अरविंद सावंत का BJP को जवाब: 'मिमिक्री व्यंग्य की कला है, माफी की ज़रूरत नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने 21 सितंबर 2026 को मुंबई में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की उस माँग को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में हुई प्रधानमंत्री की मिमिक्री पर माफी माँगने की बात कही गई थी। सावंत ने कहा कि मिमिक्री राहुल गांधी ने स्वयं नहीं की थी और यह सब कला एवं राजनीतिक व्यंग्य का अभिन्न हिस्सा है।
मिमिक्री विवाद और सावंत का पक्ष
सावंत ने BJP की माफी माँगने की माँग को निराधार बताते हुए कहा कि राजनीतिक व्यंग्य समाज को आत्मचिंतन का अवसर देता है। उन्होंने राज ठाकरे और बाला साहेब ठाकरे के उदाहरण सामने रखते हुए तर्क दिया कि नेताओं की मिमिक्री और उन पर कटाक्ष की परंपरा भारतीय राजनीति में पहले से रही है।
सावंत ने BJP पर पलटवार करते हुए कहा कि जब विपक्षी नेताओं के लिए 'पप्पू', 'दीदी ओ दीदी' जैसी टिप्पणियाँ की जाती थीं, तब भी यह राजनीतिक व्यंग्य ही था। उनके अनुसार, किसी मिमिक्री पर नाराज़ होने के बजाय उसमें छिपे राजनीतिक संदेश को समझना ज़्यादा ज़रूरी है।
आईआईटी बॉम्बे छात्र की मौत पर रुख
आईआईटी बॉम्बे के एक छात्र की आत्महत्या के मामले पर सावंत ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। उनका मानना है कि बिना विस्तृत जाँच के किसी भी व्यक्ति पर आरोप लगाना उचित नहीं होगा। उन्होंने आग्रह किया कि मामले में सीबीआई या एसआईटी — जो भी उपयुक्त एजेंसी हो — से जाँच कराई जाए और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई हो।
चुनाव आयोग और पार्टी चिह्न विवाद
सावंत ने चुनाव आयोग (ECI) पर सत्ता पक्ष के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि शिवसेना के चुनाव चिह्न और नाम से जुड़े विवाद में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष कई महत्वपूर्ण तर्क प्रस्तुत किए हैं। सावंत ने कहा कि उन्हें न्याय की उम्मीद सर्वोच्च न्यायालय से है।
सामाजिक मुद्दों पर कड़ा रुख
गरबा उत्सव में मुस्लिमों के प्रवेश पर BJP विधायक की कथित शर्त पर सावंत ने कड़ा एतराज़ जताया। उन्होंने सवाल किया कि किसी व्यक्ति को यह तय करने का अधिकार किसने दिया कि कौन तिलक लगाएगा या आरती करेगा? उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय से ऐसी टिप्पणियों का स्वतः संज्ञान लेने की माँग की।
पश्चिम बंगाल की राजनीति पर सावंत ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी को 'हिम्मत वाली नेता' बताते हुए उनका समर्थन किया और BJP पर राज्य में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमज़ोर करने का आरोप लगाया।
भाषा विवाद पर सावंत ने कहा कि मातृभाषा पर गर्व स्वाभाविक है, किंतु इसके लिए किसी अन्य भाषा का तिरस्कार नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में भाषा या धर्म के आधार पर नफरत फैलाने वाली बातों को रोका जाना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर भाषा नीति और सामाजिक सौहार्द को लेकर बहस तेज़ है।