राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर CM योगी का सपा पर प्रहार: 'वोटबैंक की राजनीति ने कारीगरों को बर्बाद किया'
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 7 अगस्त 2026 को लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में उत्तर प्रदेश के हथकरघा और हस्तशिल्प उद्योग की उपलब्धियाँ गिनाते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) पर तीखा राजनीतिक प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकार में वोटबैंक और परिवारवाद की राजनीति के चलते प्रदेश के गरीब कारीगरों और बुनकरों का सम्मान छिन गया।
हथकरघा दिवस का ऐतिहासिक महत्व
मुख्यमंत्री योगी ने अपने संबोधन में कहा कि 7 अगस्त केवल हथकरघा दिवस नहीं, बल्कि भारत के स्वाधीनता आंदोलन का एक ऐतिहासिक पड़ाव है। उन्होंने स्मरण कराया कि वर्ष 1905 में इसी तिथि को स्वदेशी आंदोलन ने देश की आज़ादी की लड़ाई को नई दिशा दी थी। उन्होंने कहा कि स्वदेशी की भावना ने उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक पूरे भारत को एकसूत्र में बाँधकर स्वतंत्रता के संकल्प को सुदृढ़ किया।
हथकरघा क्षेत्र की स्थिति और सरकारी उपलब्धियाँ
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश में लगभग ढाई लाख परिवार सीधे हथकरघा उद्योग से जुड़े हैं और पावरलूम को मिलाकर देखें तो करीब 30 लाख लोगों की आजीविका इस क्षेत्र पर निर्भर है। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले वर्ष 40 हज़ार हस्तशिल्पियों को ₹109 करोड़ की विद्युत सुविधा उपलब्ध कराई गई।
योगी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले भदोही का कालीन उद्योग लगभग मृतप्राय हो चुका था, किंतु आज वहाँ के कालीन वैश्विक बाज़ार में करोड़ों रुपये का निर्यात कर रहे हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई संसद के लिए भदोही के कालीन को प्राथमिकता देने की बात कही थी। हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र में लगभग 70 प्रतिशत महिलाएँ कार्यरत हैं और बेहतर सुरक्षा माहौल से उन्हें भी व्यापक लाभ मिला है।
सपा पर तीखा कटाक्ष
मुख्यमंत्री योगी ने बिना नाम लिए सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तंज कसा। उन्होंने कहा, 'कुछ लोगों के साथ कुछ शब्द जीवनभर जुड़े रहते हैं। कुछ लोग जीवनभर 'बबुआ' ही बने रहते हैं। 12 बजे सोकर उठते थे, 2 बजे तक तैयार होते थे, 5 बजे जिम जाते थे और 7 बजे महफिल सज जाती थी। फिर प्रदेश के बारे में सोचने का समय कहाँ था।'
उन्होंने आरोप लगाया कि इसी कारण पूर्व में प्रदेश दंगों, लंबे कर्फ्यू, इंसेफेलाइटिस और डेंगू जैसी समस्याओं से जूझता था। सरकारी स्कूलों की स्थिति बदहाल थी, न पेयजल की व्यवस्था थी और न शौचालय।
आम जनता पर असर और विकास का दावा
योगी ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में बिजली, सड़क और कानून-व्यवस्था की स्थिति अत्यंत खराब थी — व्यापारी और बेटियाँ सुरक्षित नहीं थीं। उनके अनुसार, वोटबैंक की राजनीति का सबसे अधिक नुकसान गरीबों, कारीगरों और हस्तशिल्पियों को उठाना पड़ा। अब स्कूलों में बच्चों को बैग, पुस्तकें और अन्य सुविधाएँ मिल रही हैं तथा प्रधानमंत्री के 'निपुण भारत' अभियान को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है।
क्या होगा आगे
सरकार का लक्ष्य है कि देश का पैसा देश के कारीगरों पर खर्च हो, जिससे उनके जीवन में समृद्धि आए। हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र में निवेश और प्रोत्साहन योजनाओं की निरंतरता से उत्तर प्रदेश को एक प्रमुख निर्यातक राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में प्रयास जारी रहेंगे।