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गुजरात ने 2025-26 में 49.79 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन घटाया, देश में नवीकरणीय ऊर्जा में अव्वल

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गुजरात ने 2025-26 में 49.79 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन घटाया, देश में नवीकरणीय ऊर्जा में अव्वल

सारांश

गुजरात ने 2025-26 में 49.79 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन घटाकर और 67,655 मिलियन यूनिट हरित बिजली बनाकर देश में नवीकरणीय ऊर्जा का नया मानदंड स्थापित किया है। पाँच वर्षों में 179 मिलियन टन की संचयी कटौती के साथ, राज्य 2030 तक 100 गीगावाट क्षमता के लक्ष्य की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है।

मुख्य बातें

गुजरात ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 49.79 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन में कमी दर्ज की।
राज्य ने 67,655 मिलियन यूनिट हरित बिजली का उत्पादन कर नया रिकॉर्ड बनाया।
बीते पाँच वर्षों में गुजरात की संचयी कार्बन कटौती 179 मिलियन टन रही।
राज्य में वर्तमान में 52 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन; 2030 तक 100 गीगावाट का लक्ष्य।
पीएम सूर्य घर और पीएम कुसुम योजना से लाभार्थियों के बिजली बिल शून्य तक पहुँचे।
गुजरात नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में भारत का नंबर एक राज्य बना।

गुजरात ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 49.79 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन में कटौती कर और 67,655 मिलियन यूनिट हरित बिजली का उत्पादन कर नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में एक नया राष्ट्रीय कीर्तिमान स्थापित किया है। राज्य अब नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में भारत का शीर्ष राज्य बन चुका है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'क्लीन एंड ग्रीन इंडिया' विजन तथा 2070 तक 'नेट जीरो' के राष्ट्रीय लक्ष्य को साकार करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

पाँच वर्षों का संचयी प्रदर्शन

आंकड़ों के अनुसार, बीते पाँच वर्षों में गुजरात कुल 179 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में सफल रहा है — जो देश के किसी भी राज्य के लिए एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। यह ऐसे समय में आया है जब जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध वैश्विक दबाव तेज़ हो रहा है और भारत अपने अंतरराष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की दिशा में काम कर रहा है।

राज्य में वर्तमान में 52 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है। गुजरात ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (GUVNL) की प्रबंध निदेशक शालिनी अग्रवाल ने कहा, "नवीकरणीय ऊर्जा, हरित ऊर्जा और हाइड्रोजन जैसी नई-नई पहलें पूरे गुजरात में बड़े पैमाने पर लागू की जा रही हैं। इन सबके चलते गुजरात अभी पूरे भारत में नवीकरणीय ऊर्जा में पहले नंबर पर है।"

सरकारी नीतियाँ और संस्थागत प्रयास

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार ने सौर और पवन ऊर्जा के विस्तार के लिए नई ऊर्जा नीतियाँ बनाई हैं और हरित निवेश को विशेष प्रोत्साहन दिया है। इंटीग्रेटेड आर पॉलिसी – 2026 और ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी के अलावा, GUVNL, गुजरात एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (GEDA) और गुजरात पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (GPCL) जैसी संस्थाओं के समन्वित प्रयासों से राज्य 2030 तक 100 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित करने के लक्ष्य की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है।

गुजरात के ऊर्जा मंत्री ऋषिकेश पटेल ने कहा, "हरित बिजली उत्पादन की वजह से हम 2025-26 में 49.80 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन कम कर पाए हैं। हमने 67,655 मिलियन यूनिट बिजली का भी उत्पादन किया है।"

आम जनता और किसानों पर असर

पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत नागरिकों को घरों पर रूफटॉप सोलर प्लांट लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जबकि पीएम कुसुम योजना किसानों को खेतों में सोलर पंप स्थापित करने में सहायता कर रही है। इन योजनाओं से लाभार्थियों की बिजली बचत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिल रहा है।

लाभार्थी भरतभाई पढ़ियार ने बताया, "पहले मेरा बिजली बिल ₹6,000 से ₹7,000 प्रति माह आता था। सोलर सिस्टम लगवाने के बाद, जिसमें 50 प्रतिशत सब्सिडी मिली, अब घर में टीवी, पंखा, एसी और इलेक्ट्रिक व्हीकल भी चार्ज होता है — और बिजली बिल शून्य हो गया है।" किसान खलपाभाई चौधरी ने कहा कि सोलर पंप से उन्हें बिजली बिल से मुक्ति मिली है और खेतों में निरंतर पानी उपलब्ध हो रहा है।

आगे की राह

गौरतलब है कि गुजरात की यह उपलब्धि केवल एक राज्य की सफलता नहीं, बल्कि भारत की समग्र जलवायु रणनीति के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के क्षेत्र में गुजरात का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय बनता जा रहा है। 2030 तक 100 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य के साथ, राज्य की हरित यात्रा अगले चरण में प्रवेश कर रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'कार्बन उत्सर्जन में कमी' की गणना पद्धति पर स्पष्टता ज़रूरी है — यह कटौती आधारभूत (baseline) के सापेक्ष है या पूर्ण उत्सर्जन में? यह अंतर नीतिगत मूल्यांकन के लिए निर्णायक है। साथ ही, 52 गीगावाट उत्पादन क्षमता और 100 गीगावाट के 2030 लक्ष्य के बीच की खाई को पाटने के लिए ग्रिड अवसंरचना, भंडारण और अंतर-राज्यीय पारेषण में निवेश की विस्तृत रूपरेखा अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। नवीकरणीय ऊर्जा में अग्रणी होने का दावा तब और विश्वसनीय बनेगा जब राज्य का कुल ऊर्जा मिश्रण (energy mix) भी उसी अनुपात में हरित हो।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात ने 2025-26 में कितना कार्बन उत्सर्जन कम किया?
आंकड़ों के अनुसार गुजरात ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 49.79 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन में कमी दर्ज की और 67,655 मिलियन यूनिट हरित बिजली का उत्पादन किया। पाँच वर्षों की संचयी कटौती 179 मिलियन टन रही है।
गुजरात 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा में क्या लक्ष्य हासिल करना चाहता है?
राज्य 2030 तक 100 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य रखता है। वर्तमान में 52 गीगावाट उत्पादन हो रहा है और GUVNL, GEDA तथा GPCL जैसी संस्थाएँ इस दिशा में समन्वित रूप से काम कर रही हैं।
पीएम सूर्य घर और पीएम कुसुम योजना का गुजरात में क्या असर हुआ?
पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत घरों पर रूफटॉप सोलर लगाने पर 50 प्रतिशत सब्सिडी मिल रही है, जिससे कई लाभार्थियों का बिजली बिल शून्य हो गया है। पीएम कुसुम योजना से किसानों को सोलर पंप मिले हैं जिससे वे बिजली बिल से मुक्त हुए हैं और खेतों में निरंतर सिंचाई संभव हो रही है।
गुजरात नवीकरणीय ऊर्जा में भारत में पहले स्थान पर कैसे आया?
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य ने सौर और पवन ऊर्जा के विस्तार के लिए नई ऊर्जा नीतियाँ बनाईं, हरित निवेश को प्रोत्साहन दिया और इंटीग्रेटेड आर पॉलिसी-2026 तथा ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी लागू की। GUVNL की एमडी शालिनी अग्रवाल के अनुसार इन प्रयासों से गुजरात अभी पूरे भारत में नवीकरणीय ऊर्जा में पहले नंबर पर है।
गुजरात की यह उपलब्धि भारत के नेट जीरो लक्ष्य से कैसे जुड़ी है?
भारत ने 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है। गुजरात की 179 मिलियन टन की पाँच वर्षीय संचयी कार्बन कटौती और 52 गीगावाट नवीकरणीय क्षमता इस राष्ट्रीय लक्ष्य में सीधा योगदान करती है और राज्य को भारत की जलवायु रणनीति का एक अहम स्तंभ बनाती है।
राष्ट्र प्रेस
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