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विजयवाड़ा हिरासत में मौत: एसआईटी ने दो और कांस्टेबल गिरफ्तार किए, अब तक पाँच आरोपी जेल में

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विजयवाड़ा हिरासत में मौत: एसआईटी ने दो और कांस्टेबल गिरफ्तार किए, अब तक पाँच आरोपी जेल में

सारांश

विजयवाड़ा में 25 वर्षीय गाडे साई कृष्णा की कथित हिरासत में मौत का मामला गहराता जा रहा है — एसआईटी ने दो और कांस्टेबल गिरफ्तार किए, कुल पाँच आरोपी जेल में। सीसीटीवी फुटेज जानबूझकर डिलीट करने का आरोप इस मामले को और संगीन बनाता है।

मुख्य बातें

एसआईटी ने 1 जुलाई को कांस्टेबल बाबू राव और सांबैया को गिरफ्तार किया; दोनों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
इस मामले में अब तक गिरफ्तार आरोपियों की कुल संख्या पाँच हो गई है।
25 वर्षीय साई कृष्णा को 6 मई को कृष्णा लंका पुलिस स्टेशन में हिरासत में लिया गया था; परिवार का आरोप है कि उन्हें लॉकअप में पीट-पीटकर मारा गया।
एसआईटी ने अदालत को बताया कि सीसीटीवी फुटेज जानबूझकर डिलीट की गई और मृत्यु हिरासत में लगी चोटों के कारण हुई।
मुख्य आरोपी निलंबित एसएचओ एस.एस.वी.वी.
नागराजू को 23 जून को गिरफ्तार किया गया; 8 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में हैं।
मामला भारत न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 127(4), 127(6), 103(1) और 238 के तहत दर्ज है।

विजयवाड़ा में गाडे साई कृष्णा की कथित हिरासत में मौत के मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) ने 1 जुलाई को दो और पुलिस कांस्टेबलों को गिरफ्तार किया, जिससे इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की कुल संख्या पाँच हो गई है। गिरफ्तार किए गए कांस्टेबल बाबू राव (पाँचवें आरोपी) और सांबैया (छठे आरोपी) को द्वितीय एसीएम कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ अदालत ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

मजिस्ट्रेट का आदेश

मजिस्ट्रेट ने निर्देश दिया कि बाबू राव को अवनिगड्डा जेल में और सांबैया को गन्नावरम जेल में रखा जाए। आरोप है कि दोनों कांस्टेबल कृष्णा लंका पुलिस स्टेशन में तैनात थे और उन्होंने इस मामले के मुख्य आरोपी, निलंबित सर्कल इंस्पेक्टर (स्टेशन हाउस ऑफिसर) एस.एस.वी.वी. नागराजू की सहायता की।

मामले की पृष्ठभूमि

साई कृष्णा (25) को 6 मई को मार्कपुरम से उठाया गया और कृष्णा लंका पुलिस स्टेशन ले जाया गया। एसआईटी के अनुसार, उन्हें अवैध रूप से हिरासत में रखा गया, जिसके बाद वे लापता हो गए। परिवार ने आरोप लगाया है कि उन्हें लॉकअप में पीट-पीटकर मार दिया गया और शव को इलेक्ट्रिक श्मशान में जला दिया गया। गौरतलब है कि साई कृष्णा के खिलाफ कुछ मामले और गैर-जमानती वारंट लंबित थे।

पिछले सप्ताह एसआईटी ने निचली अदालत को सूचित किया कि साई कृष्णा की मृत्यु हिरासत में लगी चोटों के कारण हुई। अदालत को यह भी बताया गया कि पुलिस स्टेशन में लगे सीसीटीवी फुटेज को जानबूझकर डिलीट कर दिया गया था — जो इस मामले की गंभीरता को और बढ़ाता है।

मुख्य घटनाक्रम

मामले में 19 जून को साई कृष्णा की माँ विजया लक्ष्मी की शिकायत पर भारत न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 127(4), 127(6), 103(1) और 238 के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की गई। एसआईटी ने मुख्य आरोपी निलंबित एसएचओ नागराजू को 23 जून को गिरफ्तार किया, जिन्हें अगले दिन अदालत ने 8 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

दो हेड कांस्टेबल अशोक और नानी ने 29 जून (सोमवार) को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया। एसआईटी ने मंगलवार को उनसे पूछताछ की और अदालत ने उन्हें भी न्यायिक हिरासत में भेज दिया। रिपोर्टों के अनुसार, निलंबित एसएचओ की गिरफ्तारी के बाद दोनों छिप गए थे। राज्य सरकार ने दोनों हेड कांस्टेबलों को भी निलंबित कर दिया है।

एसआईटी की जांच का दायरा

एसआईटी निलंबित एसएचओ के खिलाफ गलत तरीके से हिरासत में रखने, हत्या करने और सबूत नष्ट करने के आरोपों की जांच कर रही है। रिपोर्टों के अनुसार, एसआईटी एक अन्य संदिग्ध सुरेश से भी पूछताछ कर रही है, जो नागराजू का करीबी बताया जा रहा है।

एसआईटी का नेतृत्व कानून एवं व्यवस्था महानिरीक्षक एम. रवि प्रकाश कर रहे हैं। इसमें पश्चिम गोदावरी के पुलिस अधीक्षक अदनान नईम अस्मी, अल्लूरी सीतारामाराजू के एसपी अमित बरदार सदस्य के रूप में और बापटला जिले के अतिरिक्त एसपी एल. सुधाकर जांच अधिकारी के रूप में शामिल हैं।

आगे क्या होगा

यह मामला आंध्र प्रदेश में पुलिस जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। सीसीटीवी फुटेज के कथित विनाश और एकाधिक पुलिसकर्मियों की संलिप्तता को देखते हुए, एसआईटी की जांच का विस्तार आगे और हो सकता है। अदालती कार्यवाही जारी रहने के साथ, साई कृष्णा के परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद इस जांच की प्रगति पर टिकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ सबूत नष्ट करना और आंतरिक संरक्षण जवाबदेही की राह में सबसे बड़ी बाधाएँ बनते हैं। सीसीटीवी फुटेज के कथित विनाश का तथ्य यह सवाल उठाता है कि पुलिस स्टेशनों में निगरानी तंत्र की स्वतंत्र निगरानी कौन करता है। एसआईटी की सक्रियता स्वागतयोग्य है, लेकिन असली कसौटी यह होगी कि क्या यह जांच केवल निचले स्तर के कांस्टेबलों तक सीमित रहती है, या श्रृंखला में ऊपर तक पहुँचती है। न्यायिक हिरासत में मौत के मामलों में दोषसिद्धि की दर ऐतिहासिक रूप से बेहद कम रही है — यही कारण है कि इस मामले की निगरानी जरूरी है।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विजयवाड़ा हिरासत में मौत का मामला क्या है?
25 वर्षीय गाडे साई कृष्णा को 6 मई को कृष्णा लंका पुलिस स्टेशन में हिरासत में लिया गया था, जिसके बाद वे लापता हो गए। परिवार का आरोप है कि उन्हें लॉकअप में पीट-पीटकर मारा गया और शव को इलेक्ट्रिक श्मशान में जला दिया गया। एसआईटी ने पुष्टि की है कि मृत्यु हिरासत में लगी चोटों के कारण हुई।
इस मामले में अब तक कितने पुलिसकर्मी गिरफ्तार हुए हैं?
1 जुलाई तक इस मामले में कुल पाँच पुलिसकर्मी गिरफ्तार हो चुके हैं। इनमें मुख्य आरोपी निलंबित एसएचओ नागराजू , दो हेड कांस्टेबल अशोक और नानी , और दो कांस्टेबल बाबू राव एवं सांबैया शामिल हैं।
एसआईटी इस मामले में किन धाराओं के तहत जांच कर रही है?
एसआईटी भारत न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 127(4), 127(6), 103(1) और 238 के तहत जांच कर रही है। ये धाराएँ गलत तरीके से हिरासत में रखने, हत्या और सबूत नष्ट करने से संबंधित हैं।
सीसीटीवी फुटेज के बारे में क्या जानकारी सामने आई है?
एसआईटी ने अदालत को बताया कि कृष्णा लंका पुलिस स्टेशन में लगे सीसीटीवी फुटेज को जानबूझकर डिलीट कर दिया गया था। यह तथ्य सबूत नष्ट करने के आरोप को और पुख्ता करता है और जांच को और जटिल बनाता है।
एसआईटी की जांच का नेतृत्व कौन कर रहा है?
एसआईटी का नेतृत्व कानून एवं व्यवस्था महानिरीक्षक एम. रवि प्रकाश कर रहे हैं। इसमें पश्चिम गोदावरी के एसपी अदनान नईम अस्मी , अल्लूरी सीतारामाराजू के एसपी अमित बरदार और बापटला के अतिरिक्त एसपी एल. सुधाकर शामिल हैं।
राष्ट्र प्रेस
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