पुलिस हिरासत में साई कृष्ण की कथित मौत: CM चंद्रबाबू नायडू ने परिवार को दिलाया न्याय का भरोसा, CI निलंबित
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने विजयवाड़ा निवासी गाडे साई कृष्ण की पुलिस हिरासत में कथित मौत के मामले में पीड़ित परिवार को निष्पक्ष जांच और न्याय का आश्वासन दिया है। 19 जून को साई कृष्ण की मां विजय लक्ष्मी और परिवार के अन्य सदस्यों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग रखी।
मुख्यमंत्री का आश्वासन और प्रशासनिक कार्रवाई
मुख्यमंत्री नायडू ने विजय लक्ष्मी को सांत्वना देते हुए स्पष्ट किया कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने बताया कि मामले की जांच पहले ही आदेशित की जा चुकी है और कृष्णा लंका पुलिस थाने के सर्किल इंस्पेक्टर नागराजू को निलंबित कर दिया गया है। 17 जून को मुख्यमंत्री ने इस मामले की जांच एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी को सौंपी थी, जिसके बाद पूर्वी गोदावरी जिले के पुलिस अधीक्षक डी. नरसिम्हा किशोर विजयवाड़ा पहुँचे और परिवार के बयान दर्ज किए।
मुख्य घटनाक्रम: 9 मई से अब तक
26 वर्षीय साई कृष्ण को 9 मई को एक मामले में पूछताछ के लिए पुलिस अपने साथ ले गई थी, जिसके बाद वह घर वापस नहीं लौटा। परिजनों के अनुसार, पुलिस हिरासत में उसे प्रताड़ित किया गया और पीट-पीटकर उसकी हत्या कर दी गई — हालांकि यह आरोप अभी जांच के दायरे में है।
विजय लक्ष्मी ने उच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका दायर की, जिस पर अदालत ने कृष्णा लंका पुलिस को 15 जून तक साई कृष्ण को पेश करने का निर्देश दिया था। पुलिस के ऐसा न कर पाने पर उच्च न्यायालय ने अब 29 जून तक युवक को अदालत में पेश करने का आदेश दिया है।
कानूनी कार्रवाई: FIR और आरोप
विजय लक्ष्मी की शिकायत पर निलंबित सर्किल इंस्पेक्टर नागराजू के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत अवैध हिरासत, हत्या और साक्ष्य मिटाने का मामला दर्ज किया गया है। यह मामला अब न्यायिक और प्रशासनिक — दोनों स्तरों पर सक्रिय है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री से मुलाकात से एक दिन पहले पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के अध्यक्ष वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी विजयवाड़ा पहुँचकर पीड़ित परिवार से मिले थे। रेड्डी ने इस मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की माँग की है। यह मुलाकात राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि विपक्ष इस मामले को पुलिस जवाबदेही के व्यापक सवाल से जोड़ रहा है।
आगे क्या होगा
उच्च न्यायालय की 29 जून की समय-सीमा और CBI जांच की माँग के बीच यह मामला अब राज्य सरकार के लिए एक बड़ी परीक्षा बन गया है। मुलाकात के बाद विजय लक्ष्मी ने विश्वास जताया कि उन्हें न्याय मिलेगा। जांच के नतीजे और अदालत की अगली सुनवाई इस प्रकरण की दिशा तय करेगी।