राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2025: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन, अमित शाह समेत दर्जनभर नेताओं ने बुनकरों को सलाम किया
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर 7 अगस्त को उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, गृह मंत्री अमित शाह, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और कई केंद्रीय मंत्रियों व मुख्यमंत्रियों ने देश के बुनकरों और हस्तशिल्पियों को बधाई दी। नेताओं ने एकस्वर में देशवासियों से हथकरघा उत्पादों को दैनिक जीवन में अपनाने और 'वोकल फॉर लोकल' की भावना को मज़बूत करने की अपील की।
उपराष्ट्रपति और लोकसभा अध्यक्ष का संदेश
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि भारत की हथकरघा परंपरा एक जीवंत विरासत है, जो कलाकारी, मजबूती और पीढ़ियों से चली आ रही कारीगरी से बुनी गई है। उन्होंने कहा, 'हाथ से बुनी हर चीज हमारी संस्कृति की समृद्धि और आत्मनिर्भरता की भावना को दर्शाती है।' लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कोटा डोरिया जैसे हैंडलूम उत्पादों को आत्मनिर्भर भारत का सशक्त प्रतीक बताते हुए स्थानीय बुनकरों का साथ निभाने का आग्रह किया।
गृह मंत्री और भाजपा अध्यक्ष की अपील
गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि हथकरघा क्षेत्र भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से गहराई से जुड़ा रहा है और यह देश की सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस क्षेत्र को नई पहचान देने के लिए राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की शुरुआत की और वैश्विक व्यापार समझौतों के ज़रिये बुनकरों के लिए नए अवसर पैदा किए जा रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि आज जब देश विकसित भारत के निर्माण की दिशा में अग्रसर है, टेक्सटाइल क्षेत्र देश की नई ताकत बनकर उभर रहा है।
केंद्रीय मंत्रियों के संदेश
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नागरिकों से अपने पसंदीदा हैंडलूम उत्पाद खरीदकर वीडियो साझा करने और बुनकरों की कला को वैश्विक स्तर पर पहुँचाने में भागीदारी निभाने का आह्वान किया। केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने हथकरघा को भारतीय संस्कृति की अनमोल विरासत बताते हुए स्वदेशी अपनाने का संकल्प लेने की बात कही। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने 'लोकल के लिए वोकल' के मंत्र को आत्मसात करने और स्वदेशी शिल्प परंपराओं को संवर्धित करने का आग्रह किया।
मुख्यमंत्रियों की प्रतिक्रिया
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने महेश्वरी और चंदेरी जैसी पारंपरिक हथकरघा कला का उल्लेख करते हुए इन्हें आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रतीक बताया। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हथकरघा से जुड़े लाखों परिवारों का समर्थन करने की अपील की। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि उनकी सरकार स्थानीय बुनकरों और कारीगरों को आत्मनिर्भर व समृद्ध बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'वोकल फॉर लोकल' से 'लोकल टू ग्लोबल' के संकल्प को सशक्त बनाने का आह्वान किया। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने भी बुनकरों की सृजनशीलता और परिश्रम को नमन करते हुए स्वदेशी उत्पाद अपनाने का संकल्प दोहराया।
हथकरघा दिवस का महत्व
गौरतलब है कि प्रत्येक वर्ष 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया जाता है। यह तारीख 1905 के स्वदेशी आंदोलन की याद दिलाती है, जब कोलकाता के टाउन हॉल में इस आंदोलन की औपचारिक शुरुआत हुई थी। यह दिवस बुनकरों की आजीविका, सांस्कृतिक संरक्षण और ग्रामीण रोजगार के प्रति राष्ट्रीय प्रतिबद्धता का प्रतीक है। देश भर में हथकरघा क्षेत्र से लाखों परिवारों की रोज़ी-रोटी जुड़ी हुई है, और इस दिवस का उद्देश्य इस विरासत को वैश्विक पहचान दिलाना है।