाइफ एक्सटेंशन पॉलिसी 2023 लागू की गई है, जिसका उद्देश्य पुरानी पवन ऊर्जा परियोजनाओं का आधुनिकीकरण करना और उनकी संचालन अवधि बढ़ाना है। ये कदम भारत के 2030 तक के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

443 मेगावाट की इंस्टॉल्ड क्षमता और वैश्विक चौथी रैंकिंग निस्संदेह उत्साहजनक है, लेकिन असली कसौटी यह है कि क्षमता वृद्धि की यह रफ्तार 2030 के महत्वाकांक्षी नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों के अनुरूप है या नहीं। ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर और ISTS छूट जैसी नीतियां सही दिशा में हैं, परंतु ऑफशोर विंड और रिपावरिंग जैसे क्षेत्रों में क्रियान्वयन की गति अभी भी धीमी है। RPO और RCO अनुपालन की अनिवार्यता तभी सार्थक होगी जब प्रवर्तन तंत्र पारदर्शी और सुदृढ़ हो — जो अब तक एक चुनौती रही है।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत की विंड एनर्जी इंस्टॉल्ड क्षमता अभी कितनी है?
केंद्र सरकार के अनुसार, भारत में विंड एनर्जी परियोजनाओं की कुल इंस्टॉल्ड क्षमता बढ़कर 57,443 मेगावाट हो गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में इन परियोजनाओं से 106 अरब यूनिट बिजली का उत्पादन हुआ।
विश्व में विंड एनर्जी इंस्टॉलेशन के मामले में भारत का स्थान क्या है?
GWEC रिपोर्ट 2026 के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 तक विंड एनर्जी इंस्टॉलेशन में भारत विश्व में चौथे स्थान पर रहा। यह जानकारी नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने लोकसभा में दी।
ऑफशोर विंड एनर्जी के लिए सरकार ने क्या योजना बनाई है?
सरकार ने ऑफशोर विंड एनर्जी परियोजनाओं के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) योजना शुरू की है, जिससे इन परियोजनाओं की व्यावसायिक व्यवहार्यता बढ़ाई जा सके। साथ ही, ग्रिड से जुड़ी परियोजनाओं के लिए संशोधित मानक बोली दिशानिर्देश भी जारी किए गए हैं।
ISTS शुल्क छूट का लाभ किन परियोजनाओं को मिलेगा?
30 जून 2025 तक चालू हुई सौर और विंड एनर्जी परियोजनाओं को अंतरराज्यीय बिजली बिक्री पर ISTS शुल्क में पूर्ण छूट दी गई है। इसके बाद शुरू होने वाली परियोजनाओं के लिए चरणबद्ध शुल्क व्यवस्था लागू की गई है।
राष्ट्रीय विंड पावर रिपावरिंग पॉलिसी 2023 क्या है?
यह नीति पुरानी पवन ऊर्जा परियोजनाओं के आधुनिकीकरण और उनकी संचालन अवधि बढ़ाने के लिए 2023 में लागू की गई है। इसके तहत पुराने विंड टर्बाइनों को अधिक कुशल तकनीक से बदला जा सकेगा, जिससे उत्पादन क्षमता में सुधार होगा।
राष्ट्र प्रेस
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