राष्ट्रीय हथकरघा दिवस: जयपुर सांसद मंजू शर्मा ने खादी खरीदकर दिया 'वोकल फॉर लोकल' का संदेश
सारांश
मुख्य बातें
जयपुर की सांसद मंजू शर्मा ने 7 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर नई दिल्ली के खड़क सिंह मार्ग स्थित हैंडलूम हाउस का दौरा किया और खादी तथा हथकरघा उत्पाद खरीदकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'वोकल फॉर लोकल' और 'आत्मनिर्भर भारत' के विजन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। इस दौरे में उन्होंने अपने और परिवार के सदस्यों के लिए खादी के वस्त्र सहित ग्रामोद्योग क्षेत्र के कई उत्पाद खरीदे।
हथकरघा परंपरा को सांसद का समर्थन
सांसद मंजू शर्मा ने कहा कि भारत की हथकरघा परंपरा महज कपड़ों की कारीगरी नहीं, बल्कि देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, आत्मनिर्भरता और लाखों कारीगरों के समर्पण का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा, 'खादी का हर धागा स्वदेशी की भावना, आत्म-सम्मान और आत्मनिर्भर भारत की झलक दिखाता है।'
उन्होंने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी की अपील का उल्लेख करते हुए कहा कि नागरिकों को हथकरघा और खादी उत्पाद खरीदने की कोशिश करनी चाहिए। यह अपील केवल खरीदारी तक सीमित नहीं है — यह देश भर के लाखों बुनकर परिवारों की आजीविका, सम्मान और आर्थिक भलाई से सीधे जुड़ी है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर
शर्मा ने कहा कि यदि हर घर साल में कुछ अवसरों पर भी खादी और हथकरघा उत्पादों को अपनाता है, तो इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बड़ा बढ़ावा मिलेगा और भारत के पारंपरिक उद्योगों को मजबूती मिलेगी। गौरतलब है कि हथकरघा क्षेत्र भारत में कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा रोज़गार प्रदाता माना जाता है, और लाखों बुनकर परिवार इस पर निर्भर हैं।
अंतरराष्ट्रीय पहचान और गुणवत्ता
भारतीय हथकरघा उत्पादों को वैश्विक बाज़ारों में मिल रही पहचान का उल्लेख करते हुए सांसद शर्मा ने कहा कि इनकी बेहतरीन गुणवत्ता, प्राकृतिक कपड़े और पारंपरिक कारीगरी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को एक अलग पहचान दिलाई है। यह ऐसे समय में आया है जब 'मेड इन इंडिया' उत्पादों की वैश्विक माँग बढ़ रही है।
नागरिकों से अपील
सांसद ने हर भारतीय से स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने और 'वोकल फॉर लोकल' अभियान को देशव्यापी आंदोलन बनाने में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने नागरिकों से त्योहारों, पारिवारिक समारोहों और दैनिक जीवन में खादी व हथकरघा उत्पादों को शामिल करने का आग्रह किया।
शर्मा ने कहा, 'आत्मनिर्भर भारत का सपना तभी सच हो सकता है, जब हर नागरिक सोच-समझकर खरीदारी करके देश के बुनकरों, कारीगरों और स्थानीय उद्योगों को मजबूत बनाए।' उनकी यह पहल आने वाले त्योहारी सीज़न से पहले खादी उत्पादों की माँग बढ़ाने की दिशा में एक प्रतीकात्मक कदम मानी जा रही है।