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राष्ट्रीय हथकरघा दिवस: गुजरात के बुनकर चमन सिजू ने सुनाई PM मोदी की ऑर्गेनिक कॉटन डिप्लोमेसी की कहानी

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राष्ट्रीय हथकरघा दिवस: गुजरात के बुनकर चमन सिजू ने सुनाई PM मोदी की ऑर्गेनिक कॉटन डिप्लोमेसी की कहानी

सारांश

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर गुजरात के बुनकर चमन सिजू की कहानी सामने आई — जब PM मोदी ने उनसे ऑर्गेनिक कॉटन स्टोल बनवाए और जापान के पूर्व PM शिंजो आबे को तोहफे में दिए। एक छोटे कारीगर की कला कैसे वैश्विक कूटनीति का हिस्सा बनी, यह उसकी असली कहानी है।

मुख्य बातें

7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर गुजरात के कारीगर चमन सिजू ने PM मोदी के साथ अपनी बातचीत साझा की।
गांधीनगर टेक्सटाइल प्रदर्शनी में PM मोदी ने सिजू से ऑर्गेनिक कॉटन उत्पाद बनाने का अनुरोध किया था, जो विश्व नेताओं को उपहार में दिए जा सकें।
ऑर्गेनिक काले कॉटन से बना एक स्टोल जापान के तत्कालीन PM शिंजो आबे को उपहार में दिया गया, जिसे उन्होंने भारत यात्रा के दौरान पहना भी था।
PM मोदी ने नागरिकों से अपील की कि हैंडलूम दिवस को फ्रेंडशिप डे जैसे उत्साह से मनाएं और बुनकर परिवारों की आजीविका का समर्थन करें।
PM मोदी की 'गेट रेडी विद मी' इंस्टाग्राम रील के अगले दिन यह कहानी एक्स पर 'मोदी स्टोरी' हैंडल से पोस्ट की गई।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर 7 अगस्त को गुजरात के हथकरघा कारीगर चमन सिजू ने एक यादगार किस्सा साझा किया — जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे गांधीनगर में आयोजित एक टेक्सटाइल प्रदर्शनी के दौरान ऑर्गेनिक कॉटन उत्पाद बनाने का अनुरोध किया था, ताकि उन्हें दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्षों को उपहार में दिया जा सके। सिजू के इस अनुभव ने भारत की हैंडलूम विरासत और वैश्विक कूटनीति के अनूठे संगम को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

गांधीनगर प्रदर्शनी में हुई थी ऐतिहासिक बातचीत

चमन सिजू ने बताया कि गांधीनगर में छोटे बुनकरों के लिए आयोजित एक टेक्सटाइल प्रदर्शनी में उन्हें प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करने का अवसर मिला। सिजू के अनुसार, "मैं उनके विचारों से बहुत प्रभावित हुआ। उन्होंने मुझसे ऑर्गेनिक कॉटन के ऐसे उत्पाद बनाने को कहा जिन्हें वे दुनिया भर के नेताओं को उपहार में दे सकें।"

प्रधानमंत्री ने कहा था कि इससे दो उद्देश्य पूरे होंगे — पहला, दुनिया को भारत की कला और संस्कृति से परिचय होगा, और दूसरा, इन उत्पादों की स्वाभाविक मार्केटिंग भी हो जाएगी। यह बातचीत एक छोटे से कारीगर के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं थी।

शिंजो आबे को मिला था ऑर्गेनिक कॉटन स्टोल

सिजू ने आगे बताया कि प्रधानमंत्री के अनुरोध पर उन्हें नई दिल्ली भी बुलाया गया, जहाँ वे ऑर्गेनिक काले कॉटन से बने स्टोल लेकर गए और वे PMO को सौंपे। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी ने उन काले स्टोलों में से एक जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे को उपहार में दिया था।"

सिजू के अनुसार, प्रधानमंत्री ने बाद में बताया कि उस ऑर्गेनिक कॉटन स्टोल को लेकर आबे के साथ लंबी चर्चा हुई थी। उल्लेखनीय है कि शिंजो आबे ने भारत की एक बाद की यात्रा के दौरान वह स्टोल पहना भी था — जो भारतीय हस्तशिल्प की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रतीक बन गया। सिजू ने कहा, "अब, प्रधानमंत्री मोदी जहाँ भी जाते हैं, हमारे ऑर्गेनिक कॉटन के कपड़े उपहार में देते हैं।"

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर PM मोदी का संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर देशवासियों को बधाई दी और भारत की समृद्ध हैंडलूम विरासत को संजोने वाले पीढ़ियों के बुनकरों और कारीगरों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इससे एक दिन पहले उन्होंने नागरिकों — विशेषकर युवाओं — से अपील की थी कि वे इस दिवस को उसी उत्साह से मनाएं जैसे फ्रेंडशिप डे मनाया जाता है।

प्रधानमंत्री ने कहा था, "जैसे आपने फ्रेंडशिप डे बहुत उत्साह के साथ मनाया, वैसे ही हैंडलूम दिवस भी मनाएं। हैंडलूम दिवस मनाने का मतलब है उन बुनकर परिवारों की आजीविका का समर्थन करना जो हाथ से कपड़े बनाते हैं।" यह अपील ऐसे समय में आई जब हस्तशिल्प क्षेत्र औद्योगिक उत्पादन से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है।

हैंडलूम कूटनीति का व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने 'गेट रेडी विद मी' इंस्टाग्राम रील के ज़रिये भी भारतीय हैंडलूम परिधानों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया था। 'मोदी स्टोरी' सोशल मीडिया हैंडल ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि "ट्रेंडिंग रील्स से लेकर ग्लोबल डिप्लोमेसी तक, प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के हैंडलूम को दुनिया तक पहुँचाने के लिए लगातार नए तरीके खोजे हैं।" यह पहल छोटे बुनकरों को एक ऐसा बाज़ार उपलब्ध कराती है जो पारंपरिक व्यापारिक मार्गों से कहीं परे है।

आगे की राह

चमन सिजू जैसे कारीगरों की कहानियाँ यह दर्शाती हैं कि कूटनीतिक उपहार परंपरा किस तरह ज़मीनी स्तर के शिल्पकारों की आजीविका से सीधे जुड़ सकती है। हथकरघा क्षेत्र को दीर्घकालिक प्रोत्साहन के लिए इस तरह की पहलों को नीतिगत समर्थन से जोड़ना आवश्यक होगा, ताकि यह विरासत अगली पीढ़ी तक जीवंत रूप में पहुँच सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन व्यापक नीतिगत सवाल यह है कि क्या व्यक्तिगत कूटनीतिक पहल हथकरघा क्षेत्र की संरचनात्मक चुनौतियों का समाधान कर सकती है। भारत के हैंडलूम उद्योग में लाखों बुनकर हैं, जिनमें से अधिकांश अभी भी कम आय और बाज़ार तक सीमित पहुँच से जूझ रहे हैं। एक कारीगर की सफलता की कहानी को नीतिगत उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करने और वास्तविक क्षेत्रीय सुधार के बीच का फ़र्क महत्वपूर्ण है। सांस्कृतिक कूटनीति और जीवंत शिल्प परंपरा के बीच की यह खाई तब तक नहीं पटेगी, जब तक हैंडलूम को सरकारी खरीद और निर्यात नीति में ठोस प्राथमिकता न मिले।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चमन सिजू कौन हैं और उनकी PM मोदी से मुलाकात कैसे हुई?
चमन सिजू गुजरात के एक हथकरघा कारीगर हैं जो ऑर्गेनिक कॉटन उत्पाद बनाते हैं। गांधीनगर में छोटे बुनकरों के लिए आयोजित एक टेक्सटाइल प्रदर्शनी के दौरान उन्हें PM मोदी का स्वागत करने का अवसर मिला, जहाँ प्रधानमंत्री ने उनसे ऑर्गेनिक कॉटन उत्पाद बनाने का अनुरोध किया।
PM मोदी ने चमन सिजू से ऑर्गेनिक कॉटन उत्पाद बनाने को क्यों कहा?
PM मोदी ने कहा कि ऑर्गेनिक कॉटन उत्पादों को विश्व नेताओं को उपहार में देने से दो उद्देश्य पूरे होंगे — दुनिया को भारत की कला और संस्कृति की जानकारी मिलेगी, और इन उत्पादों की स्वाभाविक मार्केटिंग भी होगी। यह भारतीय हस्तशिल्प को वैश्विक कूटनीति से जोड़ने की एक अनूठी पहल थी।
शिंजो आबे को कौन सा उपहार दिया गया था?
सिजू के अनुसार, PM मोदी ने जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे को ऑर्गेनिक काले कॉटन से बना एक स्टोल उपहार में दिया था। आबे ने इस स्टोल को बाद में भारत यात्रा के दौरान पहना भी था, और दोनों नेताओं के बीच इस स्टोल को लेकर लंबी चर्चा भी हुई थी।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस प्रत्येक वर्ष 7 अगस्त को मनाया जाता है। यह दिन भारत के हथकरघा बुनकरों और कारीगरों को सम्मान देने और देश की समृद्ध हैंडलूम विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए समर्पित है।
PM मोदी ने इस वर्ष हथकरघा दिवस पर क्या अपील की?
PM मोदी ने नागरिकों, विशेषकर युवाओं से अपील की कि वे राष्ट्रीय हथकरघा दिवस को उसी उत्साह से मनाएं जैसे फ्रेंडशिप डे मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि हैंडलूम दिवस मनाने का अर्थ है उन बुनकर परिवारों की आजीविका का समर्थन करना जो हाथ से कपड़े बनाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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