विजयवाड़ा पुलिस लॉकअप में युवक लापता: CM चंद्रबाबू ने IPS जांच के आदेश दिए, CI निलंबित
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने बुधवार, 17 जून को विजयवाड़ा के पुलिस लॉकअप से एक युवक के लापता होने के मामले में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी द्वारा उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए। परिवार का कथित आरोप है कि गडे साई कृष्णा (लगभग 25 वर्ष) को पुलिस हिरासत में यातना देकर मार डाला गया। मुख्यमंत्री ने सिंगापुर दौरे से लौटने के तुरंत बाद अमरावती सचिवालय में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ आपात समीक्षा बैठक की।
मामले का घटनाक्रम
साई कृष्णा को कथित तौर पर 9 मई को एक चल रही जांच के सिलसिले में पुलिस ने हिरासत में लिया था। हिरासत के बाद से वह घर नहीं लौटा। एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद उसकी माता विजयलक्ष्मी ने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की और अपने बेटे को अदालत में पेश करने की मांग की। उच्च न्यायालय ने पुलिस को साई कृष्णा का पता लगाने और अगली सुनवाई में उन्हें अदालत के समक्ष पेश करने का स्पष्ट निर्देश दिया है।
सरकार की कार्रवाई
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने पुलिस महानिदेशक हरीश कुमार गुप्ता को गहन और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। जांच एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी द्वारा संचालित की जाएगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने कृष्णालंका सर्कल इंस्पेक्टर नागराजू को तत्काल निलंबित करने का आदेश दिया, जिन पर इस मामले में आरोप लगे हैं। डीजीपी ने बैठक में जानकारी दी कि सर्कल इंस्पेक्टर नागराजू का तबादला रिक्त रिजर्व (VR) में पहले ही कर दिया गया है।
उच्चस्तरीय बैठक में कौन-कौन शामिल
समीक्षा बैठक में उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण, मुख्य सचिव साई प्रसाद, खुफिया प्रमुख महेश चंद्र लड्ढा, विजयवाड़ा पुलिस आयुक्त राजशेखर बाबू और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने बैठक में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का स्पष्ट आग्रह किया।
परिवार के आरोप और न्यायिक हस्तक्षेप
साई कृष्णा की माता विजयलक्ष्मी का संदेह है कि पुलिस हिरासत में उनके बेटे की हत्या की गई। परिवार ने पुलिस पर यातना का गंभीर आरोप लगाया है — हालांकि ये आरोप अभी जांच के दायरे में हैं और किसी भी निष्कर्ष की पुष्टि नहीं हुई है। उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप इस मामले को संवैधानिक महत्व का बनाता है, क्योंकि बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका नागरिक स्वतंत्रता की सबसे बुनियादी कानूनी सुरक्षा है।
आगे क्या होगा
वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी की जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। उच्च न्यायालय की अगली सुनवाई में पुलिस को साई कृष्णा की स्थिति के बारे में स्पष्ट जवाब देना होगा। यह मामला आंध्र प्रदेश में पुलिस जवाबदेही और हिरासत में मानवाधिकारों की रक्षा के व्यापक सवालों को फिर से केंद्र में ला रहा है।