21 सितंबर 2026
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राहुल गांधी पर BJP का पलटवार: 'मोदी मिमिक्री विवाद' में प्रतुल शाह देव बोले — '21वीं सदी के डॉन क्विक्सोट'

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राहुल गांधी पर BJP का पलटवार: 'मोदी मिमिक्री विवाद' में प्रतुल शाह देव बोले — '21वीं सदी के डॉन क्विक्सोट'

सारांश

कांग्रेस के कार्यक्रम में PM मोदी की मिमिक्री ने बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा किया। BJP ने इसे दिवंगत माँ के अपमान से जोड़ा, प्रतुल शाह देव ने राहुल को '21वीं सदी का डॉन क्विक्सोट' कहा। JMM ने BJP के आरोपों को गलत नैरेटिव बताते हुए केंद्र की विदेश नीति पर सवाल उठाए।

मुख्य बातें

कांग्रेस के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में PM मोदी की मिमिक्री पर राजनीतिक विवाद 21 सितंबर 2026 को तेज हुआ।
BJP नेता प्रतुल शाह देव ने राहुल गांधी को ' 21वीं सदी का डॉन क्विक्सोट ' और 'टाइटैनिक का कप्तान' कहकर तंज किया।
BJP सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा — राहुल ने खुद को देश में एक ऐसे कॉमेडियन के रूप में स्थापित कर लिया जो जनता के आँसू नहीं पोंछ सकता।
JMM प्रवक्ता मनोज पांडे ने BJP के आरोपों को 'गलत परसेप्शन' बताते हुए खारिज किया; कहा — प्रधानमंत्री की माँ को कहीं टारगेट नहीं किया गया।
पांडे ने केंद्र की विदेश नीति पर भी हमला किया — अमेरिका का लगातार टैरिफ लगाना, विदेशी निवेश घटना और विदेशी कर्ज बढ़ने का जिक्र किया।

कांग्रेस के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री किए जाने को लेकर 21 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय राजनीति में तीखी बहस छिड़ गई। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस घटना को प्रधानमंत्री की दिवंगत माँ के अपमान से जोड़ते हुए कांग्रेस और राहुल गांधी पर जोरदार हमला किया, जबकि झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने BJP के इस आरोप को 'गलत नैरेटिव' करार दिया।

BJP का तीखा हमला

दिल्ली में BJP सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने राहुल गांधी पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी को सोचना चाहिए कि क्या उनके लिए यह उचित है। कल उनकी माता सोनिया गांधी के लिए यदि कोई टिप्पणी करेगा तो क्या वो उचित होगा? यह निर्णय राहुल गांधी को लेना चाहिए था, लेकिन अफसोस की बात है कि निर्णय लेने में वह फेल हो गए और उस कॉमेडियन के साथ खुद को भी एक ऐसे कॉमेडियन के रूप में स्थापित कर लिया जो जनता को केवल मजे दे सकता है, लेकिन जनता के आँसू नहीं पोंछ सकता।'

प्रतुल शाह देव का 'डॉन क्विक्सोट' वाला तंज

रांची में BJP नेता प्रतुल शाह देव ने राहुल गांधी की तुलना स्पेनिश साहित्य के काल्पनिक पात्र डॉन क्विक्सोट से की। उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी 21वीं सदी के डॉन क्विक्सोट हैं। जिस तरह डॉन क्विक्सोट निकलते थे और आखिर में अपना ही मजाक बनवा बैठते थे, राहुल भी वैसा ही करते हैं। वह टाइटैनिक के उस कप्तान की तरह हैं जो आइसबर्ग ढूंढता है और जान-बूझकर उससे टकरा जाता है।'

शाह देव ने आगे कहा, 'प्रधानमंत्री का मजाक उड़ाते-उड़ाते उन्होंने देश की माताओं का ही मजाक बना दिया है। अगर प्रधानमंत्री किसी बुजुर्ग महिला को कुर्सी दे रहे हैं, तो राहुल गांधी को इसमें मजाक की क्या बात दिखती है? वह भारतीय राजनीति के सबसे बड़े पॉलिटिकल जोकर हैं — उनसे बड़ा कोई नहीं है और जब तक वह कांग्रेस में हैं, हमारे लिए चीजें आसान हैं।'

JMM का पलटवार — 'गलत परसेप्शन न फैलाएँ'

रांची में JMM प्रवक्ता मनोज पांडे ने BJP के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने सवाल उठाया, 'प्रधानमंत्री की माँ को कहाँ टारगेट किया गया? जरा यह बताने का कष्ट किया जाए। एक गलत परसेप्शन क्रिएट न किया जाए। प्रधानमंत्री की माँ का कहीं जिक्र नहीं है, कोई टारगेट नहीं किया गया। ऐसा होता तो सबसे पहले निंदा हम लोग करते। व्यंग्य और हास्य के माध्यम से एक विषय पर बहुत गंभीर टिप्पणी की गई।'

पांडे ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर भी सवाल उठाते हुए कहा, 'गले लगना या चॉकलेट खिलाना विदेश नीति नहीं हो सकती। अमेरिका लगातार हम पर टैरिफ लगा रहा है, हम सस्ते तेल खरीद नहीं पा रहे, विदेशी निवेशक गायब हो रहे हैं और विदेशी कर्ज बढ़ता जा रहा है। संसद के अंदर हम लोगों ने देखा है — कैसे प्रधानमंत्री खुद मिमिक्री करते थे।'

महिलाओं की गरिमा के मुद्दे पर BJP और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर पलटवार करते हुए पांडे ने कहा कि इसी संदर्भ में कुलदीप सेंगर, बृजभूषण शरण सिंह और स्वामी चिन्मयानंद के मामलों की भी चर्चा होनी चाहिए।

डॉन क्विक्सोट कौन थे?

शाह देव ने जिस डॉन क्विक्सोट का जिक्र किया, वह स्पेनिश साहित्य का एक प्रसिद्ध काल्पनिक पात्र है — ऐसे व्यक्ति का प्रतीक जो कल्पना और वास्तविकता में फर्क नहीं कर पाता। अलोंसो किहानो नाम का एक स्पेनिश कुलीन व्यक्ति वीर योद्धाओं की कहानियाँ पढ़-पढ़कर खुद को शूरवीर समझने लगा, उसने अपना नाम बदलकर डॉन क्विक्सोट रख लिया और दुनिया में न्याय स्थापित करने निकल पड़ा — लेकिन अपने कार्यों की वजह से उपहास का पात्र बना।

विवाद की आगे की दिशा

यह ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस छात्र-केंद्रित कार्यक्रमों के जरिए अपनी राजनीतिक पहुँच बढ़ाने की कोशिश में है। गौरतलब है कि मिमिक्री और व्यंग्य को राजनीतिक अभिव्यक्ति का हिस्सा मानने और उसे 'अपमान' करार देने के बीच की यह बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है, खासकर जब दोनों प्रमुख दलों की ओर से व्याख्याएँ परस्पर विरोधी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह सिर्फ बचाव नहीं था — विदेश नीति, टैरिफ और महिला सुरक्षा पर उठाए गए सवाल कहीं अधिक ठोस राजनीतिक ज़मीन पर खड़े हैं। 'डॉन क्विक्सोट' वाला बिंब तीखा ज़रूर है, लेकिन यह सत्तारूढ़ दल की उस बेचैनी को भी उजागर करता है जो व्यंग्य और हास्य को राजनीतिक खतरे के रूप में देखती है। असली सवाल यह है कि लोकतंत्र में कार्टून, मिमिक्री और व्यंग्य की सीमा कौन तय करेगा?
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कांग्रेस के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में क्या हुआ था?
कांग्रेस के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री की गई, जिसे BJP ने प्रधानमंत्री की दिवंगत माँ के अपमान से जोड़ा। इस पर BJP और JMM के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई।
प्रतुल शाह देव ने राहुल गांधी को 'डॉन क्विक्सोट' क्यों कहा?
BJP नेता प्रतुल शाह देव ने कहा कि जिस तरह डॉन क्विक्सोट कल्पना और वास्तविकता में फर्क नहीं कर पाते और अंततः खुद उपहास के पात्र बनते हैं, राहुल गांधी भी वैसा ही करते हैं। यह तुलना राहुल की राजनीतिक समझ पर तंज के रूप में की गई थी।
JMM ने BJP के आरोपों पर क्या कहा?
JMM प्रवक्ता मनोज पांडे ने BJP के आरोपों को 'गलत परसेप्शन' बताकर खारिज किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की माँ को कहीं टारगेट नहीं किया गया और हास्य-व्यंग्य के जरिए गंभीर मुद्दों पर टिप्पणी की गई थी।
मनोज पांडे ने केंद्र की विदेश नीति पर क्या आरोप लगाए?
JMM प्रवक्ता मनोज पांडे ने कहा कि केंद्र सरकार विदेश नीति में नाकाम है — अमेरिका लगातार टैरिफ लगा रहा है, सस्ता तेल नहीं मिल रहा, विदेशी निवेशक दूर हो रहे हैं और विदेशी कर्ज बढ़ रहा है।
डॉन क्विक्सोट कौन था और यह नाम क्यों प्रचलित है?
डॉन क्विक्सोट स्पेनिश साहित्य का एक प्रसिद्ध काल्पनिक पात्र है जो अलोंसो किहानो नाम के एक कुलीन व्यक्ति की कहानी पर आधारित है। वह वीर योद्धाओं की किताबें पढ़-पढ़कर खुद को शूरवीर मान बैठा, नाम बदलकर 'डॉन क्विक्सोट' रख लिया और न्याय के लिए निकला — लेकिन अपने अव्यावहारिक कार्यों के कारण उपहास का पात्र बना। यह नाम अब ऐसे व्यक्ति के लिए प्रयुक्त होता है जो कल्पना और वास्तविकता में भेद नहीं कर पाता।
राष्ट्र प्रेस
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