7 अगस्त 2026
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राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2025: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन, अमित शाह समेत दर्जनभर नेताओं ने बुनकरों को सलाम किया

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राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2025: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन, अमित शाह समेत दर्जनभर नेताओं ने बुनकरों को सलाम किया

सारांश

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर उपराष्ट्रपति से लेकर मुख्यमंत्रियों तक — पूरी भाजपा नेतृत्व ने एक स्वर में बुनकरों को सलाम किया और देशवासियों से स्वदेशी हथकरघा उत्पाद अपनाने की अपील की। यह दिन 1905 के स्वदेशी आंदोलन की विरासत से जुड़ा है और लाखों बुनकर परिवारों की आजीविका का प्रतीक है।

मुख्य बातें

7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और गृह मंत्री अमित शाह समेत दर्जनभर नेताओं ने बुनकरों को बधाई दी।
सभी नेताओं ने 'वोकल फॉर लोकल' और 'आत्मनिर्भर भारत' के तहत हथकरघा उत्पाद अपनाने की अपील की।
मध्य प्रदेश की महेश्वरी-चंदेरी, राजस्थान की हस्तकरघा परंपरा और कोटा डोरिया को सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक के रूप में उजागर किया गया।
गृह मंत्री शाह ने कहा कि वैश्विक व्यापार समझौतों और घरेलू सहयोग से बुनकरों के लिए नए अवसर बनाए जा रहे हैं।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 1905 के स्वदेशी आंदोलन की स्मृति में मनाया जाता है और देशभर में लाखों बुनकर परिवारों की आजीविका से जुड़ा है।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर 7 अगस्त को उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, गृह मंत्री अमित शाह, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और कई केंद्रीय मंत्रियों व मुख्यमंत्रियों ने देश के बुनकरों और हस्तशिल्पियों को बधाई दी। नेताओं ने एकस्वर में देशवासियों से हथकरघा उत्पादों को दैनिक जीवन में अपनाने और 'वोकल फॉर लोकल' की भावना को मज़बूत करने की अपील की।

उपराष्ट्रपति और लोकसभा अध्यक्ष का संदेश

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि भारत की हथकरघा परंपरा एक जीवंत विरासत है, जो कलाकारी, मजबूती और पीढ़ियों से चली आ रही कारीगरी से बुनी गई है। उन्होंने कहा, 'हाथ से बुनी हर चीज हमारी संस्कृति की समृद्धि और आत्मनिर्भरता की भावना को दर्शाती है।' लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कोटा डोरिया जैसे हैंडलूम उत्पादों को आत्मनिर्भर भारत का सशक्त प्रतीक बताते हुए स्थानीय बुनकरों का साथ निभाने का आग्रह किया।

गृह मंत्री और भाजपा अध्यक्ष की अपील

गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि हथकरघा क्षेत्र भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से गहराई से जुड़ा रहा है और यह देश की सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस क्षेत्र को नई पहचान देने के लिए राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की शुरुआत की और वैश्विक व्यापार समझौतों के ज़रिये बुनकरों के लिए नए अवसर पैदा किए जा रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि आज जब देश विकसित भारत के निर्माण की दिशा में अग्रसर है, टेक्सटाइल क्षेत्र देश की नई ताकत बनकर उभर रहा है।

केंद्रीय मंत्रियों के संदेश

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नागरिकों से अपने पसंदीदा हैंडलूम उत्पाद खरीदकर वीडियो साझा करने और बुनकरों की कला को वैश्विक स्तर पर पहुँचाने में भागीदारी निभाने का आह्वान किया। केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने हथकरघा को भारतीय संस्कृति की अनमोल विरासत बताते हुए स्वदेशी अपनाने का संकल्प लेने की बात कही। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने 'लोकल के लिए वोकल' के मंत्र को आत्मसात करने और स्वदेशी शिल्प परंपराओं को संवर्धित करने का आग्रह किया।

मुख्यमंत्रियों की प्रतिक्रिया

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने महेश्वरी और चंदेरी जैसी पारंपरिक हथकरघा कला का उल्लेख करते हुए इन्हें आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रतीक बताया। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हथकरघा से जुड़े लाखों परिवारों का समर्थन करने की अपील की। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि उनकी सरकार स्थानीय बुनकरों और कारीगरों को आत्मनिर्भर व समृद्ध बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'वोकल फॉर लोकल' से 'लोकल टू ग्लोबल' के संकल्प को सशक्त बनाने का आह्वान किया। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने भी बुनकरों की सृजनशीलता और परिश्रम को नमन करते हुए स्वदेशी उत्पाद अपनाने का संकल्प दोहराया।

हथकरघा दिवस का महत्व

गौरतलब है कि प्रत्येक वर्ष 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया जाता है। यह तारीख 1905 के स्वदेशी आंदोलन की याद दिलाती है, जब कोलकाता के टाउन हॉल में इस आंदोलन की औपचारिक शुरुआत हुई थी। यह दिवस बुनकरों की आजीविका, सांस्कृतिक संरक्षण और ग्रामीण रोजगार के प्रति राष्ट्रीय प्रतिबद्धता का प्रतीक है। देश भर में हथकरघा क्षेत्र से लाखों परिवारों की रोज़ी-रोटी जुड़ी हुई है, और इस दिवस का उद्देश्य इस विरासत को वैश्विक पहचान दिलाना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ये अपीलें बुनकरों की आय और बाज़ार पहुँच में ठोस बदलाव ला रही हैं। हथकरघा क्षेत्र वर्षों से संगठित रिटेल और सस्ते मशीन-निर्मित कपड़ों के दबाव में है, और 'वोकल फॉर लोकल' का नारा तब तक प्रतीकात्मक रहेगा जब तक सरकारी खरीद नीतियाँ और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर हथकरघा उत्पादों को प्राथमिकता नहीं मिलती। मुख्यमंत्रियों का राज्य-विशिष्ट उल्लेख — महेश्वरी, चंदेरी, कोटा डोरिया — सांस्कृतिक गर्व जगाता है, पर नीतिगत विवरण के बिना यह उत्सवी बयानबाज़ी से अधिक नहीं है।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस प्रत्येक वर्ष 7 अगस्त को मनाया जाता है। यह तारीख 1905 के स्वदेशी आंदोलन की याद दिलाती है, जब कोलकाता में इस आंदोलन की औपचारिक शुरुआत हुई थी। इसका उद्देश्य बुनकरों की आजीविका, सांस्कृतिक विरासत और हथकरघा उद्योग को बढ़ावा देना है।
इस वर्ष हथकरघा दिवस पर किन प्रमुख नेताओं ने संदेश दिया?
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, गृह मंत्री अमित शाह, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ-साथ मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने बधाई और अपील के संदेश दिए।
'वोकल फॉर लोकल' और हथकरघा दिवस का क्या संबंध है?
'वोकल फॉर लोकल' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वह आह्वान है जिसमें नागरिकों से स्थानीय उत्पाद खरीदने की अपील की जाती है। हथकरघा दिवस पर नेताओं ने इसी मंत्र को दोहराते हुए बुनकरों के उत्पादों को दैनिक जीवन में शामिल करने और ग्रामीण रोज़गार को सशक्त बनाने की अपील की।
भारत के किन राज्यों की हथकरघा परंपराओं का विशेष उल्लेख हुआ?
मध्य प्रदेश की महेश्वरी और चंदेरी साड़ियाँ, राजस्थान की हस्तकरघा परंपरा और राजस्थान के कोटा डोरिया का विशेष उल्लेख किया गया। इन्हें सांस्कृतिक विरासत और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था के प्रतीक के रूप में पेश किया गया।
हथकरघा क्षेत्र से कितने परिवार जुड़े हैं?
नेताओं के बयानों में हथकरघा क्षेत्र से जुड़े 'लाखों परिवारों' का उल्लेख किया गया। यह क्षेत्र ग्रामीण भारत में टिकाऊ रोज़गार का एक प्रमुख स्रोत है और देश की सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़ा है।
राष्ट्र प्रेस
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