7 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2026: PM मोदी ने बुनकरों को किया नमन, हैंडलूम को बताया आत्मनिर्भर भारत का स्तंभ

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2026: PM मोदी ने बुनकरों को किया नमन, हैंडलूम को बताया आत्मनिर्भर भारत का स्तंभ

सारांश

7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर PM मोदी ने देश के 35.22 लाख बुनकरों को श्रद्धांजलि दी और हथकरघा को आत्मनिर्भर भारत का अहम स्तंभ बताया। इस क्षेत्र में 72% से अधिक महिलाएँ कार्यरत हैं — यह दिवस सिर्फ परंपरा का उत्सव नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नब्ज़ है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 7 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर देश के बुनकरों और कारीगरों को नमन किया।
मोदी ने हथकरघा क्षेत्र को ग्रामीण सशक्तिकरण , महिला-नेतृत्व वाले विकास और आत्मनिर्भर भारत का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया।
चौथी अखिल भारतीय हथकरघा जनगणना 2019-20 के अनुसार देश में 35.22 लाख बुनकर और संबद्ध श्रमिक हैं, जिनमें 72% से अधिक महिलाएँ हैं।
देशभर में लगभग 31.45 लाख हथकरघा परिवार दर्ज हैं।
यह दिवस 1905 के स्वदेशी आंदोलन की स्मृति में मनाया जाता है; 2015 में इसे आधिकारिक राष्ट्रीय दर्जा मिला।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर देश के 35.22 लाख बुनकरों और संबद्ध श्रमिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की और हथकरघा क्षेत्र को ग्रामीण सशक्तिकरण, महिला-नेतृत्व वाले विकास और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का एक अनिवार्य स्तंभ करार दिया। उन्होंने सरकार की ओर से इस क्षेत्र को निरंतर समर्थन देने का भरोसा दिलाया।

PM मोदी का संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में लिखा, 'आज राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर हम भारत की समृद्ध और जीवंत हथकरघा विरासत का जश्न मना रहे हैं। साथ ही, हम अपने बुनकरों और कारीगरों के कौशल, रचनात्मकता और समर्पण को प्रणाम करते हैं। पीढ़ियों से, उन्होंने हमारी परंपराओं को संजोया और समृद्ध किया है।'

उन्होंने आगे लिखा, 'हमारी सरकार हथकरघा क्षेत्र का समर्थन करना जारी रखेगी, जो ग्रामीण सशक्तिकरण, महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास और आत्मनिर्भर भारत के सपने को पूरा करने का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।'

मोदी ने देशवासियों से यह भी अपील की कि वे अपने पसंदीदा हथकरघा उत्पादों और GRWM वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करें, ताकि इस क्षेत्र से जुड़े कारीगरों का उत्साह बढ़े।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का महत्व

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस प्रत्येक वर्ष 7 अगस्त को मनाया जाता है। यह 1905 के स्वदेशी आंदोलन की स्मृति में आयोजित होता है, जब ब्रिटिश शासन के विरोध में भारतीयों ने देशी उत्पादों को अपनाने का संकल्प लिया था। 2015 में इस दिवस की आधिकारिक स्थापना के साथ इस दीर्घकालिक बुनाई विरासत को एक समर्पित राष्ट्रीय मंच प्राप्त हुआ।

गौरतलब है कि इस क्षेत्र में कार्यरत 35.22 लाख बुनकरों और श्रमिकों में से 72 प्रतिशत से अधिक महिलाएँ हैं, जो इसे देश के सबसे बड़े महिला-रोज़गार क्षेत्रों में से एक बनाता है।

हथकरघा जनगणना के आँकड़े

चौथी अखिल भारतीय हथकरघा जनगणना 2019-20 के अनुसार, देशभर में लगभग 31.45 लाख हथकरघा परिवार दर्ज किए गए। इनमें 8.48 लाख संबद्ध श्रमिक वाइंडिंग, वार्पिंग, डाइंग और कैलेंडरिंग जैसी बुनाई-पूर्व और बुनाई-पश्चात गतिविधियों में संलग्न हैं। ये आँकड़े दर्शाते हैं कि हथकरघा उद्योग ग्रामीण आजीविका से कितनी गहराई से जुड़ा हुआ है।

ऐतिहासिक जड़ें और वैश्विक पहुँच

भारत की हथकरघा परंपरा की जड़ें सिंधु घाटी सभ्यता तक जाती हैं। कताई और बुनाई का उल्लेख ऋग्वेद, रामायण, महाभारत और कौटिल्य के साहित्य में मिलता है, जहाँ भारतीय कपास और रेशम की उत्कृष्ट गुणवत्ता का वर्णन है। यह कला पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होती रही है।

साल 2026 में यह अवसर ऐसे समय में आया है जब हथकरघा उद्योग को डिजिटल प्लेटफॉर्म, डिज़ाइन नवाचार और वैश्विक बाज़ारों के ज़रिये नई अभिव्यक्ति मिल रही है। सरकारी सहायता, पुरस्कार और प्रामाणिकता सुरक्षा उपाय इन परंपराओं को ग्रामीण समुदायों से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुँचाने में सहायक बन रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डिजिटल विपणन और निर्यात प्रोत्साहन को और मज़बूत किया जाए, तो यह क्षेत्र लाखों ग्रामीण परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 35.22 लाख बुनकरों की आय और बाज़ार पहुँच में ठोस सुधार कब और कैसे आएगा। हथकरघा क्षेत्र दशकों से सरकारी प्रशंसा का पात्र रहा है, फिर भी सस्ते मशीन-निर्मित कपड़ों से प्रतिस्पर्धा और मध्यस्थों की लंबी श्रृंखला बुनकरों की वास्तविक कमाई को सीमित करती है। डिजिटल प्लेटफॉर्म और वैश्विक बाज़ार की बात तो होती है, लेकिन ग्रामीण बुनकरों की डिजिटल साक्षरता और लॉजिस्टिक्स पहुँच पर नीतिगत निवेश का ब्यौरा अब भी अस्पष्ट है। जब तक प्रोत्साहन को मापने योग्य आय-वृद्धि से नहीं जोड़ा जाता, यह दिवस प्रतीकात्मक ही रहेगा।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस प्रत्येक वर्ष 7 अगस्त को मनाया जाता है। यह 1905 के स्वदेशी आंदोलन की स्मृति में आयोजित होता है और 2015 में इसे आधिकारिक राष्ट्रीय दर्जा दिया गया।
PM मोदी ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2026 पर क्या कहा?
PM मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर हथकरघा क्षेत्र को ग्रामीण सशक्तिकरण, महिला-नेतृत्व वाले विकास और आत्मनिर्भर भारत का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। उन्होंने बुनकरों और कारीगरों के कौशल, रचनात्मकता और समर्पण को प्रणाम किया और सरकारी समर्थन जारी रखने का वादा किया।
भारत में कितने हथकरघा बुनकर हैं और उनमें महिलाओं की हिस्सेदारी कितनी है?
चौथी अखिल भारतीय हथकरघा जनगणना 2019-20 के अनुसार देश में 35.22 लाख हथकरघा बुनकर और संबद्ध श्रमिक हैं। इनमें से 72 प्रतिशत से अधिक महिलाएँ हैं, जो इसे देश के सबसे बड़े महिला-रोज़गार क्षेत्रों में से एक बनाता है।
हथकरघा उद्योग का भारतीय इतिहास में क्या महत्व है?
भारत की हथकरघा परंपरा की जड़ें सिंधु घाटी सभ्यता तक जाती हैं। ऋग्वेद, रामायण, महाभारत और कौटिल्य के साहित्य में भारतीय कपास और रेशम की उत्कृष्ट गुणवत्ता का वर्णन मिलता है। यह कला पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होती रही है।
हथकरघा क्षेत्र को आज किन नई संभावनाओं से जोड़ा जा रहा है?
2026 में हथकरघा उद्योग को डिजिटल प्लेटफॉर्म, डिज़ाइन नवाचार और वैश्विक बाज़ारों के ज़रिये नई पहचान मिल रही है। सरकारी पुरस्कार, बाज़ार पहुँच और प्रामाणिकता सुरक्षा उपाय इन परंपराओं को ग्रामीण समुदायों से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुँचाने में सहायक बन रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 9 घंटे पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 11 महीने पहले
  4. 11 महीने पहले
  5. 12 महीने पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले