2 नवंबर 2026
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वडोदरा की कलाकार शाहेना गांधी ने PM मोदी को भेंट की अगेट पत्थरों से बनी स्टैच्यू ऑफ यूनिटी कलाकृति

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वडोदरा की कलाकार शाहेना गांधी ने PM मोदी को भेंट की अगेट पत्थरों से बनी स्टैच्यू ऑफ यूनिटी कलाकृति

सारांश

वडोदरा की अगेट कलाकार शाहेना गांधी ने 40 वर्षों की साधना के बाद वह पल पाया जिसका वे इंतज़ार कर रही थीं — PM मोदी ने 'भारत पर्व 2026' में उनकी राष्ट्रीय एकता दिवस परेड व स्टैच्यू ऑफ यूनिटी दर्शाती कलाकृति स्वीकार की। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर यह कलाकार इस कला की विश्व की पहली रचयिता हैं।

मुख्य बातें

वडोदरा की कलाकार शाहेना गांधी ने 30 अक्टूबर 2026 को 'भारत पर्व 2026' के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अगेट पत्थरों से बनी विशेष कलाकृति भेंट की।
कलाकृति में राष्ट्रीय एकता दिवस परेड और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को प्राकृतिक रंगों के अगेट पत्थरों से उकेरा गया है; इसे बनाने में करीब दो सप्ताह लगे।
शाहेना गांधी पिछले 40 वर्षों से सक्रिय हैं और अब तक 500 से 600 कलाकृतियाँ बना चुकी हैं।
उनकी कलाकृतियों की कीमत ₹5,000 से ₹5 लाख तक होती है।
शाहेना गांधी को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान मिला है — वे इस अगेट कला की विश्व की पहली कलाकार हैं।
कलाकृति सेंट्रल कॉटेज इंडस्ट्री के मंच के ज़रिये प्रधानमंत्री तक पहुँची।

वडोदरा की प्रतिभाशाली कलाकार शाहेना गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अगेट (अकीक) पत्थरों से निर्मित एक दुर्लभ कलाकृति भेंट की, जिसमें राष्ट्रीय एकता दिवस की परेड और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को जीवंत रूप में उकेरा गया है। 30 अक्टूबर 2026 को 'भारत पर्व 2026' कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने शाहेना गांधी के स्टॉल का दौरा किया और इस अनूठी कलाकृति को सहर्ष स्वीकार करते हुए उनके काम की भूरि-भूरि प्रशंसा की। हज़ारों प्राकृतिक रंगों वाले अगेट पत्थरों से तैयार यह कलाकृति शाहेना गांधी को करीब दो सप्ताह की अथक मेहनत का परिणाम है।

कलाकृति में क्या है खास

इस विशेष कलाकृति में राष्ट्रीय एकता दिवस परेड का भव्य दृश्य, पार्श्व में उभरती स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और उसके इर्द-गिर्द फैला प्राकृतिक परिदृश्य दर्शाया गया है। शाहेना गांधी के अनुसार, यह कला बेहद बारीक और धैर्यसाध्य कार्य है क्योंकि अगेट पत्थरों के छोटे-छोटे टुकड़ों को अलग से रंग नहीं दिया जा सकता — केवल पत्थरों के प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जाता है। किसी भी कलाकृति को पूरा करने में लगने वाला समय उसकी डिज़ाइन की जटिलता पर निर्भर करता है।

चार दशकों की साधना

शाहेना गांधी ने बताया कि वे पिछले 40 वर्षों से अगेट पत्थरों की कला को समर्पित हैं और अब तक करीब 500 से 600 कलाकृतियाँ तैयार कर चुकी हैं। उनकी कलाकृतियों की कीमत ₹5,000 से लेकर ₹5 लाख तक होती है, जो डिज़ाइन की जटिलता और आकार पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि यह कला उन्हें ईश्वर की देन है और उन्होंने इसे कहीं से औपचारिक रूप से नहीं सीखा। परिवार का पूरा सहयोग उनकी इस यात्रा को संभव बनाता है।

PM मोदी से पहली मुलाकात और भेंट का सफर

शाहेना गांधी ने बताया कि इससे पहले उन्होंने अगेट पत्थरों से भारत का नक्शा तैयार कर प्रधानमंत्री को दिखाया था। प्रधानमंत्री ने उस कलाकृति की सराहना की, किंतु उसका बड़ा आकार होने के कारण उसे भेंट के रूप में स्वीकार नहीं कर सके। उन्होंने तब कहा था कि जब शाहेना कोई विशेष और अलग कलाकृति बनाएँगी, तभी वे उसे स्वीकार करेंगे। 2026 में सेंट्रल कॉटेज इंडस्ट्री के मंच के ज़रिये दोबारा मिलने का अवसर मिला, और इस बार राष्ट्रीय एकता दिवस परेड पर आधारित कलाकृति प्रधानमंत्री ने सहर्ष स्वीकार कर ली।

विश्व रिकॉर्ड और सम्मान

शाहेना गांधी को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान इसलिए मिला क्योंकि वे इस अनूठी अगेट कला को रचने वाली विश्व की पहली कलाकार हैं। उन्होंने बताया कि रिकॉर्ड प्रदान करने से पहले यह पुष्टि की गई थी कि दुनिया में कोई अन्य कलाकार इस तरह का कार्य नहीं करता। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा उनकी कलाकृति स्वीकार किए जाने को उन्होंने अपने और पूरे परिवार के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि बताया। यह सम्मान न केवल एक कलाकार की व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि गुजरात की समृद्ध हस्तशिल्प परंपरा को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने का प्रयास भी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारत के उन लाखों हस्तशिल्पियों की है जिनकी कला दशकों तक मुख्यधारा की नज़र से ओझल रहती है। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड जैसी मान्यता और प्रधानमंत्री स्तर पर स्वीकृति इस कला को संरक्षण और बाज़ार दोनों दिला सकती है — बशर्ते यह सुर्खी केवल एक आयोजन तक सीमित न रहे। गुजरात की अगेट शिल्प परंपरा, जो मुख्यतः खंभात क्षेत्र से जुड़ी है, वैश्विक बाज़ार में पहले से प्रतिस्पर्धा करती है; शाहेना जैसी कलाकारों को GI टैग और निर्यात सहायता जैसी नीतिगत पहलों की ज़रूरत है, न केवल मंचीय सराहना की।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शाहेना गांधी कौन हैं और उनकी कला क्या है?
शाहेना गांधी गुजरात के वडोदरा की कलाकार हैं जो पिछले 40 वर्षों से अगेट (अकीक) पत्थरों के प्राकृतिक रंगों का उपयोग करके कलाकृतियाँ बनाती हैं। वे इस विशेष अगेट कला को रचने वाली विश्व की पहली कलाकार मानी जाती हैं और उन्हें गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान मिला है।
शाहेना गांधी ने PM मोदी को क्या कलाकृति भेंट की?
शाहेना गांधी ने अगेट पत्थरों से बनी एक विशेष कलाकृति भेंट की, जिसमें राष्ट्रीय एकता दिवस की परेड, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और उसके आसपास का प्राकृतिक परिदृश्य दर्शाया गया है। इस कलाकृति को तैयार करने में उन्हें करीब दो सप्ताह का समय लगा।
यह मुलाकात कब और कहाँ हुई?
यह मुलाकात 30 अक्टूबर 2026 को 'भारत पर्व 2026' कार्यक्रम के दौरान हुई, जब प्रधानमंत्री मोदी ने शाहेना गांधी के स्टॉल का दौरा किया। यह अवसर सेंट्रल कॉटेज इंडस्ट्री के मंच के ज़रिये मिला।
अगेट पत्थर कला की विशेषता क्या है?
अगेट पत्थरों के टुकड़ों को अलग से रंग नहीं दिया जा सकता, इसलिए कलाकार को पत्थरों के प्राकृतिक रंगों से ही पूरी कलाकृति रचनी होती है। यही इस कला को अत्यंत बारीक और धैर्यसाध्य बनाता है; शाहेना गांधी की कलाकृतियों की कीमत ₹5,000 से ₹5 लाख तक होती है।
PM मोदी ने पहले शाहेना गांधी की कलाकृति क्यों स्वीकार नहीं की थी?
पहली मुलाकात में शाहेना गांधी ने अगेट पत्थरों से बना भारत का नक्शा प्रस्तुत किया था, जिसे PM मोदी ने सराहा, लेकिन बड़े आकार के कारण भेंट के रूप में स्वीकार नहीं कर सके। उन्होंने तब कहा था कि जब वे कोई विशेष और नई कलाकृति बनाएँगी, तब वे उसे अवश्य स्वीकार करेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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