राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर PM मोदी को मंगलगिरी शॉल भेंट, राज्यसभा सांसद विजय चिंतकायला ने की मुलाकात
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर 7 अगस्त को आंध्र प्रदेश की विश्वप्रसिद्ध मंगलगिरी हथकरघा बुनाई कला को देश के सर्वोच्च राजनीतिक कार्यालय तक पहुँचने का गौरव मिला। राज्यसभा सांसद विजय चिंतकायला ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर उन्हें हाथ से बुना पारंपरिक मंगलगिरी शॉल भेंट किया। इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और अन्य वरिष्ठ नेता भी उपस्थित रहे।
मुलाकात का संदर्भ और महत्व
यह भेंट प्रधानमंत्री मोदी के राष्ट्रीय हथकरघा दिवस संदेश के अनुरूप रही, जिसमें उन्होंने देश के बुनकरों और कारीगरों को श्रद्धांजलि दी तथा ग्रामीण सशक्तिकरण, महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास और 'आत्मनिर्भर भारत' के विजन को आगे बढ़ाने में हथकरघा क्षेत्र की भूमिका को रेखांकित किया। गौरतलब है कि राष्ट्रीय हथकरघा दिवस प्रत्येक वर्ष 7 अगस्त को मनाया जाता है, जो 1905 के स्वदेशी आंदोलन की याद में निर्धारित किया गया है।
मंगलगिरी हथकरघा: विरासत और पहचान
अपनी विशिष्ट बुनावट और जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) टैग के लिए प्रसिद्ध मंगलगिरी हथकरघा, कुशल कारीगरों की कई पीढ़ियों की अनवरत मेहनत का प्रतिफल है। यह भारत की सबसे पुरानी बुनाई परंपराओं में से एक को जीवित रखे हुए है। प्रधानमंत्री को यह शॉल भेंट कर चिंतकायला ने राष्ट्रीय उत्सव को आंध्र प्रदेश की इस समृद्ध बुनाई विरासत को राष्ट्रीय नेतृत्व के समक्ष प्रस्तुत करने के अवसर में बदल दिया।
आंध्र प्रदेश सरकार की पहल
यह कदम मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में आंध्र प्रदेश सरकार की हथकरघा क्षेत्र को प्रोत्साहित करने की नीति को भी प्रतिबिंबित करता है। सरकार ने कारीगरों की आर्थिक सुरक्षा, बाज़ार तक पहुँच और उन्हें सामाजिक पहचान दिलाने के लिए अनेक योजनाएँ लागू की हैं। इसी क्रम में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री और मंगलगिरी से विधायक नारा लोकेश ने 'नेथान्नाकु सेवा' योजना शुरू की है, जिसके तहत हथकरघा बुनकर परिवारों को सालाना ₹25,000 की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त, बुनकरों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण विद्यालय भी स्थापित किया गया है।
सांसद चिंतकायला की प्रतिक्रिया
मुलाकात के बाद विजय चिंतकायला ने कहा, 'राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मंगलगिरी हथकरघा शॉल भेंट करना उन सभी बुनकरों को सम्मान देने जैसा था जिनकी कारीगरी हमारी विरासत को जिंदा रखती है। यह सम्मान आंध्र प्रदेश के समस्त कारीगर समुदाय का है।' यह आयोजन इस बात का प्रतीक है कि स्थानीय हस्तशिल्प को राष्ट्रीय मंच पर स्थान दिलाने की कोशिशें जारी हैं।
आगे की राह
मंगलगिरी हथकरघा का यह प्रतीकात्मक प्रदर्शन न केवल आंध्र प्रदेश के बुनकर समुदाय के लिए प्रेरणा का स्रोत है, बल्कि यह केंद्र और राज्य सरकार दोनों के स्तर पर हथकरघा क्षेत्र को मिल रहे नीतिगत समर्थन को भी उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि GI टैग प्राप्त उत्पादों को इस तरह की उच्च-स्तरीय दृश्यता मिलने से वैश्विक बाज़ार में उनकी माँग बढ़ सकती है।