राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर कर्नाटक भाजपा ने बुनकरों को किया सम्मानित, मोदी सरकार की योजनाओं को सराहा
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक भाजपा ने 7 अगस्त को बेंगलुरु स्थित अपने राज्य मुख्यालय जगन्नाथ भवन में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का आयोजन किया, जिसमें पेशेवर बुनकरों को सम्मानित किया गया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की बुनकर-कल्याण पहलों को रेखांकित किया गया। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक बी.वाई. विजयेंद्र ने इस अवसर पर मुख्य संबोधन दिया।
मुख्य घटनाक्रम
कार्यक्रम में विजयेंद्र ने कहा कि केंद्र सरकार ने कौशल विकास, बाज़ार विस्तार और रोज़गार सृजन के ज़रिए हथकरघा एवं वस्त्र क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए अनेक पहल की हैं। उन्होंने पीएम मित्र पार्क्स योजना को वस्त्र उद्योग के लिए केंद्र की एक प्रमुख पहल के रूप में विशेष रूप से उल्लेख किया। विजयेंद्र ने यह भी कहा कि केंद्र द्वारा 'राष्ट्रीय हथकरघा दिवस' घोषित करना बुनकरों के योगदान की औपचारिक स्वीकृति है और पारंपरिक हुनर को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।
भाजपा का राजनीतिक संकल्प
विजयेंद्र ने दृढ़ता के साथ कहा कि भाजपा कर्नाटक में पुनः सत्ता में आएगी और उनकी सरकार बुनकरों के कल्याण के लिए विशेष योजनाएँ तैयार करेगी। उन्होंने कहा, 'हमारी सरकार बुनकरों के कल्याण के लिए कई योजनाएँ बनाएगी और हथकरघा क्षेत्र को बेहतर सहयोग सुनिश्चित करेगी।' साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तमाम दावों के बावजूद राज्य में कांग्रेस सरकार दोबारा सत्ता में नहीं आएगी।
येदियुरप्पा काल का संदर्भ और कांग्रेस पर आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के कार्यकाल को याद करते हुए विजयेंद्र ने कहा कि उस दौर में बुनकर समुदाय की भलाई के लिए ठोस कदम उठाए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की मौजूदा कांग्रेस सरकार हथकरघा कामगारों को आवश्यक सहायता देने में नाकाम रही है। उन्होंने उत्तरी कर्नाटक के अपने दौरों का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने बुनकर परिवारों की कठिनाइयाँ प्रत्यक्ष रूप से देखी हैं।
हथकरघा: कला और आजीविका
विजयेंद्र ने इस अवसर पर कहा कि हथकरघा बुनाई केवल एक पेशा नहीं, बल्कि एक जीवित कला परंपरा है जिसे संरक्षण और प्रोत्साहन की आवश्यकता है। उन्होंने येदियुरप्पा की उस उक्ति को भी दोहराया जिसमें वे किसानों और बुनकरों को समाज की 'दो आँखें' बताते थे। गौरतलब है कि भारत में हथकरघा क्षेत्र लाखों परिवारों की आजीविका का आधार है और इसे वैश्विक बाज़ार में प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।
आगे की राह
यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब कर्नाटक में अगले विधानसभा चुनाव की राजनीतिक सरगर्मियाँ धीरे-धीरे तेज़ होने लगी हैं। भाजपा का बुनकर-केंद्रित यह कार्यक्रम पार्टी की उस रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है जिसमें वह पारंपरिक शिल्प समुदायों तक अपनी पहुँच मज़बूत करना चाहती है। आने वाले महीनों में पार्टी के इस वर्ग के लिए और कार्यक्रमों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।