राष्ट्रीय हथकरघा दिवस: गुजरात के बुनकर चमन सिजू ने सुनाई PM मोदी की ऑर्गेनिक कॉटन डिप्लोमेसी की कहानी
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर 7 अगस्त को गुजरात के हथकरघा कारीगर चमन सिजू ने एक यादगार किस्सा साझा किया — जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे गांधीनगर में आयोजित एक टेक्सटाइल प्रदर्शनी के दौरान ऑर्गेनिक कॉटन उत्पाद बनाने का अनुरोध किया था, ताकि उन्हें दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्षों को उपहार में दिया जा सके। सिजू के इस अनुभव ने भारत की हैंडलूम विरासत और वैश्विक कूटनीति के अनूठे संगम को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
गांधीनगर प्रदर्शनी में हुई थी ऐतिहासिक बातचीत
चमन सिजू ने बताया कि गांधीनगर में छोटे बुनकरों के लिए आयोजित एक टेक्सटाइल प्रदर्शनी में उन्हें प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करने का अवसर मिला। सिजू के अनुसार, "मैं उनके विचारों से बहुत प्रभावित हुआ। उन्होंने मुझसे ऑर्गेनिक कॉटन के ऐसे उत्पाद बनाने को कहा जिन्हें वे दुनिया भर के नेताओं को उपहार में दे सकें।"
प्रधानमंत्री ने कहा था कि इससे दो उद्देश्य पूरे होंगे — पहला, दुनिया को भारत की कला और संस्कृति से परिचय होगा, और दूसरा, इन उत्पादों की स्वाभाविक मार्केटिंग भी हो जाएगी। यह बातचीत एक छोटे से कारीगर के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं थी।
शिंजो आबे को मिला था ऑर्गेनिक कॉटन स्टोल
सिजू ने आगे बताया कि प्रधानमंत्री के अनुरोध पर उन्हें नई दिल्ली भी बुलाया गया, जहाँ वे ऑर्गेनिक काले कॉटन से बने स्टोल लेकर गए और वे PMO को सौंपे। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी ने उन काले स्टोलों में से एक जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे को उपहार में दिया था।"
सिजू के अनुसार, प्रधानमंत्री ने बाद में बताया कि उस ऑर्गेनिक कॉटन स्टोल को लेकर आबे के साथ लंबी चर्चा हुई थी। उल्लेखनीय है कि शिंजो आबे ने भारत की एक बाद की यात्रा के दौरान वह स्टोल पहना भी था — जो भारतीय हस्तशिल्प की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रतीक बन गया। सिजू ने कहा, "अब, प्रधानमंत्री मोदी जहाँ भी जाते हैं, हमारे ऑर्गेनिक कॉटन के कपड़े उपहार में देते हैं।"
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर PM मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर देशवासियों को बधाई दी और भारत की समृद्ध हैंडलूम विरासत को संजोने वाले पीढ़ियों के बुनकरों और कारीगरों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इससे एक दिन पहले उन्होंने नागरिकों — विशेषकर युवाओं — से अपील की थी कि वे इस दिवस को उसी उत्साह से मनाएं जैसे फ्रेंडशिप डे मनाया जाता है।
प्रधानमंत्री ने कहा था, "जैसे आपने फ्रेंडशिप डे बहुत उत्साह के साथ मनाया, वैसे ही हैंडलूम दिवस भी मनाएं। हैंडलूम दिवस मनाने का मतलब है उन बुनकर परिवारों की आजीविका का समर्थन करना जो हाथ से कपड़े बनाते हैं।" यह अपील ऐसे समय में आई जब हस्तशिल्प क्षेत्र औद्योगिक उत्पादन से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है।
हैंडलूम कूटनीति का व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने 'गेट रेडी विद मी' इंस्टाग्राम रील के ज़रिये भी भारतीय हैंडलूम परिधानों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया था। 'मोदी स्टोरी' सोशल मीडिया हैंडल ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि "ट्रेंडिंग रील्स से लेकर ग्लोबल डिप्लोमेसी तक, प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के हैंडलूम को दुनिया तक पहुँचाने के लिए लगातार नए तरीके खोजे हैं।" यह पहल छोटे बुनकरों को एक ऐसा बाज़ार उपलब्ध कराती है जो पारंपरिक व्यापारिक मार्गों से कहीं परे है।
आगे की राह
चमन सिजू जैसे कारीगरों की कहानियाँ यह दर्शाती हैं कि कूटनीतिक उपहार परंपरा किस तरह ज़मीनी स्तर के शिल्पकारों की आजीविका से सीधे जुड़ सकती है। हथकरघा क्षेत्र को दीर्घकालिक प्रोत्साहन के लिए इस तरह की पहलों को नीतिगत समर्थन से जोड़ना आवश्यक होगा, ताकि यह विरासत अगली पीढ़ी तक जीवंत रूप में पहुँच सके।