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पवन ऊर्जा में भारत चौथा: PM मोदी ने 'मन की बात' में गिनाई रिन्यूएबल एनर्जी की ऐतिहासिक उपलब्धियां

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पवन ऊर्जा में भारत चौथा: PM मोदी ने 'मन की बात' में गिनाई रिन्यूएबल एनर्जी की ऐतिहासिक उपलब्धियां

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी ने 'मन की बात' में भारत की पवन ऊर्जा में ऐतिहासिक उपलब्धि साझा की — एक वर्ष में 6 GW क्षमता जोड़कर भारत विश्व में चौथे स्थान पर पहुंचा। गुजरात, राजस्थान, तमिलनाडु अग्रणी राज्य बने। यह उपलब्धि रोजगार, आत्मनिर्भरता और 2030 के ऊर्जा लक्ष्य की दिशा में मील का पत्थर है।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 अप्रैल को 'मन की बात' में भारत की पवन ऊर्जा उपलब्धि का जिक्र किया।
भारत ने एक वर्ष में 6 गीगावाट नई पवन ऊर्जा क्षमता स्थापित की — यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
कुल पवन ऊर्जा क्षमता में भारत अब विश्व में चौथे स्थान पर पहुंच गया है।
गुजरात (कच्छ, पाटन, बनासकांठा), तमिलनाडु, महाराष्ट्र और राजस्थान इस ऊर्जा क्रांति के अग्रणी राज्य हैं।
भारत का 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य है, जो वर्तमान गति से समय से पहले पूरा हो सकता है।
नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र 2030 तक 10 लाख से अधिक रोजगार सृजित कर सकता है।

नई दिल्ली, 26 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 26 अप्रैल को अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के नवीनतम संस्करण में नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) के क्षेत्र में भारत की ऐतिहासिक उपलब्धियों का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत ने एक वर्ष में 6 गीगावाट नई पवन ऊर्जा क्षमता स्थापित करने का मील का पत्थर हासिल किया है और पवन ऊर्जा की कुल स्थापित क्षमता में विश्व में चौथा स्थान प्राप्त किया है। प्रधानमंत्री ने इसे महज एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि राष्ट्र की सामूहिक इच्छाशक्ति और सतत भविष्य के प्रति देश की अटल प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया।

भारत की पवन ऊर्जा में ऐतिहासिक छलांग

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि भारत ने एक वर्ष के भीतर 6 गीगावाट (GW) नई पवन ऊर्जा क्षमता जोड़कर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा जगत में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसने वैश्विक स्तर पर चीन, अमेरिका और जर्मनी के बाद भारत को पवन ऊर्जा की कुल स्थापित क्षमता में चौथे स्थान पर ला खड़ा किया है।

गौरतलब है कि वर्ष 2014 में भारत की कुल पवन ऊर्जा स्थापित क्षमता लगभग 22 गीगावाट थी, जो अब बढ़कर 47 गीगावाट से अधिक हो चुकी है — यानी एक दशक में दोगुने से भी ज्यादा वृद्धि। यह प्रगति दर्शाती है कि भारत की हरित ऊर्जा नीति किस गति से जमीन पर परिणाम दे रही है।

रेगिस्तान से ऊर्जा क्रांति: गुजरात, राजस्थान अग्रणी

प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष रूप से गुजरात के रेगिस्तानी जिलों — कच्छ, पाटन और बनासकांठा — के अभूतपूर्व परिवर्तन का उल्लेख किया। ये क्षेत्र, जो कभी अपने विशाल बंजर भूभाग और भौगोलिक दुर्गमता के लिए जाने जाते थे, आज बड़े पैमाने पर सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं के केंद्र बन चुके हैं।

इसी तर्ज पर तमिलनाडु, महाराष्ट्र और राजस्थान भी इस ऊर्जा क्रांति की अगुवाई कर रहे हैं। राजस्थान का थार रेगिस्तान, जो भारत का सबसे बड़ा शुष्क क्षेत्र है, अब देश के सबसे बड़े सौर ऊर्जा पार्कों में से एक का घर है। इस भौगोलिक चुनौती को आर्थिक संपदा में बदलने की यह कहानी पूरे देश के लिए एक मिसाल बन रही है।

रोजगार और सामाजिक-आर्थिक प्रभाव

प्रधानमंत्री ने केवल पर्यावरणीय लाभों तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्होंने इन परियोजनाओं के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उनके अनुसार, पवन और सौर ऊर्जा क्षेत्र के विस्तार से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

टर्बाइन निर्माण, रखरखाव, इंजीनियरिंग, परियोजना प्रबंधन और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में लाखों युवाओं के लिए नए कौशल और करियर के रास्ते खुल रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, 2030 तक भारत का नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र देश में 10 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित कर सकता है।

वैश्विक संदर्भ और भारत की रणनीतिक स्थिति

यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब COP29 और वैश्विक जलवायु वार्ताओं में भारत पर 2070 तक नेट-जीरो लक्ष्य हासिल करने का दबाव है। भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य रखा है — और वर्तमान प्रगति दर को देखते हुए यह लक्ष्य समय से पहले हासिल होने की संभावना बन रही है।

तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो चीन प्रतिवर्ष 75-80 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा जोड़ता है, लेकिन भारत की प्रति व्यक्ति GDP और संसाधन सीमाओं को देखते हुए 6 गीगावाट पवन ऊर्जा की वार्षिक वृद्धि एक उल्लेखनीय उपलब्धि मानी जा रही है।

PM मोदी का आह्वान: स्वच्छ ऊर्जा हर नागरिक की जिम्मेदारी

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि स्वच्छ ऊर्जा को अपनाना केवल सरकार की नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परिवर्तन समाज के हर स्तर पर की गई पहलों का सामूहिक परिणाम होते हैं।

उनके शब्दों में, आज स्वच्छ ऊर्जा को प्राथमिकता देकर भारत न केवल वैश्विक पर्यावरणीय संकट का समाधान कर रहा है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत, आत्मनिर्भर और टिकाऊ ऊर्जा ढांचे की नींव भी रख रहा है।

आगे देखें तो केंद्र सरकार जल्द ही ऑफशोर विंड एनर्जी (समुद्री पवन ऊर्जा) नीति को अंतिम रूप दे सकती है, जिससे भारत की पवन ऊर्जा क्षमता में अगली बड़ी छलांग की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो वैश्विक रैंकिंग की खुशी कितनी सार्थक है? इसके साथ ही यह भी देखना होगा कि ऑफशोर विंड और ग्रीन हाइड्रोजन जैसी महत्वाकांक्षी नीतियां जमीन पर कितनी तेजी से उतरती हैं। असली परीक्षा 2030 के 500 GW लक्ष्य में नहीं, बल्कि इस ऊर्जा को आम आदमी तक सस्ते और भरोसेमंद तरीके से पहुंचाने में है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने 'मन की बात' में पवन ऊर्जा के बारे में क्या कहा?
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि भारत ने एक वर्ष में 6 गीगावाट नई पवन ऊर्जा क्षमता जोड़कर विश्व में चौथा स्थान हासिल किया है। उन्होंने इसे राष्ट्र की सामूहिक इच्छाशक्ति और सतत भविष्य के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया।
पवन ऊर्जा में भारत का विश्व में कौन सा स्थान है?
कुल स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता के मामले में भारत अब विश्व में चौथे स्थान पर है। इस सूची में चीन, अमेरिका और जर्मनी भारत से आगे हैं।
भारत में पवन ऊर्जा के अग्रणी राज्य कौन से हैं?
गुजरात, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और राजस्थान भारत में पवन ऊर्जा उत्पादन में सबसे आगे हैं। गुजरात के कच्छ, पाटन और बनासकांठा जिले विशेष रूप से बड़ी नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के केंद्र बने हैं।
भारत का 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य क्या है?
भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। वर्तमान प्रगति दर को देखते हुए विशेषज्ञ मानते हैं कि यह लक्ष्य समय से पहले हासिल हो सकता है।
नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र से भारत में रोजगार के कितने अवसर बनेंगे?
विशेषज्ञों के अनुसार 2030 तक भारत का नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र 10 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित कर सकता है। टर्बाइन निर्माण, रखरखाव, इंजीनियरिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में ग्रामीण युवाओं को सबसे अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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