21 सितंबर 2026
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विजयवाड़ा हिरासत मौत मामले में एसआईटी ने आरोपपत्र दाखिल किया, 7 पुलिसकर्मी आरोपी

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विजयवाड़ा हिरासत मौत मामले में एसआईटी ने आरोपपत्र दाखिल किया, 7 पुलिसकर्मी आरोपी

सारांश

विजयवाड़ा में 25 वर्षीय गडे साई कृष्णा की कथित हिरासत में मौत के मामले में एसआईटी ने आरोपपत्र दाखिल कर दिया है। सात पुलिसकर्मियों पर यातना, हत्या और सबूत मिटाने के आरोप हैं। माँ की उच्च न्यायालय याचिका से शुरू हुई इस जांच ने अब अदालती कार्यवाही का रूप ले लिया है।

मुख्य बातें

आंध्र प्रदेश एसआईटी ने 21 सितंबर 2026 को विजयवाड़ा की अदालत में गडे साई कृष्णा (25) की हिरासत में मौत के मामले में आरोपपत्र दाखिल किया।
आरोपियों में कृष्णालंका पुलिस स्टेशन के तत्कालीन एसएचओ नागराजू सहित 7 पुलिसकर्मी शामिल हैं।
साई कृष्णा को 5 मई 2026 को हिरासत में लिया गया था; कथित तौर पर 12 मई को उनकी मृत्यु हुई और शव का अंतिम संस्कार सबूत मिटाने के लिए किया गया।
माँ विजया लक्ष्मी की उच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के बाद राज्य सरकार ने एसआईटी गठित की थी।
मामला भारत न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 127(4), 127(6), 103(1) और 238 के तहत दर्ज है।
यह आरोपपत्र सुरेश के अदालत में आत्मसमर्पण के चार दिन बाद दाखिल हुआ।

आंध्र प्रदेश पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने 21 सितंबर 2026 को विजयवाड़ा की एक अदालत में गडे साई कृष्णा (25) की कथित हिरासत में मौत के मामले में आरोपपत्र दाखिल किया। आरोपपत्र में कृष्णालंका पुलिस स्टेशन के तत्कालीन सर्किल इंस्पेक्टर (स्टेशन हाउस ऑफिसर) एसएसवीवी. नागराजू सहित सात आरोपियों के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया है। एसआईटी ने गिरफ्तारी, हिरासत में शारीरिक यातना, और सबूत मिटाने के लिए शव के अंतिम संस्कार तक के साक्ष्य अदालत के सामने रखे।

मुख्य आरोपी और आरोपों का विवरण

आरोपित सात व्यक्तियों में निलंबित एसएचओ नागराजू, हेड कांस्टेबल अशोक कुमार और नानी, नागराजू के सहयोगी गुलिविंदला सुरेश, कांस्टेबल बाबू राव और सांबैया, तथा होम गार्ड वेंकट शामिल हैं। एसआईटी ने भारत न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 127(4), 127(6), 103(1) और 238 के तहत ये आरोप लगाए हैं, जो हत्या, हिरासत में यातना और सबूत नष्ट करने से संबंधित हैं।

यह आरोपपत्र आरोपी सुरेश के अदालत में आत्मसमर्पण करने के महज चार दिन बाद दाखिल किया गया है, जो दर्शाता है कि एसआईटी ने जांच की गति को तेज रखा।

घटनाक्रम: कैसे हुई कथित हत्या

जांच में सामने आया कि एनटीआर कमिश्नरेट की टास्क फोर्स पुलिस ने कृष्णालंका पुलिस के साथ मिलकर 5 मई 2026 को मार्कपुरम जाकर साई कृष्णा को हिरासत में लिया था, जिसके विरुद्ध दो गैर-जमानती वारंट लंबित थे। उसे 6 मई को कृष्णालंका पुलिस को सौंपा गया।

सुरेश ने एसआईटी के समक्ष स्वीकार किया कि उसने साई कृष्णा को पहले पुलिस स्टेशन में और बाद में रानीगरी थोता स्थित एक निजी खाली इमारत में देखा था, जहाँ कथित तौर पर 12 मई को उसकी मृत्यु हुई। पीड़ित ने कथित तौर पर सुरेश को बताया था कि हिरासत में आने के बाद से उसे प्रतिदिन बुरी तरह पीटा जा रहा है।

सुरेश ने यह भी बताया कि नागराजू, हेड कांस्टेबल अशोक कुमार और नानी ने सबूत मिटाने के इरादे से शव का अंतिम संस्कार करवा दिया।

परिवार की शिकायत और न्यायालय का हस्तक्षेप

साई कृष्णा की माता विजया लक्ष्मी ने शिकायत दर्ज कराई कि उनके बेटे को हिरासत में यातनाएं देकर मार डाला गया और शव को श्मशान घाट में नष्ट कर दिया गया। इस शिकायत के आधार पर 19 जून को मामला दर्ज हुआ।

जब विजया लक्ष्मी ने उच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की, तब राज्य सरकार ने जांच के लिए एसआईटी का गठन किया। महानिरीक्षक (कानून एवं व्यवस्था) एम. रवि प्रकाश के नेतृत्व वाली इस एसआईटी ने 21 जून को निलंबित एसएचओ नागराजू को गिरफ्तार किया था।

आम जनता पर असर और व्यापक संदर्भ

यह मामला भारत में हिरासत में होने वाली मौतों की उस गंभीर समस्या को फिर उजागर करता है, जिन पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और सर्वोच्च न्यायालय कई बार चिंता जता चुके हैं। गौरतलब है कि बीएनएस की धाराएं — जो भारतीय दंड संहिता की जगह लागू हुई हैं — पुलिस हिरासत में यातना और मौत पर पहले से अधिक सख्त प्रावधान रखती हैं।

आलोचकों का कहना है कि ऐसे मामलों में त्वरित जांच और आरोपी अधिकारियों की निलंबन एवं गिरफ्तारी सुनिश्चित करना ज़रूरी है, ताकि पुलिस व्यवस्था में जनता का विश्वास बना रहे। यह ऐसे समय में आया है जब आंध्र प्रदेश में पुलिस सुधार पर बहस चल रही है।

आगे क्या होगा

अदालत में आरोपपत्र दाखिल होने के बाद अब सुनवाई की तिथि तय होगी। मामले की संवेदनशीलता और उच्च न्यायालय की निगरानी को देखते हुए त्वरित सुनवाई की उम्मीद की जा रही है। साई कृष्णा के परिवार का इंतजार अब न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण पर टिका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली जवाबदेही तब होगी जब अदालत सज़ा सुनाए — जो भारत में हिरासत में मौत के मामलों में अक्सर वर्षों तक टलती रहती है। यह मामला दर्शाता है कि बीएनएस की नई धाराएं और उच्च न्यायालय का दबाव मिलकर जांच को गति दे सकते हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या यही तत्परता आम शिकायतकर्ताओं को भी मिलती है जो उच्च न्यायालय तक नहीं पहुँच सकते। शव का अंतिम संस्कार करके सबूत मिटाने का आरोप पुलिस तंत्र में गहरी संस्थागत खामियों की ओर इशारा करता है, जिन पर व्यापक सुधार की ज़रूरत है।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गडे साई कृष्णा हिरासत मौत मामला क्या है?
25 वर्षीय गडे साई कृष्णा को 5 मई 2026 को आंध्र प्रदेश पुलिस ने हिरासत में लिया था। उनके परिवार का आरोप है कि कृष्णालंका पुलिस स्टेशन में हिरासत के दौरान उन्हें पीट-पीटकर मार डाला गया और सबूत मिटाने के लिए शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। कथित तौर पर 12 मई 2026 को उनकी मृत्यु हुई।
एसआईटी ने आरोपत्र में किन-किन पर आरोप लगाए हैं?
एसआईटी ने सात आरोपियों के विरुद्ध आरोपत्र दाखिल किया है — तत्कालीन एसएचओ एसएसवीवी. नागराजू, हेड कांस्टेबल अशोक कुमार और नानी, गुलिविंदला सुरेश, कांस्टेबल बाबू राव और सांबैया, तथा होम गार्ड वेंकट। इन पर हत्या, हिरासत में यातना और सबूत नष्ट करने के आरोप हैं।
यह मामला अदालत तक कैसे पहुँचा?
साई कृष्णा की माँ विजया लक्ष्मी ने उच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की, जिसके बाद राज्य सरकार ने एसआईटी गठित की। 19 जून को बीएनएस की धारा 127(4), 127(6), 103(1) और 238 के तहत मामला दर्ज हुआ और 21 जून को निलंबित एसएचओ को गिरफ्तार किया गया।
आगे मामले में क्या होगा?
अदालत में आरोपत्र दाखिल होने के बाद अब सुनवाई की तिथियाँ तय होंगी। उच्च न्यायालय की निगरानी में चल रहे इस मामले में त्वरित सुनवाई की उम्मीद है। सभी सात आरोपियों को मुकदमे का सामना करना होगा।
हिरासत में मौत के मामलों में भारत न्याय संहिता क्या कहती है?
भारत न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 127 पुलिस हिरासत में यातना और मौत पर सख्त प्रावधान करती है, जबकि धारा 103(1) हत्या और धारा 238 सबूत नष्ट करने से संबंधित है। ये प्रावधान पुराने भारतीय दंड संहिता की जगह लागू हुए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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