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राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर नितिन नवीन बोले — भारतीय बुनकरों ने विश्व में स्थापित की अनूठी पहचान

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राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर नितिन नवीन बोले — भारतीय बुनकरों ने विश्व में स्थापित की अनूठी पहचान

सारांश

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर BJP महासचिव नितिन नवीन ने एक्स पर वीडियो साझा कर बुनकरों की वैश्विक पहचान को सराहा। भागलपुर सिल्क से लेकर असम के पट और छत्तीसगढ़ के कोसा तक — उन्होंने कहा कि 'वोकल फॉर लोकल' की नीति बुनकरों को आत्मनिर्भर भारत का आधार बना रही है।

मुख्य बातें

BJP के राष्ट्रीय महासचिव नितिन नवीन ने 7 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर एक्स पर वीडियो संदेश साझा किया।
उन्होंने भागलपुर सिल्क , असम के पट सिल्क और छत्तीसगढ़ के कोसा का उल्लेख करते हुए बुनकरों की विविध परंपराओं को सराहा।
नवीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'वोकल फॉर लोकल' और 'लोकल से ग्लोबल' नीति को बुनकरों के उत्थान का आधार बताया।
उन्होंने कहा कि सरकार बुनकरों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करते हुए आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की ओर काम कर रही है।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस प्रत्येक वर्ष 7 अगस्त को 1905 के स्वदेशी आंदोलन की स्मृति में मनाया जाता है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय महासचिव नितिन नवीन ने 7 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर वीडियो संदेश साझा कर देशभर के बुनकरों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारतीय हथकरघा कारीगरों ने अपने अथक परिश्रम से न केवल देश में बल्कि पूरी दुनिया में एक विशिष्ट पहचान बनाई है।

बुनकरों की परंपरा और योगदान

नवीन ने अपने संदेश में कहा कि बिहार का भागलपुर सिल्क हो, असम का पट सिल्क हो या छत्तीसगढ़ का कोसा — हिंदुस्तान के कोने-कोने में बुनकर समुदाय ने अपनी पारंपरिक बुनाई कला को जीवंत रखा है। उनके अनुसार, इन कारीगरों ने भारतीय संस्कृति और परंपराओं को एक नया स्वरूप देने का उल्लेखनीय कार्य किया है, जिसकी सराहना चहुँओर हो रही है।

उन्होंने कहा कि बुनकर समुदाय में आज एक नई ऊर्जा और उत्साह देखने को मिल रहा है, जिसे शब्दों में पूरी तरह व्यक्त कर पाना कठिन है। नवीन ने गर्व के साथ कहा कि वैश्विक मंच पर भारतीय बुनकरों की अलग पहचान उनके परिश्रम और समर्पण का प्रमाण है।

'वोकल फॉर लोकल' से 'लोकल से ग्लोबल' तक

नितिन नवीन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'वोकल फॉर लोकल' और 'लोकल से ग्लोबल' के सिद्धांत पर निरंतर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का यह दृष्टिकोण बुनकर भाइयों को संबल और प्रेरणा देने में सहायक रहा है। सरकार की ओर से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि बुनकरों के हितों पर किसी भी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

आत्मनिर्भर भारत में बुनकरों की भूमिका

नवीन ने कहा कि बुनकरों को अधिकाधिक प्रोत्साहित कर भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सरकार प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। उनके अनुसार, देश लगातार विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है और हथकरघा क्षेत्र इस यात्रा का एक अहम हिस्सा है।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का महत्व

गौरतलब है कि राष्ट्रीय हथकरघा दिवस प्रत्येक वर्ष 7 अगस्त को मनाया जाता है। यह दिन 1905 के स्वदेशी आंदोलन की स्मृति में चुना गया था, जब देशवासियों ने विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का संकल्प लिया था। इस अवसर पर देशभर में हथकरघा उद्योग को बढ़ावा देने और बुनकरों के योगदान को रेखांकित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। आने वाले समय में सरकारी नीतियों और बाज़ार-संपर्क के विस्तार से इस क्षेत्र को और गति मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 'वोकल फॉर लोकल' की नीति के तहत बुनकरों की औसत आय और बाज़ार-पहुँच में ठोस सुधार हुआ है या नहीं। हथकरघा क्षेत्र में असंगठित कामगारों की बड़ी संख्या को देखते हुए, नीतिगत प्रोत्साहन और ज़मीनी लाभ के बीच की खाई पर ध्यान देना ज़रूरी है। सरकार की प्रतिबद्धता के दावों को तब विश्वसनीयता मिलेगी जब बुनकर कल्याण योजनाओं के क्रियान्वयन के आँकड़े सार्वजनिक और सत्यापन-योग्य हों।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस प्रत्येक वर्ष 7 अगस्त को मनाया जाता है। यह तिथि 1905 के स्वदेशी आंदोलन की स्मृति में चुनी गई थी, जब देशवासियों ने विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार और स्वदेशी उद्योगों को प्रोत्साहन देने का संकल्प लिया था।
नितिन नवीन ने हथकरघा दिवस पर क्या कहा?
BJP के राष्ट्रीय महासचिव नितिन नवीन ने कहा कि भारतीय बुनकरों ने अपने परिश्रम से विश्व में एक विशिष्ट पहचान बनाई है। उन्होंने भागलपुर सिल्क, असम के पट सिल्क और छत्तीसगढ़ के कोसा का उल्लेख करते हुए बुनकर समुदाय को बधाई दी।
'वोकल फॉर लोकल' नीति का बुनकरों से क्या संबंध है?
नितिन नवीन के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'वोकल फॉर लोकल' और 'लोकल से ग्लोबल' नीति बुनकरों को प्रेरणा और संबल देने का काम कर रही है। इस नीति के तहत स्थानीय हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों को घरेलू व अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में बढ़ावा दिया जा रहा है।
भारत के किन राज्यों की हथकरघा बुनाई विश्व में प्रसिद्ध है?
नितिन नवीन ने बिहार के भागलपुर सिल्क, असम के पट सिल्क और छत्तीसगढ़ के कोसा का विशेष उल्लेख किया। इनके अलावा वाराणसी की बनारसी साड़ी, कांचीपुरम की सिल्क और ओडिशा की संबलपुरी बुनाई भी वैश्विक स्तर पर पहचानी जाती है।
आत्मनिर्भर भारत में हथकरघा क्षेत्र की क्या भूमिका है?
नितिन नवीन के अनुसार, बुनकरों को प्रोत्साहित कर आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को गति दी जा रही है। हथकरघा क्षेत्र लाखों असंगठित कामगारों को रोज़गार देता है और भारतीय वस्त्र निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान करता है।
राष्ट्र प्रेस
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