राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर PM मोदी की अपील से पानीपत, वाराणसी, भागलपुर के बुनकरों में नई उम्मीद
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर देशवासियों से हैंडलूम उत्पाद अपनाने की अपील की और उन बुनकरों व कारीगरों को नमन किया जिन्होंने पीढ़ियों से भारत की पारंपरिक शिल्पकला को जीवित रखा है। प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद पानीपत, वाराणसी और भागलपुर के हैंडलूम कारोबारियों और बुनकरों में उत्साह की लहर देखी जा रही है, और बिक्री बढ़ने की प्रबल उम्मीद जताई जा रही है।
पानीपत: कारोबारियों ने दी 50% छूट, चीन से निर्यात तक का सफर
पानीपत के हैंडलूम कारोबारी अनुज गोयल ने कहा, 'हैंडलूम कारोबारियों की ओर से पीएम मोदी को धन्यवाद। उन्होंने एक दिन हमारे नाम भी कर दिया है। हमने इस मौके पर देशवासियों के लिए एक छोटा सा ऑफर निकाला है। हमारे बाजार और एसोसिएशन से जुड़ी दुकानों पर खरीदारी करने पर 50 प्रतिशत की छूट दी जा रही है।'
गोयल ने बताया कि रक्षाबंधन से पहले वैसे भी बिक्री में तेजी आती है, और ऐसे में प्रधानमंत्री का यह आह्वान उनके लिए 'सोने पर सुहागा' है। उन्होंने यह भी बताया कि पहले वे चीन से सामान आयात करते थे, लेकिन अब सरकार के प्रोत्साहन के बाद वे निर्यात भी करने लगे हैं — यह उनके कारोबार में आए सकारात्मक बदलाव का सबसे बड़ा प्रमाण है। उन्होंने देश में स्किल सेंटर स्थापित करने की आवश्यकता भी जताई, ताकि कारीगरों के कौशल और उत्पादों की गुणवत्ता में और सुधार हो सके।
वाराणसी के बुनकरों की उम्मीद: मांग बढ़ेगी, सभी को होगा फायदा
वाराणसी के बुनकरों का कहना है कि जब प्रधानमंत्री स्वयं किसी व्यवसाय के लिए अपील करते हैं, तो उसका सकारात्मक असर पड़ना स्वाभाविक है। बुनकरों के अनुसार इससे छोटे से लेकर बड़े — सभी कारीगरों और कारोबारियों को लाभ मिलेगा।
एक बुनकर ने बताया कि बाजार में बढ़ती मांग को पूरा करना अपने आप में एक चुनौती होती है, लेकिन जिस तरह सरकार इस क्षेत्र में रुचि ले रही है, उससे उन्हें देश-विदेश में पहचान मिलने और खुदरा कारोबार में आगे बढ़ने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पहले हाथ से साड़ी बनाने में काफी समय लगता था, लेकिन अब मशीनों के आने से उत्पादन पर असर पड़ा है — यह क्षेत्र के सामने एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
भागलपुर में रैंप वॉक: युवाओं ने किया हथकरघा सिल्क का प्रदर्शन
भागलपुर में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर बुनकर सेवा केंद्र ने एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज के छात्रों ने हथकरघा सिल्क के परिधान पहनकर रैंप वॉक किया, जिसने पारंपरिक बुनाई कला को युवा पीढ़ी से जोड़ने का प्रयास किया। एक छात्र ने कहा, 'यह बहुत अच्छी पहल है। हमें इस दिन को खुशी के साथ मनाना चाहिए और हथकरघा उद्योग के विकास और प्रगति के लिए काम करना चाहिए।'
आम जनता और उद्योग पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब हथकरघा क्षेत्र मशीन-निर्मित कपड़ों और आयातित उत्पादों की प्रतिस्पर्धा से जूझ रहा है। गौरतलब है कि राष्ट्रीय हथकरघा दिवस हर वर्ष 7 अगस्त को मनाया जाता है, जो 1905 के स्वदेशी आंदोलन की याद में स्थापित किया गया था। प्रधानमंत्री की अपील को इस ऐतिहासिक संदर्भ में देखा जाए तो यह 'वोकल फॉर लोकल' की नीति का सीधा विस्तार है।
आने वाले त्योहारी सीजन — विशेष रूप से रक्षाबंधन और दीपावली — को देखते हुए कारोबारियों को उम्मीद है कि यह जागरूकता अभियान बिक्री में ठोस बढ़ोतरी में तब्दील होगा।