विजयवाड़ा हिरासत मौत: SIT ने निलंबित थाना प्रभारी नागाराजू को हिरासत में लिया, हत्या और सबूत मिटाने के आरोपों की जांच
सारांश
मुख्य बातें
विजयवाड़ा में 25 वर्षीय गाडे साई कृष्णा की कथित पुलिस हिरासत में मौत के मामले में विशेष जांच दल (SIT) ने मंगलवार, 23 जून को निलंबित थाना प्रभारी नागाराजू को उनके सिंह नगर स्थित आवास से हिरासत में ले लिया। आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा दो दिन पूर्व गठित इस चार सदस्यीय दल ने नागाराजू को कृष्णा लंका थाने के निलंबित प्रभारी के रूप में पहचाना है और उन्हें पूछताछ के लिए पुलिस गेस्ट हाउस ले जाया गया।
मुख्य घटनाक्रम
SIT की टीम पुलिस महानिरीक्षक (कानून-व्यवस्था) एम. रवि प्रकाश के नेतृत्व में कार्य कर रही है। दल में पश्चिम गोदावरी के पुलिस अधीक्षक अदनान नईम असमी, अल्लूरी सीताराम राजू जिले के पुलिस अधीक्षक अमित बर्दार और बापटला जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एल. सुधाकर भी शामिल हैं। नागाराजू को हिरासत में लिए जाने के दौरान उनके समर्थक बड़ी संख्या में उनके घर के बाहर एकत्र हो गए और सरकार से मामला वापस लेने की मांग करते हुए नारेबाजी की। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
परिवार के आरोप और मामले की पृष्ठभूमि
साई कृष्णा की माँ गाडे विजयलक्ष्मी ने 19 जून को शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बेटे को 9 मई को एक मामले में पूछताछ के बहाने पुलिस ने अपने कब्जे में लिया था। विजयलक्ष्मी के अनुसार, साई कृष्णा को कृष्णा लंका थाने में अवैध रूप से रखा गया, जहाँ उसे कथित तौर पर यातनाएँ दी गईं और पीट-पीटकर मार डाला गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सबूत नष्ट करने के इरादे से साई कृष्णा के शव का अंतिम संस्कार स्वर्गपुरी विद्युत शवदाह गृह में करा दिया गया।
उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप
विजयलक्ष्मी ने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। अदालत ने कृष्णा लंका पुलिस को 15 जून को साई कृष्णा को पेश करने का निर्देश दिया, परंतु पुलिस ऐसा करने में असमर्थ रही। इसके बाद उच्च न्यायालय ने 29 जून तक उसे अदालत में प्रस्तुत करने का आदेश दिया — जो अब तक अनुत्तरित है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में पुलिस हिरासत में मौतों को लेकर मानवाधिकार संगठनों की चिंताएँ बढ़ती जा रही हैं।
SIT की जांच का दायरा
SIT ने सोमवार को साई कृष्णा की माँ और परिवार के अन्य सदस्यों के बयान दर्ज किए। दल ने कृष्णा लंका थाने का दौरा कर अभिलेखों की जांच की और उस समय ड्यूटी पर तैनात करीब 11 पुलिसकर्मियों से पूछताछ की। जांच में अवैध हिरासत, हत्या और सबूत मिटाने के आरोपों को शामिल किया गया है।
आगे क्या होगा
उच्च न्यायालय की 29 जून की समय-सीमा के मद्देनजर SIT पर त्वरित कार्रवाई का दबाव है। नागाराजू से पूछताछ के बाद आगे की गिरफ्तारियाँ संभव हैं। मामला आंध्र प्रदेश में पुलिस जवाबदेही और न्यायिक निगरानी की व्यापक बहस का केंद्र बन गया है।