गुजरात पवन ऊर्जा में देश का नंबर-1 राज्य: 16,086 मेगावाट क्षमता, FY26 में 33,706 MU उत्पादन
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात ने पवन ऊर्जा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 30 जून 2026 तक गुजरात की पवन ऊर्जा स्थापित क्षमता 16,086 मेगावाट तक पहुँच गई है — जो देश के किसी भी राज्य से अधिक है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य ने पवन ऊर्जा से 33,706 मिलियन यूनिट (MU) बिजली का उत्पादन किया, जो राष्ट्रीय पवन ऊर्जा उत्पादन का लगभग एक-तिहाई है।
राष्ट्रीय संदर्भ में गुजरात का योगदान
मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत की कुल पवन ऊर्जा स्थापित क्षमता 57,443 मेगावाट तक पहुँच चुकी है और वित्त वर्ष 2025-26 में राष्ट्रीय पवन ऊर्जा उत्पादन 106 अरब यूनिट रहा। इस राष्ट्रीय आँकड़े में गुजरात की हिस्सेदारी करीब 28% रही, जो राज्य की असाधारण उत्पादन क्षमता को रेखांकित करती है। गौरतलब है कि गुजरात वह राज्य है जिसने भारत में पवन ऊर्जा क्षेत्र की पहली पवन ऊर्जा नीति लागू की थी, और तब से यह राज्य इस क्षेत्र में अग्रणी बना हुआ है।
केंद्र सरकार की नीतियों की भूमिका
केंद्र सरकार ने नवीकरणीय ऊर्जा को प्रोत्साहन देने के लिए कई महत्त्वपूर्ण नीतिगत कदम उठाए हैं। ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर योजना के तहत नई ट्रांसमिशन लाइनों और सबस्टेशनों के निर्माण से नवीकरणीय ऊर्जा के कुशल परिवहन का बुनियादी ढाँचा मजबूत हुआ है। इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम (ISTS) शुल्क में दी गई राहत ने निवेश को आकर्षित किया है।
इसके अलावा, 'नेशनल रिपावरिंग एंड लाइफ एक्सटेंशन पॉलिसी फॉर विंड पावर प्रोजेक्ट्स-2023' के तहत पुरानी पवन ऊर्जा परियोजनाओं के आधुनिकीकरण को प्रोत्साहन मिला है। 'ऑफशोर विंड एनर्जी लीज रूल्स-2023' और ऑफशोर पवन परियोजनाओं के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग योजना ने समुद्री पवन ऊर्जा के विस्तार के लिए नए रास्ते खोले हैं।
राज्य सरकार की नीतियाँ और नेतृत्व
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात ने निवेशकों के अनुकूल नीतियाँ, तेज़ बुनियादी ढाँचे का विकास और प्रगतिशील नीतिगत क्रियान्वयन के ज़रिये नवीकरणीय ऊर्जा के लिए एक मज़बूत पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया है। राज्य ने पवन ऊर्जा को अपने विद्युत ग्रिड में सफलतापूर्वक एकीकृत किया है, जिससे ऊर्जा आपूर्ति की विश्वसनीयता भी बढ़ी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने 2030 तक 50% बिजली नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने में गुजरात का योगदान — पवन, सौर और रूफटॉप सोलर तीनों क्षेत्रों में — निर्णायक माना जा रहा है।
आम जनता और उद्योग पर असर
पवन ऊर्जा उत्पादन में इस वृद्धि से राज्य में बिजली की उपलब्धता बेहतर हुई है और परंपरागत ईंधन पर निर्भरता कम हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि गुजरात का यह मॉडल — नीतिगत स्थिरता, त्वरित अनुमति प्रक्रिया और ग्रिड एकीकरण — अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय उदाहरण बन सकता है।
आगे की राह
ऑफशोर पवन ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार और रिपावरिंग नीति के क्रियान्वयन से गुजरात की स्थापित क्षमता आने वाले वर्षों में और बढ़ने की संभावना है। राज्य का लक्ष्य न केवल पवन ऊर्जा, बल्कि समग्र नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में राष्ट्रीय नेतृत्व बनाए रखना है।