25 अगस्त 2026
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एलडीएफ में दरार: शिवनकुट्टी का पलटवार — गठबंधन नियम तोड़े सीपीआई ने, पिनाराई ने नहीं

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एलडीएफ में दरार: शिवनकुट्टी का पलटवार — गठबंधन नियम तोड़े सीपीआई ने, पिनाराई ने नहीं

सारांश

केरल के विपक्षी गठबंधन एलडीएफ में सीपीआई (एम) और सीपीआई के बीच दरार अब सार्वजनिक हो गई है। विपक्ष के उप नेता पद पर पिनाराई विजयन के एकतरफा फैसले पर सीपीआई के हमले के जवाब में शिवनकुट्टी ने कहा कि गठबंधन धर्म तोड़ा सीपीआई ने — और यह विवाद चुनावी हार के बाद एकजुट होने की कोशिश कर रहे एलडीएफ के लिए नई चुनौती बन गया है।

मुख्य बातें

शिवनकुट्टी ने 25 अगस्त 2026 को कहा कि गठबंधन के नियम तोड़े सीपीआई ने, न कि पिनाराई विजयन ने।
विवाद की जड़ विधानसभा में विपक्ष के उप नेता पद पर सीपीआई (एम) नेता के नामांकन को लेकर है।
सीपीआई के सहायक महासचिव सत्यम मोकेरी ने मुखपत्र 'जनयुगम' में पिनाराई पर एकतरफा फैसले का आरोप लगाया।
एलडीएफ संयोजक टीपी रामकृष्णन और सीपीआई के राज्य सचिव बिनॉय विश्वम के बीच पहले सहमति बनी थी कि विवाद गठबंधन में बाधा नहीं बनेगा।
विजयन की अध्यक्षता में एलडीएफ बैठक में आगामी स्थानीय निकाय उपचुनावों की संयुक्त तैयारी पर सहमति बनी।
शिवनकुट्टी हालिया विधानसभा चुनाव में नेमोम सीट पर BJP के राजीव चंद्रशेखर से हार चुके हैं।

केरल के विपक्षी गठबंधन लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) में सीपीआई (एम) और उसके दूसरे सबसे बड़े सहयोगी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के बीच लंबे समय से सुलगते मतभेद 25 अगस्त 2026 को खुलकर सामने आ गए, जब सीपीआई (एम) के वरिष्ठ नेता वी. शिवनकुट्टी ने सीपीआई के सहायक महासचिव सत्यम मोकेरी की आलोचना का सीधा जवाब दिया। विवाद का केंद्र विधानसभा में विपक्ष के उप नेता पद को लेकर पिनाराई विजयन के एकतरफा फैसले पर है।

मतभेद की जड़: उप नेता पद का विवाद

मामला तब शुरू हुआ जब विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने सीपीआई (एम) के किसी नेता को विपक्ष के उप नेता के रूप में विधानसभा अध्यक्ष को नामित करने का निर्णय लिया। सीपीआई ने इस कदम को एकतरफा बताते हुए आपत्ति जताई। सत्यम मोकेरी ने सीपीआई के मुखपत्र 'जनयुगम' में लिखकर विजयन पर गठबंधन धर्म और राजनीतिक नैतिकता के उल्लंघन का आरोप लगाया।

मोकेरी का तर्क था कि उप नेता का पद एक राजनीतिक प्रश्न है, जिस पर विपक्ष के नेता अकेले निर्णय नहीं ले सकते — विशेषकर तब, जब दोनों पार्टियों के बीच राष्ट्रीय नेतृत्व स्तर पर बातचीत जारी हो। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि एलडीएफ संयोजक टीपी रामकृष्णन और सीपीआई के राज्य सचिव बिनॉय विश्वम के बीच एमएन स्मारक में हुई बैठक में सहमति बनी थी कि यह विवाद गठबंधन के कामकाज में बाधा नहीं बनेगा।

शिवनकुट्टी का पलटवार

शिवनकुट्टी ने सीपीआई पर सीधे राजनीतिक मर्यादा तोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 'गठबंधन की राजनीति के नियमों के खिलाफ पिनाराई नहीं, बल्कि सीपीआई ने काम किया है।' उन्होंने 'जनयुगम' में मोकेरी की आलोचना छपने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि सीपीआई ऐसी पार्टी की तरह व्यवहार कर रही है जो एलडीएफ को मज़बूत नहीं करना चाहती।

विजयन के फैसले का बचाव करते हुए शिवनकुट्टी ने तर्क दिया कि विपक्ष के उप नेता का पद परंपरागत रूप से सीपीआई (एम) के पास ही रहा है, इसलिए मौजूदा व्यवस्था बदलने का कोई कारण नहीं था। उन्होंने इस निर्णय को पूरी तरह लोकतांत्रिक बताया।

सीपीआई का वैचारिक तर्क

मोकेरी ने अपने तर्क को वैचारिक आधार देते हुए कम्युनिस्ट नेता जॉर्जी दिमित्रोव के संयुक्त मोर्चा राजनीति के सिद्धांत का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि गठबंधन एकतरफा निर्णयों के बजाय समानता, आपसी सम्मान, विचार-विमर्श और आम सहमति पर टिके होने चाहिए। उनकी चेतावनी थी कि वामपंथी राजनीति पर किसी एक नेता की पसंद थोपने की कोशिशें न केवल एलडीएफ को कमज़ोर कर सकती हैं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और संघ परिवार को भी अप्रत्यक्ष लाभ पहुँचा सकती हैं।

गठबंधन की आंतरिक बैठक और आगे की राह

विवाद के बीच विजयन की अध्यक्षता में हुई एलडीएफ की बैठक में आगामी स्थानीय निकाय उपचुनावों की संयुक्त तैयारियों और गठबंधन के संगठनात्मक ढाँचे को मज़बूत करने पर सहमति बनी। यह ऐसे समय में हो रहा है जब विपक्षी गठबंधन चुनावी हार के बाद पुनर्गठन की कोशिश में लगा है।

गौरतलब है कि शिवनकुट्टी तिरुवनंतपुरम जिले में सीपीआई (एम) के प्रमुख चेहरों में से एक हैं और पिनाराई के पूर्व कैबिनेट सहयोगी रह चुके हैं। वे नेमोम के पूर्व विधायक भी हैं, जहाँ हालिया विधानसभा चुनाव में उन्हें BJP के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर से हार का सामना करना पड़ा था। यह घटनाक्रम एलडीएफ के भीतर उस बढ़ती बेचैनी को उजागर करता है जो चुनावी दबाव के साथ और गहरी होती जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी जॉर्जी दिमित्रोव के सिद्धांतों का हवाला देकर सीपीआई को अपने बड़े सहयोगी को याद दिलाना पड़ रहा है कि गठबंधन आम सहमति पर चलते हैं। यदि यह दरार स्थानीय निकाय उपचुनावों से पहले नहीं पटी, तो BJP इसका सबसे बड़ा राजनीतिक लाभार्थी बन सकती है।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एलडीएफ में सीपीआई और सीपीआई (एम) के बीच विवाद किस बात पर है?
विवाद केरल विधानसभा में विपक्ष के उप नेता पद को लेकर है। पिनाराई विजयन ने सीपीआई (एम) नेता को इस पद के लिए अध्यक्ष को नामित करने का एकतरफा फैसला किया, जिसे सीपीआई ने गठबंधन धर्म का उल्लंघन बताया।
शिवनकुट्टी ने सीपीआई पर क्या आरोप लगाए?
सीपीआई (एम) नेता वी. शिवनकुट्टी ने कहा कि सीपीआई ने गठबंधन की राजनीति के नियम तोड़े हैं और वह ऐसी पार्टी की तरह व्यवहार कर रही है जो एलडीएफ को मज़बूत नहीं करना चाहती। उन्होंने 'जनयुगम' में आलोचना छपने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
सत्यम मोकेरी ने पिनाराई विजयन पर क्या आपत्ति जताई?
सीपीआई के सहायक महासचिव सत्यम मोकेरी ने कहा कि उप नेता का पद राजनीतिक प्रश्न है जिस पर दोनों पार्टियों के बीच राष्ट्रीय स्तर पर बातचीत के दौरान विजयन अकेले फैसला नहीं ले सकते। उन्होंने एकतरफा घोषणा को गठबंधन की आम सहमति की भावना के विरुद्ध बताया।
इस विवाद का एलडीएफ पर क्या असर पड़ सकता है?
मोकेरी के अनुसार, किसी एक नेता की पसंद थोपने की कोशिशें एलडीएफ को कमज़ोर कर सकती हैं और BJP व संघ परिवार को फायदा पहुँचा सकती हैं। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब गठबंधन चुनावी हार के बाद पुनर्गठन की कोशिश में है।
एलडीएफ की हालिया बैठक में क्या तय हुआ?
पिनाराई विजयन की अध्यक्षता में हुई एलडीएफ बैठक में आगामी स्थानीय निकाय उपचुनावों की संयुक्त तैयारी और गठबंधन के संगठनात्मक ढाँचे को मज़बूत करने पर सहमति बनी। हालाँकि उप नेता विवाद का स्थायी समाधान अभी सामने नहीं आया है।
राष्ट्र प्रेस
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